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Srinagar News: ब्रारी नंबल भराव पूरी तरह नहीं हटाया गया, बचे हुए हिस्से पर अब भी खड़े हो रहे वाहन
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ब्रारी नंबल में किए गए अवैध भराव को जम्मू-कश्मीर लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एलसीएमए) के हस्तक्षेप के बावजूद केवल आंशिक रूप से ही हटाया जा सका है। मौके पर किए गए निरीक्षण से पता चला है कि जल निकाय के बाकी बचे भराव वाले हिस्से पर अभी भी वाहन खड़े किए जा रहे हैं।
यह मामला तब सामने आया था जब लगून के एक हिस्से पर मिट्टी और मलबे से भराव की बात सामने आई थी। इसके बाद एलसीएमए ने मशीनों की मदद से प्रभावित इलाके से भरा हुआ मलबा हटाने का काम शुरू किया था। यह मामला इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि एलसीएमए खुद ब्रारी नंबल के पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य में जुटी हुई है। जुलाई और अगस्त में किए गए निरीक्षणों के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने जल निकाय की नियमित निगरानी, कचरा व मलबा हटाने और इसके दीर्घकालिक संरक्षण के उपायों पर जोर दिया था। इसके अलावा, एलसीएमए ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष भी अपनी रिपोर्ट में ब्रारी नंबल की योजनाबद्ध ड्रेजिंग का उल्लेख किया था, जिसमें विभागीय मशीनों का उपयोग करके लगून के भीतर से जमी हुई मिट्टी और अस्थायी ढांचों को हटाना शामिल है। ताजा जमीनी हकीकत बताती है कि हाल ही में भरे गए इस हिस्से को अभी तक पूरी तरह से उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया गया है। बचे हुए भराव वाले हिस्से पर लगातार वाहनों की पार्किंग यह सवाल भी उठाती है कि क्या इस हिस्से को जल निकाय की जमीन माना जा रहा है या फिर इसका इस्तेमाल ऐसी गतिविधियों के लिए जारी रहेगा जो झील क्षेत्र में बिल्कुल प्रतिबंधित हैं। इस बीच, एनवायर्नमेंटल पॉलिसी ग्रुप (ईपीजी) ने भी इसी सप्ताह एलसीएमए से संपर्क कर इस कथित भराव की जानकारी मांगी थी। संस्था ने भराव के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और पूरे मलबे को तत्काल हटाने की मांग की है।
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श्रीनगर। ब्रारी नंबल में किए गए अवैध भराव को जम्मू-कश्मीर लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एलसीएमए) के हस्तक्षेप के बावजूद केवल आंशिक रूप से ही हटाया जा सका है। मौके पर किए गए निरीक्षण से पता चला है कि जल निकाय के बाकी बचे भराव वाले हिस्से पर अभी भी वाहन खड़े किए जा रहे हैं।
यह मामला तब सामने आया था जब लगून के एक हिस्से पर मिट्टी और मलबे से भराव की बात सामने आई थी। इसके बाद एलसीएमए ने मशीनों की मदद से प्रभावित इलाके से भरा हुआ मलबा हटाने का काम शुरू किया था। यह मामला इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि एलसीएमए खुद ब्रारी नंबल के पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य में जुटी हुई है। जुलाई और अगस्त में किए गए निरीक्षणों के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने जल निकाय की नियमित निगरानी, कचरा व मलबा हटाने और इसके दीर्घकालिक संरक्षण के उपायों पर जोर दिया था। इसके अलावा, एलसीएमए ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष भी अपनी रिपोर्ट में ब्रारी नंबल की योजनाबद्ध ड्रेजिंग का उल्लेख किया था, जिसमें विभागीय मशीनों का उपयोग करके लगून के भीतर से जमी हुई मिट्टी और अस्थायी ढांचों को हटाना शामिल है। ताजा जमीनी हकीकत बताती है कि हाल ही में भरे गए इस हिस्से को अभी तक पूरी तरह से उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया गया है। बचे हुए भराव वाले हिस्से पर लगातार वाहनों की पार्किंग यह सवाल भी उठाती है कि क्या इस हिस्से को जल निकाय की जमीन माना जा रहा है या फिर इसका इस्तेमाल ऐसी गतिविधियों के लिए जारी रहेगा जो झील क्षेत्र में बिल्कुल प्रतिबंधित हैं। इस बीच, एनवायर्नमेंटल पॉलिसी ग्रुप (ईपीजी) ने भी इसी सप्ताह एलसीएमए से संपर्क कर इस कथित भराव की जानकारी मांगी थी। संस्था ने भराव के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और पूरे मलबे को तत्काल हटाने की मांग की है।
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