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बेगुनाह को छेड़ो मत, गुनहगार को छोड़ो मत
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श्रीनगर। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बिना किसी का नाम लिए तंज कसते हुए कहा कि सवाल ये भी उठाए जा रहे हैं कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद कहा गया था कि आतंकवाद समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा, मैं यह कहना चाहता हूं कि अगर आप आंकड़ों को देखेंगे तो काफी कमी आई है। यह सच है कि कुछ निर्दोष लोगों की हत्याएं हुई हैं, लेकिन यह भी सच है कि जो ईको-सिस्टम जान बूझकर लंबे समय से बनाया गया था, चाहे वह व्यापार में हो या सरकारी तंत्र में हो उसको खत्म करने की पुरजोर कोशिश हो रही है। कहा कि प्रशासन का बस एक ही मंत्र है जो मैं कई बार दोहरा चुका हूं और वह है, बेगुनाह को छेड़ो मत, गुनहगार को छोड़ो मत। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का संतोष है कि पिछले दो-ढाई वर्षों में किसी भी बेगुनाह की जान पुलिस कार्रवाई में नहीं गई। अगर कहीं संदेह पैदा हुआ है तो उस पर सख्त कार्रवाई करने की कोशिश की गई।
सिन्हा ने कहा कि 2016-19 और 2019-22 के बीच तुलना की जाए तो आंकड़े लगभग आधे हो गए हैं। लेकिन लोगों की अपेक्षा हमसे दूसरी है, क्योंकि देश में एक ऐसा प्रधानमंत्री है जिस पर पूरे देश को भरोसा है। एलजी ने कहा कि एक छोटी घटना भी लोगों को दहलाती है, उनकी अपेक्षा यह है कि एक भी घटना नहीं होनी चाहिए। आतंकी संगठनों के सरपरस्तों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है। इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन की संख्या बढ़ी है। ईको सिस्टम किस तरह से समाप्त हो इस पर पूरी कोशिश की जा रही है। दूसरे देश के इशारे पर अब यहां हड़तालें भी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हैं, किसी की दुकान और बिजनेस यूनिट को कोई जबरदस्ती बंद नहीं करा सकता। आम आदमी अमन चैन से रोजी रोटी कमाए, इसमें हम सफल हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टेरर फंडिंग और रिक्रूटमेंट पर काफी हद तक अंकुश लगा है। सपोर्ट सिस्टम को चलाने वाले लोगों के ताबूत में आखिरी कील भी जल्द ठोकी जाएगी। एलजी ने कहा कि मौत का कोई मुआवजा नहीं होता, जिस परिवार का दीया बुझ जाता है उसको देखने वाला कोई नहीं होता।
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सवाल उठता है कि न्याय किसको मिले
उप राज्यपाल ने लक्षित हत्याओं की पृष्ठभूमि में न्याय की मांग करने वालों पर तंज कसते हुए कहा, सवाल उठता है कि न्याय किसको मिले। इसको लेकर उन्होंने कहा, हाल में आपने एक घटना पढ़ी होगी। तालिबान के एक धड़े का कमांडर काफी कुख्यात था और अंधाधुंध हत्याओं के लिए दुनिया उसे जानती थी। आए दिन अस्पताल, स्कूल यहां तक कि मातम के लिए इकट्ठा हुई भीड़ पर भी आतंकी हमला करता था। उससे किसी ने पूछा कि इस तरह की विवेकहीन हत्याओं के कारण क्या है। उसने कहा कि हम लोगों की सेवा नहीं करते। न हम आम नागरिकों को बिजली, पानी दे सकते हैं और न ही सड़क, स्कूल, अस्पताल दे सकते हैं। हम लोगों को मात्र सुरक्षा की भावना दे सकते हैं, लेकिन हम यह सुरक्षा की भावना तब दे सकते हैं जब तक उनमें असुरक्षित होने की भावना आएगी। एलजी ने कहा कि तालिबानी कमांडर यह कहना चाहता था कि आम आदमी और प्रशासन दोनों को यह महसूस होना चाहिए कि जब तक तालिबान का शासन स्थापित नहीं होगा तब तक न तो आम आदमी न ही प्रशासन शांतिपूर्वक तरीके से रह सकता है।
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सिन्हा ने कहा कि 2016-19 और 2019-22 के बीच तुलना की जाए तो आंकड़े लगभग आधे हो गए हैं। लेकिन लोगों की अपेक्षा हमसे दूसरी है, क्योंकि देश में एक ऐसा प्रधानमंत्री है जिस पर पूरे देश को भरोसा है। एलजी ने कहा कि एक छोटी घटना भी लोगों को दहलाती है, उनकी अपेक्षा यह है कि एक भी घटना नहीं होनी चाहिए। आतंकी संगठनों के सरपरस्तों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है। इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन की संख्या बढ़ी है। ईको सिस्टम किस तरह से समाप्त हो इस पर पूरी कोशिश की जा रही है। दूसरे देश के इशारे पर अब यहां हड़तालें भी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हैं, किसी की दुकान और बिजनेस यूनिट को कोई जबरदस्ती बंद नहीं करा सकता। आम आदमी अमन चैन से रोजी रोटी कमाए, इसमें हम सफल हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टेरर फंडिंग और रिक्रूटमेंट पर काफी हद तक अंकुश लगा है। सपोर्ट सिस्टम को चलाने वाले लोगों के ताबूत में आखिरी कील भी जल्द ठोकी जाएगी। एलजी ने कहा कि मौत का कोई मुआवजा नहीं होता, जिस परिवार का दीया बुझ जाता है उसको देखने वाला कोई नहीं होता।
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सवाल उठता है कि न्याय किसको मिले
उप राज्यपाल ने लक्षित हत्याओं की पृष्ठभूमि में न्याय की मांग करने वालों पर तंज कसते हुए कहा, सवाल उठता है कि न्याय किसको मिले। इसको लेकर उन्होंने कहा, हाल में आपने एक घटना पढ़ी होगी। तालिबान के एक धड़े का कमांडर काफी कुख्यात था और अंधाधुंध हत्याओं के लिए दुनिया उसे जानती थी। आए दिन अस्पताल, स्कूल यहां तक कि मातम के लिए इकट्ठा हुई भीड़ पर भी आतंकी हमला करता था। उससे किसी ने पूछा कि इस तरह की विवेकहीन हत्याओं के कारण क्या है। उसने कहा कि हम लोगों की सेवा नहीं करते। न हम आम नागरिकों को बिजली, पानी दे सकते हैं और न ही सड़क, स्कूल, अस्पताल दे सकते हैं। हम लोगों को मात्र सुरक्षा की भावना दे सकते हैं, लेकिन हम यह सुरक्षा की भावना तब दे सकते हैं जब तक उनमें असुरक्षित होने की भावना आएगी। एलजी ने कहा कि तालिबानी कमांडर यह कहना चाहता था कि आम आदमी और प्रशासन दोनों को यह महसूस होना चाहिए कि जब तक तालिबान का शासन स्थापित नहीं होगा तब तक न तो आम आदमी न ही प्रशासन शांतिपूर्वक तरीके से रह सकता है।
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