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Srinagar News: हाईकोर्ट के आदेश के नौ साल बाद भी सोनमर्ग में सिंध नाले को प्रदूषित कर रहा बिना ट्रीट किया सीवेज
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सीपीसीबी की जांच में पानी में भारी गंदगी और कोलीफॉर्म का खुलासा, 2017 में कोर्ट ने दिया था एसटीपी लगाने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सोनमर्ग में बिना शोधित सीवेज को सिंध नाले में जाने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के निर्देश दिए जाने के करीब नौ साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा जांच में इस जल निकाय में सीवेज से संबंधित गंभीर प्रदूषण पाया गया है, जिससे नदी के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की गति और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चार मई को एकत्र किए गए नमूनों के आधार पर जारी सीपीसीबी के ताजा आकलन के अनुसार, सिंध नाले में सोनमर्ग और शुटकड़ी पुल के निचले हिस्से सहित तीन प्रमुख स्थान अत्यधिक टोटल कोलीफॉर्म स्तर के कारण निर्धारित क्लास बी और क्लास सी मानकों पर खरे नहीं उतरे। सिंध नाले में मिलने वाले गंदे नालों में प्रदूषण की स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक मिली। सीपीसीबी ने जब चार नालों की जांच की, तो पता चला कि उनमें सीवेज और इंसानी मल से फैलने वाले बैक्टीरिया (फीकल कोलीफॉर्म) तय सीमा से लाखों गुना ज्यादा हैं। इसके साथ ही, पानी में ऑक्सीजन की खपत का स्तर भी बहुत अधिक (6 से 118 मिलीग्राम प्रति लीटर) पाया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि होटलों और घरों की नालियों से बिना साफ किया हुआ गंदा सीवेज सीधे तौर पर पानी में बहाया जा रहा है। सोनमर्ग के होटल ग्लेशियर/थाजवास के पास बहने वाले नाले में सबसे ज्यादा गंदगी पाई गई। यहां पानी में हानिकारक बैक्टीरिया और सीवेज की गंदगी का स्तर बहुत ज्यादा (करोड़ों की संख्या में) दर्ज किया गया। सीपीसीबी का कहना है कि सिंध नाले का पानी इतना खराब होने की सबसे बड़ी वजह यही गंदे नाले हैं, जिनका बिना साफ किया हुआ सीवेज सीधे नदी में गिर रहा है।
नौ साल पहले अदालत ने दिया था कड़ा आदेश
सितंबर 2017 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सोनमर्ग विकास प्राधिकरण (एसडीए) को इस पर्यटन स्थल पर एक कॉमन एसटीपी स्थापित करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, ताकि गंदा पानी सीधे सिंध नदी में न बहे। अदालत ने अधिकारियों को सोनमर्ग और उसके आसपास ठोस व गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे। सीपीसीबी के ताजा निरीक्षण से पता चला है कि सोनमर्ग के लिए प्रस्तावित सीवेज-ट्रीटमेंट का बुनियादी ढांचा अब भी अधूरा और निर्माणाधीन है। सीपीसीबी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के रिकॉर्ड के अनुसार, यह 1.2 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाला एमबीबीआर तकनीक पर आधारित एसटीपी है। निरीक्षण दल को सोनमर्ग विकास प्राधिकरण ने सूचित किया कि इसे चालू करने में अभी और समय लगेगा।
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प्राधिकरण ने स्थापना सहमति तक नहीं ली
इससे भी बड़ा खुलासा यह हुआ कि आकलन के समय प्राधिकरण ने जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति से इस परियोजना के लिए अनिवार्य ‘स्थापना सहमति’ तक हासिल नहीं की थी। यह स्थिति पर्यावरण संरक्षण के वादों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर करती है, विशेष रूप से तब जब सोनमर्ग में भारी संख्या में पर्यटक आते हैं और यहां कई होटल, रेस्तरां, बाजार व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। हालांकि, प्रशासन कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती की बात कह रहा है। पर्यटन विकास प्राधिकरण ने इस साल की शुरुआत में होटलों, गेस्ट हाउसों, रेस्तरांओं और दुकानदारों को नियमों के अनुसार कचरा अलग करने और उसके उचित निपटान के निर्देश जारी किए थे। सीपीसीबी ने संबंधित अधिकारियों से सिफारिश की है कि सिंध नाले में पानी छोड़ने से पहले सीवेज को पूरी तरह ट्रीट किया जाए और जल गुणवत्ता में और गिरावट रोकने के लिए नियमित निगरानी रखी जाए। यह पूरा मामला अब एनजीटी के विचाराधीन है, जहां सिंध नाले के प्रदूषण