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Srinagar: एसआईए ने नीलकंठ गंजू हत्याकांड की जांच के लिए जनता से मांगी मदद, 1989 में हुई थी हत्या

Tue, 08 Aug 2023 04:45 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली, जम्मू Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 08 Aug 2023 04:45 AM IST
सार

कश्मीरी पंडित सेवानिवृत न्यायाधीश गंजू की 04 नवंबर 1989 को श्रीनगर के हरि सिंह स्ट्रीट में दिनदहाड़े आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी।

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SIA seeks public help in probing Neelkanth Ganju murder case
SIA - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

केंद्र सरकार ने 1989-90 के दौरान कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार की फाइलों को 34 साल बाद फिर खोलने का फैसला किया है। सबसे पहले जस्टिस नीलकंठ गंजू की 1989 में हुई हत्या का मामला खोला जा रहा है। जस्टिस गंजू की हत्या जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फोर्स (जेकेएलएफ) के सरगना यासीन मलिक ने की थी। जस्टिस गंजू ने जेकेएलएफ के आतंकी मकबूल बट को फांसी की सजा सुनाई थी। मकबूल बट भारतीय राजनयिक रवींद्र म्हात्रे की ब्रिटेन में हत्या करने का दोषी पाया गया था।

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केंद्र सरकार ने जस्टिस गंजू की हत्या के पीछे की बड़ी आपराधिक साजिश का पता लगाने के लिए राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) को जिम्मेदारी सौंपी है। एसआईए ने सोमवार को एक आधिकारिक संदेश जारी कर इस हत्या के बारे में किसी भी तरह की जानकारी रखने वाले लोगों से आग्रह किया है कि वह हत्या के बारे में प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई भी तथ्य, परिस्थितियां या अन्य उपयोगी जानकारी जांच एजेंसी से साझा करें। एसआईए ने कहा है कि जानकारी साझा करने वाले की पूरी सूचना गोपनीय रखी जाएगी। सूचना साझा करने के लिए एसआईए ने फोन और ईमेल आईडी भी साझा किया है। ssp-kmr@ jkpolice.gov.in पर एसआईए को सूचनाएं दी जा सकती हैं।

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फैसला लेने में हुई देरी : अनमोल गंजू
जस्टिस नीलकंठ गंजू के पौत्र अनमोल गंजू का कहना है कि सरकार का कदम स्वागत योग्य है, लेकिन इसमें देरी हुई है। जब मेरे दादा की हत्या हुई थी तब मेरी उम्र 11 वर्ष थी। अब मैं 45 साल का हो चुका हूं, अगर सरकारें चाहतीं तो यह काम पहले ही किया जा सकता था। फिर भी कश्मीर में मारे गए हिंदुओं को न्याय मिलता है तो मुझे खुशी होगी।

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फैसला स्वागत योग्य : उर्मिला

जस्टिस गंजू की बेटी उर्मिला रैना ने इस बारे में दिल्ली में मीडिया से कहा, यह अच्छी खबर है। मैं चाहती हूं कि मेरे पिता की हत्या में शामिल सभी आतंकी पकड़े जाएं और उन्हें सजा मिले। अब तक किसी भी सरकार ने हमारी बात नहीं सुनी।

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