श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सरकार पर विपक्ष का हमला, रोजगार-आरक्षण पर मांगा जवाब
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के जारी सत्र में विपक्षी विधायकों ने रोजगार, आरक्षण और सरकार के अधूरे वादों को लेकर सवाल उठाए और सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों से बचने का आरोप लगाया।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा के जारी सत्र में विपक्षी विधायकों ने सरकार से रोजगार, आरक्षण और चुनावी वादों समेत कई मुद्दों पर जवाब मांगा। सत्र का मौजूदा चरण 21 सितंबर से 30 सितंबर तक निर्धारित है और 25 सितंबर को निजी सदस्य प्रस्तावों पर चर्चा होनी है।
नेशनल पैंथर्स पार्टी के विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने आरोप लगाया कि सरकार अपने वादों को पूरा करने को लेकर सदन में जवाब नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से विधायकों ने लगातार मुद्दे उठाए और प्रदर्शन भी किया, लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मनकोटिया ने कहा कि सार्वजनिक कामों से जुड़े मामलों में राज्य का दर्जा न होने को आधार बनाया जा रहा है।
पीडीपी विधायक आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने कहा कि विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायकों को अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिल रहा है, लेकिन रोजगार और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार चर्चा से बचती नजर आ रही है। रोजगार और आरक्षण पहले से ही इस सत्र में विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने सरकार की स्थिति का अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने के कारण प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों से जुड़ी कई सीमाएं हैं। उनके मुताबिक कई छोटे मामलों में भी उपराज्यपाल कार्यालय से मंजूरी या प्रतिक्रिया का इंतजार करना पड़ता है। विधानसभा का यह सत्र रोजगार, आरक्षण, राज्य का दर्जा और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का गवाह रहा है। सत्र की शुरुआत भी हंगामे के बीच हुई थी।