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Srinagar News: सिनेमा के रंग में रंगेगी वादी... आज होगा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का भव्य आगाज
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श्रीनगर स्थित एसकेआईसीसी।
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अजीम यूसुफ
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की हसीन वादियों में सिनेमा, संस्कृति और रचनात्मक संवाद का महाकुंभ सजने जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर का पहला संस्करण सात से 10 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। रंग-ए-सिनेमा और व्हेयर स्टोरीज कम अलाइव थीम के साथ यह चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव श्रीनगर, जम्मू और गुलमर्ग में एक साथ सिनेमाई रंगों की छटा बिखेरेगा।
महोत्सव की औपचारिक शुरुआत सात सितंबर को दोपहर 12:30 बजे आईनॉक्स श्रीनगर में होगी। शाम 6:30 बजे श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में भव्य उद्घाटन समारोह होगा। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का औपचारिक समापन समारोह 10 सितंबर को शाम 6:30 बजे एसकेआईसीसी में होगा।
आयोजन समिति के अनुसार फिल्मोत्सव की शुरुआत सात सितंबर को दोपहर एक बजे आईनॉक्स श्रीनगर (स्क्रीन 1) में लेबनान की फिल्म डेड डॉग के प्रदर्शन के साथ होगी। सारा फ्रांसिस की निर्देशित यह फिल्म ''''इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन'''' वर्ग के तहत दिखाई जाएगी। 10 सितंबर को दोपहर एक बजे आईनॉक्स में जॉर्डन की बहुचर्चित फिल्म सिमसिम के प्रदर्शन के साथ उत्सव की स्क्रीनिग्स का समापन होगा, जिसका निर्देशन सोंदोस अल-स्मेरात ने किया है। महोत्सव के दौरान श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में स्क्रीन एक व स्क्रीन दो तथा आईनॉक्स में स्क्रीन एक, स्क्रीन दो व स्क्रीन तीन में विश्व भर और भारत की चुनिंदा फिल्मों का प्रदर्शन होगा। साथ ही जम्मू के वेव सिनेमा की स्क्रीन एक व स्क्रीन दो और गुलमर्ग के चयनित विशेष प्रदर्शन स्थल पर भी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।
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डल झील पर सजेगा फ्लोटिंग सिनेमा
फेस्टिवल का सबसे अनूठा आकर्षण फ्लोटिंग सिनेमा होगा, जहां वादियों और जलधाराओं के बीच खुले आसमान तले दर्शक सिनेमा का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके तहत चारों दिन रात आठ बजे से 10 बजे तक कश्मीर की पृष्ठभूमि पर बनी भारतीय सिनेमा की कालजयी फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया जाएग। इसमें सात सितंबर को शम्मी कपूर व सायरा बानो अभिनीत जंगली (1961), आठ सितंबर को राजेंद्र कुमार व साधना की लोकप्रिय फिल्म आरजू (1965), नौ सितंबर को शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर की सदाबहार फिल्म कश्मीर की कली (1964) और 10 सितंबर को यश चोपड़ा की क्लासिक रोमांटिक ड्रामा कभी कभी (1976) का प्रदर्शन होगा।
कश्मीरी पृष्ठभूमि की फिल्में भी होंगी शामिल
फिल्म महोत्सव के दौरान इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन, बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर, जम्मू एंड कश्मीर सेलेक्ट, भारत पैनोरमा, सिनेमा ऑफ द वर्ल्ड, डॉक्यूमेंट्री-हाइब्रिड, शॉर्ट फिल्म्स, मास्टरक्लास और स्पेशल स्क्रीनिंग जैसे विभिन्न वर्गों में दर्जनों राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें स्थानीय कश्मीरी पृष्ठभूमि पर बनी फिल्में तसर्रुफदार (जिन्स ऑफ कश्मीर), बट कोच, तालीम और नक्श-ए-दौर विशेष रूप से शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लोकप्रिय फिल्मों व सीरीज लैला मजनू, मिर्जापुर और इक्कीस की स्पेशल स्क्रीनिंग भी रखी गई है।
श्रीराम राघवन, अनिल मेहता समेत कई दिग्गज परिचर्चाओं में करेंगे शिरकत