और इस क्षेत्र में पाई जाने वाली ट्राउट मछली के प्राकृतिक आवास पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की समीक्षा की जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सोनमर्ग में बिना शोधित सीवेज को सिंध नाले में जाने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के निर्देश दिए जाने के करीब नौ साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा जांच में इस जल निकाय में सीवेज से संबंधित गंभीर प्रदूषण पाया गया है, जिससे नदी के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की गति और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चार मई को एकत्र किए गए नमूनों के आधार पर जारी सीपीसीबी के ताजा आकलन के अनुसार, सिंध नाले में सोनमर्ग और शुटकड़ी पुल के निचले हिस्से सहित तीन प्रमुख स्थान अत्यधिक टोटल कोलीफॉर्म स्तर के कारण निर्धारित क्लास बी और क्लास सी मानकों पर खरे नहीं उतरे। सिंध नाले में मिलने वाले गंदे नालों में प्रदूषण की स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक मिली। सीपीसीबी ने जब चार नालों की जांच की, तो पता चला कि उनमें सीवेज और इंसानी मल से फैलने वाले बैक्टीरिया (फीकल कोलीफॉर्म) तय सीमा से लाखों गुना ज्यादा हैं। इसके साथ ही, पानी में ऑक्सीजन की खपत का स्तर भी बहुत अधिक (6 से 118 मिलीग्राम प्रति लीटर) पाया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि होटलों और घरों की नालियों से बिना साफ किया हुआ गंदा सीवेज सीधे तौर पर पानी में बहाया जा रहा है। सोनमर्ग के होटल ग्लेशियर/थाजवास के पास बहने वाले नाले में सबसे ज्यादा गंदगी पाई गई। यहां पानी में हानिकारक बैक्टीरिया और सीवेज की गंदगी का स्तर बहुत ज्यादा (करोड़ों की संख्या में) दर्ज किया गया। सीपीसीबी का कहना है कि सिंध नाले का पानी इतना खराब होने की सबसे बड़ी वजह यही गंदे नाले हैं, जिनका बिना साफ किया हुआ सीवेज सीधे नदी में गिर रहा है।
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नौ साल पहले अदालत ने दिया था कड़ा आदेश
सितंबर 2017 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सोनमर्ग विकास प्राधिकरण (एसडीए) को इस पर्यटन स्थल पर एक कॉमन एसटीपी स्थापित करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, ताकि गंदा पानी सीधे सिंध नदी में न बहे। अदालत ने अधिकारियों को सोनमर्ग और उसके आसपास ठोस व गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे। सीपीसीबी के ताजा निरीक्षण से पता चला है कि सोनमर्ग के लिए प्रस्तावित सीवेज-ट्रीटमेंट का बुनियादी ढांचा अब भी अधूरा और निर्माणाधीन है। सीपीसीबी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के रिकॉर्ड के अनुसार, यह 1.2 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाला एमबीबीआर तकनीक पर आधारित एसटीपी है। निरीक्षण दल को सोनमर्ग विकास प्राधिकरण ने सूचित किया कि इसे चालू करने में अभी और समय लगेगा।
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प्राधिकरण ने स्थापना सहमति तक नहीं ली
इससे भी बड़ा खुलासा यह हुआ कि आकलन के समय प्राधिकरण ने जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति से इस परियोजना के लिए अनिवार्य ‘स्थापना सहमति’ तक हासिल नहीं की थी। यह स्थिति पर्यावरण संरक्षण के वादों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर करती है, विशेष रूप से तब जब सोनमर्ग में भारी संख्या में पर्यटक आते हैं और यहां कई होटल, रेस्तरां, बाजार व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। हालांकि, प्रशासन कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती की बात कह रहा है। पर्यटन विकास प्राधिकरण ने इस साल की शुरुआत में होटलों, गेस्ट हाउसों, रेस्तरांओं और दुकानदारों को नियमों के अनुसार कचरा अलग करने और उसके उचित निपटान के निर्देश जारी किए थे। सीपीसीबी ने संबंधित अधिकारियों से सिफारिश की है कि सिंध नाले में पानी छोड़ने से पहले सीवेज को पूरी तरह ट्रीट किया जाए और जल गुणवत्ता में और गिरावट रोकने के लिए नियमित निगरानी रखी जाए। यह पूरा मामला अब एनजीटी के विचाराधीन है, जहां सिंध नाले के प्रदूषण और इस क्षेत्र में पाई जाने वाली ट्राउट मछली के प्राकृतिक आवास पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की समीक्षा की जा रही है।