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अल्लाह का शुक्र है... आखिरकार जिसका मुझे इंतजार था वो नसीब हुआ : अली शैदा
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-नजदवनिक पोत आलाव के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीरी शायरी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अली शैदा ने कहा कि इस सम्मान का इंतजार था। अल्लाह का शुक्र है कि आखिरकार नसीब हुआ।
अमर उजाला के साथ अपनी शायरी का सफर साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं 72 वर्ष का हो चुका हूं और जब से मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई शुरू की 1971-72 में तब से मैंने शायरी का सफर शुरू किया। और पिछले करीब 50 वर्षों से मेरी कलम कश्मीरी, उर्दू और अंग्रेजी की शायरी लिखती आ रही है।
उन्होंने कहा कि आज तक मेरी कश्मीरी में छह किताबें छपी हैं और उर्दू में मेरी चार किताबें छपी हैं। नजदवनिक पोत आलाव (नजदावन की गूंज) नामी किताब जिसके लिए मुझे सम्मानित किया गया है। यह किताब 2022 में छपी है। इसमें गजलें, नज़में और कुछ नए तजुर्बे हैं।
शैदा ने कहा कि पिछले वर्ष भी मेरी किताब शॉर्टलिस्ट हुई थी लेकिन इस बार आखिरकार जूरी ने मेरी किताब को इस काबिल समझा। मेरे सफर के पीछे मेरे अध्यापकों, मेरे परिवार वालों और मेरे दोस्तों का काफी योगदान रहा। मैं अंत में एक बार फिर जूरी का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने निष्पक्ष चयन किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीरी शायरी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अली शैदा ने कहा कि इस सम्मान का इंतजार था। अल्लाह का शुक्र है कि आखिरकार नसीब हुआ।
अमर उजाला के साथ अपनी शायरी का सफर साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं 72 वर्ष का हो चुका हूं और जब से मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई शुरू की 1971-72 में तब से मैंने शायरी का सफर शुरू किया। और पिछले करीब 50 वर्षों से मेरी कलम कश्मीरी, उर्दू और अंग्रेजी की शायरी लिखती आ रही है।
उन्होंने कहा कि आज तक मेरी कश्मीरी में छह किताबें छपी हैं और उर्दू में मेरी चार किताबें छपी हैं। नजदवनिक पोत आलाव (नजदावन की गूंज) नामी किताब जिसके लिए मुझे सम्मानित किया गया है। यह किताब 2022 में छपी है। इसमें गजलें, नज़में और कुछ नए तजुर्बे हैं।
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शैदा ने कहा कि पिछले वर्ष भी मेरी किताब शॉर्टलिस्ट हुई थी लेकिन इस बार आखिरकार जूरी ने मेरी किताब को इस काबिल समझा। मेरे सफर के पीछे मेरे अध्यापकों, मेरे परिवार वालों और मेरे दोस्तों का काफी योगदान रहा। मैं अंत में एक बार फिर जूरी का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने निष्पक्ष चयन किया।
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