एसकेआईसीसी में श्रीनगर के विभिन्न हॉलों में फिल्म निर्माण की बारीकियों पर गहन सत्र, वर्कशॉप और पैनल चर्चाएं आयोजित होंगी। जाने-माने निर्देशक व स्क्रीनराइटर श्रीराम राघवन आठ सितंबर (सुबह 10 बजे) द ट्रबल विद फेयरी-टेल एंडिंग्स विषय पर मास्टरक्लास देंगे। प्रख्यात सिनेमेटोग्राफर अनिल मेहता आठ सितंबर (दोपहर 1 बजे) डिकंस्ट्रक्टिंग विजुअल सबटेक्स्ट पर संवाद करेंगे। इसके अलावा कैनन की ओर से कैमरा टेक्नोलॉजी पर तकनीकी वर्कशॉप भी आयोजित होगी। वरिष्ठ संपादक रबी रंजन मैत्रा नौ सितंबर (सुबह 10 बजे) संपादन की कला पर क्लास लेंगे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से जुड़े अभिनेता व निर्देशक चित्तरंजन त्रिपाठी नौ सितंबर (दोपहर 1 बजे) अभिनय की बारीकियों को साझा करेंगे। प्रसिद्ध साउंड डिजाइनर बेलन फोंसेका 10 सितंबर को साउंडस्केप पर मास्टरक्लास प्रस्तुत करेंगे।
स्थानीय सिनेमाई विकास को गति देने के लिए होंगे विशेष सत्र
महोत्सव में स्थानीय सिनेमाई विकास को गति देने के लिए विशेष सत्र आयोजित होंगे। आठ सितंबर (दोपहर 2 बजे) अनलॉकिंग जम्मू एंड कश्मीर : द नेक्स्ट बिग सिनेमैटिक हब विषयक महत्वपूर्ण परिचर्चा होगी। इसमें प्रदेश के मुख्य सचिव अटल डुल्लू और सूचना विभाग की आयुक्त सचिव आर एलिस वाज जम्मू-कश्मीर फिल्म नीति, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और स्थानीय साझेदारियों पर अपनी बात रखेंगे। सत्र का संचालन प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक मयंक शेखर करेंगे। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण में प्रोत्साहित करने के लिए इकोज ऑफ द चिनार, अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण, एआई और एनिमेशन के जरिए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष विमर्श होंगे। उत्सव के अंतर्गत जेएंडके लाइब्रेरी की भी पहल की गई है, जो राज्य के कलाकारों, फिल्मकारों और प्रतिभाओं का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करेगी। आयोजकों ने दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों से आधिकारिक वेबसाइट अथवा मोबाइल ऐप के माध्यम से विस्तृत शेड्यूल देखने और इस ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की हसीन वादियों में सिनेमा, संस्कृति और रचनात्मक संवाद का महाकुंभ सजने जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर का पहला संस्करण सात से 10 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। रंग-ए-सिनेमा और व्हेयर स्टोरीज कम अलाइव थीम के साथ यह चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव श्रीनगर, जम्मू और गुलमर्ग में एक साथ सिनेमाई रंगों की छटा बिखेरेगा।
महोत्सव की औपचारिक शुरुआत सात सितंबर को दोपहर 12:30 बजे आईनॉक्स श्रीनगर में होगी। शाम 6:30 बजे श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में भव्य उद्घाटन समारोह होगा। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का औपचारिक समापन समारोह 10 सितंबर को शाम 6:30 बजे एसकेआईसीसी में होगा।
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आयोजन समिति के अनुसार फिल्मोत्सव की शुरुआत सात सितंबर को दोपहर एक बजे आईनॉक्स श्रीनगर (स्क्रीन 1) में लेबनान की फिल्म डेड डॉग के प्रदर्शन के साथ होगी। सारा फ्रांसिस की निर्देशित यह फिल्म ''''इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन'''' वर्ग के तहत दिखाई जाएगी। 10 सितंबर को दोपहर एक बजे आईनॉक्स में जॉर्डन की बहुचर्चित फिल्म सिमसिम के प्रदर्शन के साथ उत्सव की स्क्रीनिग्स का समापन होगा, जिसका निर्देशन सोंदोस अल-स्मेरात ने किया है। महोत्सव के दौरान श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में स्क्रीन एक व स्क्रीन दो तथा आईनॉक्स में स्क्रीन एक, स्क्रीन दो व स्क्रीन तीन में विश्व भर और भारत की चुनिंदा फिल्मों का प्रदर्शन होगा। साथ ही जम्मू के वेव सिनेमा की स्क्रीन एक व स्क्रीन दो और गुलमर्ग के चयनित विशेष प्रदर्शन स्थल पर भी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।
