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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Kashmir Martyrs' Day: When the martyrs of Kashmir become the heroes of the country, only then will the distanc

Kashmir Martyrs' Day: 'जब कश्मीर के शहीद बनेंगे देश के नायक, तभी मिटेगी दिल की दूरी', बोलीं- महबूबा मुफ्ती

Sun, 13 Jul 2025 12:48 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: निकिता गुप्ता Updated Sun, 13 Jul 2025 12:48 PM IST
सार

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर और भारत के बीच की दिल की दूरी तब खत्म होगी जब केंद्र कश्मीर के शहीदों को भी अपने नायक मानेगा। 13 जुलाई के शहीद दिवस पर मजार-ए-शुहदा जाने से रोके जाने पर नेताओं ने प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का आरोप लगाया।

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Kashmir Martyrs' Day: When the martyrs of Kashmir become the heroes of the country, only then will the distanc
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि कश्मीर और भारत के बीच की दिल की दूरी तब ही खत्म होगी जब केंद्र सरकार कश्मीर के शहीदों को अपने नायक के रूप में स्वीकार करेगी, जैसे कश्मीरियों ने महात्मा गांधी और भगत सिंह जैसे राष्ट्रीय नायकों को अपनाया है।

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महबूबा मुफ्ती की यह टिप्पणी उस समय आई जब यह आरोप लगाया गया कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को श्रीनगर स्थित मजार-ए-शुहदा पर श्रद्धांजलि देने की अनुमति नहीं दी। मुफ्ती ने दावा किया कि स्थानीय निवासियों को उनके घरों में बंद कर दिया गया ताकि वे शहीदों को श्रद्धांजलि न दे सकें।
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उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, जिस दिन आप हमारे नायकों को वैसे ही स्वीकार करेंगे जैसे हमने आपके नायकों को किया, जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, दिल की दूरी सच में खत्म होगी।

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जब आप शहीदों के कब्रिस्तान को घेर लेते हैं, लोगों को उनके घरों में बंद कर देते हैं ताकि वे मजार-ए-शुहदा न जा सकें, तो यह बहुत कुछ कहता है। 13 जुलाई उन शहीदों की याद दिलाता है जिन्होंने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई थी। वे हमारे सच्चे नायक हैं।

वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोगों के घरों को बाहर से बंद किया गया, केंद्रीय बलों को जेलर की तरह तैनात किया गया और श्रीनगर के प्रमुख पुलों को अवरुद्ध कर दिया गया।

उन्होंने लिखा, यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक कदम है। प्रशासन आखिर किस बात से डरता है? यह उन लोगों की कब्रगाह है जिन्होंने कश्मीरियों को आवाज देने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।

उमर अब्दुल्ला ने 13 जुलाई की घटना की तुलना जलियांवाला बाग नरसंहार से करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वाले इन शहीदों को सिर्फ इसलिए खलनायक बताया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान थे।

वहीं, नेशनल कांफ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और जाडिबल के विधायक तनवीर सादिक ने भी आरोप लगाया कि पार्टी के कई नेताओं को उनके घरों में नजरबंद किया गया। सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई ऐसी कोशिश है जो हमें हमारे शहीदों को श्रद्धांजलि देने से रोकती है। यह इतिहास के प्रति घोर असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

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