{"_id":"69503ad0262e59f1a9084484","slug":"shopian-held-protest-farmers-angry-from-railway-srinagar-news-c-10-lko1027-796880-2025-12-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: शोपियां में रेलवे भूमि सीमांकन के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: शोपियां में रेलवे भूमि सीमांकन के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन
विज्ञापन
शोपियां। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के आसपास के इलाकों से दर्जनों किसानों और ग्रामीणों ने प्रस्तावित रेलवे परियोजना के लिए भूमि के सीमांकन (डिमार्केशन) के खिलाफ शनिवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सर्वे प्रक्रिया को एकतरफा और असंवेदनशील बताते हुए कड़ा रोष जताया।
प्रदर्शन कर रहे किसानों और भूमि मालिकों का आरोप है कि सर्वे टीमें बिना किसी पूर्व सूचना, परामर्श या सहमति के उपजाऊ कृषि भूमि और बागानों में खंभे और निशान लगा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि उनकी आजीविका पूरी तरह खेती और बागवानी पर निर्भर है।
तख्तियां हाथ में लेकर और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अधिकारी विकास के नाम पर मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। उनका कहना था कि किसानों के हितों की रक्षा करने या स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय ऐसी परियोजनाएं ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से विस्थापित करने का खतरा पैदा कर रही हैं।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने कहा, हमारे बागान ही हमारी रोज़ी-रोटी का एकमात्र सहारा हैं। हमारे पास न कारखाने हैं, न व्यापार और न ही सरकारी नौकरियां। सेब ही हमारे परिवारों का पेट पालते हैं। अगर ये बागान छीन लिए गए तो हम कैसे जिएंगे। इस बीच भाजपा के जिला अध्यक्ष एवं राज्य कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद यूसुफ भट ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं को समाधान के लिए केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। संवाद
विज्ञापन
प्रदर्शन कर रहे किसानों और भूमि मालिकों का आरोप है कि सर्वे टीमें बिना किसी पूर्व सूचना, परामर्श या सहमति के उपजाऊ कृषि भूमि और बागानों में खंभे और निशान लगा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि उनकी आजीविका पूरी तरह खेती और बागवानी पर निर्भर है।
विज्ञापन
तख्तियां हाथ में लेकर और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अधिकारी विकास के नाम पर मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। उनका कहना था कि किसानों के हितों की रक्षा करने या स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय ऐसी परियोजनाएं ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से विस्थापित करने का खतरा पैदा कर रही हैं।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने कहा, हमारे बागान ही हमारी रोज़ी-रोटी का एकमात्र सहारा हैं। हमारे पास न कारखाने हैं, न व्यापार और न ही सरकारी नौकरियां। सेब ही हमारे परिवारों का पेट पालते हैं। अगर ये बागान छीन लिए गए तो हम कैसे जिएंगे। इस बीच भाजपा के जिला अध्यक्ष एवं राज्य कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद यूसुफ भट ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं को समाधान के लिए केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। संवाद