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डल झील पर सजेगा फ्लोटिंग सिनेमा
फेस्टिवल का सबसे अनूठा आकर्षण फ्लोटिंग सिनेमा होगा, जहां वादियों और जलधाराओं के बीच खुले आसमान तले दर्शक सिनेमा का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके तहत चारों दिन रात आठ बजे से 10 बजे तक कश्मीर की पृष्ठभूमि पर बनी भारतीय सिनेमा की कालजयी फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया जाएग। इसमें सात सितंबर को शम्मी कपूर व सायरा बानो अभिनीत जंगली (1961), आठ सितंबर को राजेंद्र कुमार व साधना की लोकप्रिय फिल्म आरजू (1965), नौ सितंबर को शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर की सदाबहार फिल्म कश्मीर की कली (1964) और 10 सितंबर को यश चोपड़ा की क्लासिक रोमांटिक ड्रामा कभी कभी (1976) का प्रदर्शन होगा।
कश्मीरी पृष्ठभूमि की फिल्में भी होंगी शामिल
फिल्म महोत्सव के दौरान इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन, बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर, जम्मू एंड कश्मीर सेलेक्ट, भारत पैनोरमा, सिनेमा ऑफ द वर्ल्ड, डॉक्यूमेंट्री-हाइब्रिड, शॉर्ट फिल्म्स, मास्टरक्लास और स्पेशल स्क्रीनिंग जैसे विभिन्न वर्गों में दर्जनों राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें स्थानीय कश्मीरी पृष्ठभूमि पर बनी फिल्में तसर्रुफदार (जिन्स ऑफ कश्मीर), बट कोच, तालीम और नक्श-ए-दौर विशेष रूप से शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लोकप्रिय फिल्मों व सीरीज लैला मजनू, मिर्जापुर और इक्कीस की स्पेशल स्क्रीनिंग भी रखी गई है।
श्रीराम राघवन, अनिल मेहता समेत कई दिग्गज परिचर्चाओं में करेंगे शिरकत
एसकेआईसीसी में श्रीनगर के विभिन्न हॉलों में फिल्म निर्माण की बारीकियों पर गहन सत्र, वर्कशॉप और पैनल चर्चाएं आयोजित होंगी। जाने-माने निर्देशक व स्क्रीनराइटर श्रीराम राघवन आठ सितंबर (सुबह 10 बजे) द ट्रबल विद फेयरी-टेल एंडिंग्स विषय पर मास्टरक्लास देंगे। प्रख्यात सिनेमेटोग्राफर अनिल मेहता आठ सितंबर (दोपहर 1 बजे) डिकंस्ट्रक्टिंग विजुअल सबटेक्स्ट पर संवाद करेंगे। इसके अलावा कैनन की ओर से कैमरा टेक्नोलॉजी पर तकनीकी वर्कशॉप भी आयोजित होगी। वरिष्ठ संपादक रबी रंजन मैत्रा नौ सितंबर (सुबह 10 बजे) संपादन की कला पर क्लास लेंगे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से जुड़े अभिनेता व निर्देशक चित्तरंजन त्रिपाठी नौ सितंबर (दोपहर 1 बजे) अभिनय की बारीकियों को साझा करेंगे। प्रसिद्ध साउंड डिजाइनर बेलन फोंसेका 10 सितंबर को साउंडस्केप पर मास्टरक्लास प्रस्तुत करेंगे।
स्थानीय सिनेमाई विकास को गति देने के लिए होंगे विशेष सत्र
महोत्सव में स्थानीय सिनेमाई विकास को गति देने के लिए विशेष सत्र आयोजित होंगे। आठ सितंबर (दोपहर 2 बजे) अनलॉकिंग जम्मू एंड कश्मीर : द नेक्स्ट बिग सिनेमैटिक हब विषयक महत्वपूर्ण परिचर्चा होगी। इसमें प्रदेश के मुख्य सचिव अटल डुल्लू और सूचना विभाग की आयुक्त सचिव आर एलिस वाज जम्मू-कश्मीर फिल्म नीति, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और स्थानीय साझेदारियों पर अपनी बात रखेंगे। सत्र का संचालन प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक मयंक शेखर करेंगे। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण में प्रोत्साहित करने के लिए इकोज ऑफ द चिनार, अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण, एआई और एनिमेशन के जरिए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष विमर्श होंगे। उत्सव के अंतर्गत जेएंडके लाइब्रेरी की भी पहल की गई है, जो राज्य के कलाकारों, फिल्मकारों और प्रतिभाओं का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करेगी। आयोजकों ने दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों से आधिकारिक वेबसाइट अथवा मोबाइल ऐप के माध्यम से विस्तृत शेड्यूल देखने और इस ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।