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श्रीनगर: MBBS उम्मीदवारों को ठगने के आरोपी को जमानत से इंकार, अदालत ने अर्जी की खारिज

Mon, 21 Nov 2022 10:41 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Mon, 21 Nov 2022 10:41 AM IST
सार

न्यायाधीश ने अपने आठ पन्नों के आदेश में कहा कि मेरी राय है कि आरोपी इस चरण में जमानत की रियायत का हकदार नहीं है। इस स्तर पर आवेदन में कोई ऐसा कारण नहीं नजर आता जिसके आधार पर इस पर विचार किया जाना चाहिए।

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Srinagar court dismisses plea to Bail to accused of duping MBBS candidates
Arrest

विस्तार

श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने पिछले 15 वर्षों के दौरान मेडिकल सीटों की व्यवस्था कराने के बहाने एमबीबीएस के उम्मीदवारों से लाखों रुपये ठगने के आरोपी व्यक्ति की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजा मोहम्मद तस्लीम ने उत्तर प्रदेश निवासी शील कुमार शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि उसकी जमानत याचिका में दम नहीं है। शुक्ला को लंबी तलाश के बाद 11 अक्तूबर को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया था।

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न्यायाधीश ने अपने आठ पन्नों के आदेश में कहा कि मेरी राय है कि आरोपी इस चरण में जमानत की रियायत का हकदार नहीं है। इस स्तर पर आवेदन में कोई ऐसा कारण नहीं नजर आता जिसके आधार पर इस पर विचार किया जाना चाहिए। अत: इसे खारिज किया जाता है। शुक्ला 8 जुलाई 2007 को अनंतनाग जिले के मट्टन के जावेद अहमद शाह की शिकायत के बाद बडगाम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले में वांछित था। शाह ने आरोप लगाया था कि श्रीनगर के जवाहर नगर में वीवीसी अकादमी-नई दिल्ली की एक शाखा चलाने वाले अजय जायसवाल ने 10 लाख रुपये के बदले उनकी बेटी को ग्वालियर के एक मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का वादा किया था।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने अपनी जमीन बेच दी और 26 सितंबर 2007 को जायसवाल को 3 लाख रुपये नकद और चेक के माध्यम से 5 लाख रुपये की एक और किस्त का भुगतान किया, लेकिन न तो उसकी बेटी को एमबीबीएस में प्रवेश मिला और न ही उसे पैसा वापस किया गया। मामले की जांच के बाद जायसवाल को 8 दिसंबर 2007 को गिरफ्तार किया गया था। 
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उसने खुलासा किया कि वह अकादमी का सिर्फ एक एजेंट था, और शुक्ला जो प्रेसीडेंट था उसे लोगों से लिए गए पैसे भेजता था। जांच के दौरान, कुछ गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें यह पता चला कि दोनों आरोपी लोगों को धोखे से एक सुनियोजित साजिश के तहत अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए कह रहे थे और मोटी रकम की मांग कर रहे थे।

पुलिस जांच में पता चला कि शुक्ला ने वीवीसी एकेडमी का नाम बदलकर गाजियाबाद में विजडम इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेशल स्टडीज नाम से एक कॉलेज खोला था। इसके बाद जांच टीम ने अदालत से वारंट हासिल कर उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह स्पष्ट है कि आरोपी व्यक्तियों के बीच घनिष्ठ सांठगांठ है और जायसवाल को जमानत दिए जाने के बाद, वह कभी भी अदालत में पेश नहीं हुए और कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जा सकी। यदि आरोपी शुक्ला के पक्ष में जमानत दी जाती है तो इस बात की पूरी आशंका है कि वह भी भाग जाएगा, जो निश्चित रूप से मामले को अपने गुण-दोष के आधार तय करने में बाधा पैदा करेगा।


कई अन्य पीड़ित भी सामने आए
इस दौरान पुलवामा जिले के त्राल-पयीन के एक अन्य पीड़ित मीर नवीद गुल ने भी याचिका दाखिल कर दावा किया कि उसे भी आरोपियों ने ठगा है। गुल ने शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि आरोपी ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर उनसे 13 लाख रुपये की ठगी की। आवेदक ने कहा कि आरोपी ने न केवल विभिन्न विश्वविद्यालयों से जाली दस्तावेज और पत्र दिखाकर उसे धोखा दिया बल्कि घाटी में उसे और उसके दोस्त जुहैब रसूल और कई अन्य छात्रों के कॅरिअर को भी नष्ट कर दिया।

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