Leh: लेह में हिंसा के बाद धारा 163 लागू, आंदोलन के चलते अब तक 44 गिरफ्तार, बिना अनुमति रैली-जुलूस पर रोक
लद्दाख में छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद लेह में धारा 163 के तहत कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई, 44 गिरफ्तार हुए, जिनमें कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं जिन्हें एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया।
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24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के बाद हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। जिले में भारत नगर सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं। इसके तहत पांच या अधिक लोगों के एक साथ एकत्र होने पर रोक है। बिना लिखित अनुमति के कोई रैली, मार्च या जुलूस नहीं निकाला जा सकता। पूरे लेह में भारी सुरक्षा बल तैनात हैं।
यह आंदोलन लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा है। छठी अनुसूची मुख्य रूप से असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से जुड़ी है, लेकिन लद्दाख के लोग भी इसी ढांचे के तहत विशेष संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
अब तक हिंसा के मामले में 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं। वांगचुक लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत थे और हाल ही में उन्होंने भूख हड़ताल भी की थी, जो हिंसा के ठीक पहले खत्म हुई थी।
प्रदर्शन के दौरान 26 सितंबर को पुलिस की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हुई और लगभग 90 लोग घायल हुए। वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप है और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लेकर राजस्थान के जोधपुर जेल भेजा गया है।
इस बीच जेकेपीसीसी अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह आंदोलन बीते पांच वर्षों की धोखाधड़ी और अधूरे वादों का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग आज सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वही लोग अनुच्छेद 370 की समाप्ति के दौरान केंद्र सरकार के साथ खड़े थे और उसका समर्थन कर रहे थे।
आज लद्दाख की स्थिति बेहद संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व का विषय बन गई है। चार लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।