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इस साल विस चुनाव के आसार नहीं-उमर
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जम्मू/श्रीनगर। नेकां उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का मानना है कि इस साल विधानसभा चुनाव होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। फिलहाल एक साल परिसीमन आयोग का कार्यकाल बढ़ा है। आगे भी यह बढ़ाया जा सकता है। उनकी प्राथमिकता पार्टी है न कि चुनाव। जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर विकास की कमी है। इसे जिला विकास परिषद को सशक्त बनाकर हम मजबूत कर सकते हैं। यह बात नेशनल कांफ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को पार्टी के नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मोहम्मद इट्टू की 27वीं पुण्य तिथि पर नूराबाद में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कही।
कुलगाम जिले में कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उमर ने कहा कि वर्तमान में लद्दाख के लोगों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नेशनल कांफ्रेंस का हमेशा से मानना रहा है कि लद्दाख के लोगों का भविष्य जम्मू-कश्मीर के साथ ही सुरक्षित था। दुर्भाग्य से हमने जो आशंका प्रकट की थीं वह धीरे-धीरे अब सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह देश 130 करोड़ भारतीयों का है और इसका नेतृत्व करने वालों को आम लोगों की इच्छाओं और आकांक्षाओं को साथ लेकर चलना होगा। देश किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं चल सकता।
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संविधान ईश निंदा की अनुमति नहीं देता
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कुरान की कुछ आयतों को चुनौती देने के लिए दायर याचिका पर उमर ने कहा कि याचिका दायर करने वाला भी एक मुसलमान ही है। इस तरह की हरकतें गैरकानूनी हैं। देश का संविधान ऐसे किसी काम (ईश निंदा) की अनुमति नहीं देता।
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कुलगाम जिले में कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उमर ने कहा कि वर्तमान में लद्दाख के लोगों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नेशनल कांफ्रेंस का हमेशा से मानना रहा है कि लद्दाख के लोगों का भविष्य जम्मू-कश्मीर के साथ ही सुरक्षित था। दुर्भाग्य से हमने जो आशंका प्रकट की थीं वह धीरे-धीरे अब सामने आ रही हैं।
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उन्होंने कहा कि यह देश 130 करोड़ भारतीयों का है और इसका नेतृत्व करने वालों को आम लोगों की इच्छाओं और आकांक्षाओं को साथ लेकर चलना होगा। देश किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं चल सकता।
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संविधान ईश निंदा की अनुमति नहीं देता
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कुरान की कुछ आयतों को चुनौती देने के लिए दायर याचिका पर उमर ने कहा कि याचिका दायर करने वाला भी एक मुसलमान ही है। इस तरह की हरकतें गैरकानूनी हैं। देश का संविधान ऐसे किसी काम (ईश निंदा) की अनुमति नहीं देता।