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Srinagar News: दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी डॉक्टर को हाईकोर्ट से जमानत
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने बडगाम के एक डॉक्टर को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। उक्त डॉक्टर पर इस साल की शुरुआत में खान साहिब पुलिस स्टेशन में दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी।
न्यायाधीश मोहम्मद यूसुफ वानी की पीठ ने डॉक्टर अब्दुल मजीद भट की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि अब उन्हें हिरासत में रखने की कोई ठोस आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
दरअसल बडगाम के क्रिमशोरा के रहने वाले आरोपी डॉक्टर को 14 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ दुष्कर्म का प्रयास के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
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एक महिला इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गुरवैथ कलां आई थी। आरोप है कि जांच के दौरान डॉक्टर उसे दूसरे कमरे में ले गए, उसकी भाभी को अंदर आने से रोक दिया और महिला के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न का प्रयास किया।
डॉक्टर के वकील ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता महिला ने खुद मेडिकल जांच के लिए सहमति दी थी और बाद में उसने डॉक्टर की मंशा को गलत समझ लिया। वकील ने शुरुआती एफआईआर और जांच के दौरान दर्ज बयानों में विरोधाभास होने की बात भी कही।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया कि आरोपी पिछले लगभग पांच महीनों से हिरासत में है और शिकायतकर्ता सहित कुछ मुख्य गवाहों के बयान निचली अदालत में दर्ज किए जा चुके हैं।
कोर्ट ने ''''बेल नॉट जेल'''' के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि जब तक दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बीएनएस की धारा 62/64 के तहत आने वाले अपराधों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 480 के तहत जमानत पर कोई वैधानिक रोक नहीं है।
न्यायालय ने माना कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन गवाहों को धमकाने या स्वतंत्रता के दुरुपयोग की आशंकाओं को कड़े प्रतिबंधों के जरिए दूर किया जा सकता है।
हाई कोर्ट ने डॉक्टर अब्दुल मजीद भट को 1-1 लाख रुपये के निजी और मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने शर्तें रखी कि
आरोपी अदालत की अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जा सकेगा।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने बडगाम के एक डॉक्टर को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। उक्त डॉक्टर पर इस साल की शुरुआत में खान साहिब पुलिस स्टेशन में दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी।
न्यायाधीश मोहम्मद यूसुफ वानी की पीठ ने डॉक्टर अब्दुल मजीद भट की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि अब उन्हें हिरासत में रखने की कोई ठोस आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
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दरअसल बडगाम के क्रिमशोरा के रहने वाले आरोपी डॉक्टर को 14 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ दुष्कर्म का प्रयास के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
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एक महिला इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गुरवैथ कलां आई थी। आरोप है कि जांच के दौरान डॉक्टर उसे दूसरे कमरे में ले गए, उसकी भाभी को अंदर आने से रोक दिया और महिला के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न का प्रयास किया।
डॉक्टर के वकील ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता महिला ने खुद मेडिकल जांच के लिए सहमति दी थी और बाद में उसने डॉक्टर की मंशा को गलत समझ लिया। वकील ने शुरुआती एफआईआर और जांच के दौरान दर्ज बयानों में विरोधाभास होने की बात भी कही।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया कि आरोपी पिछले लगभग पांच महीनों से हिरासत में है और शिकायतकर्ता सहित कुछ मुख्य गवाहों के बयान निचली अदालत में दर्ज किए जा चुके हैं।
कोर्ट ने ''''बेल नॉट जेल'''' के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि जब तक दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बीएनएस की धारा 62/64 के तहत आने वाले अपराधों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 480 के तहत जमानत पर कोई वैधानिक रोक नहीं है।
न्यायालय ने माना कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन गवाहों को धमकाने या स्वतंत्रता के दुरुपयोग की आशंकाओं को कड़े प्रतिबंधों के जरिए दूर किया जा सकता है।
हाई कोर्ट ने डॉक्टर अब्दुल मजीद भट को 1-1 लाख रुपये के निजी और मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने शर्तें रखी कि
आरोपी अदालत की अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जा सकेगा।