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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: सहकारी बैंक के चेयरमैन सरकारी नौकर नहीं, एफआईआर पर रोक
Tue, 03 May 2022 03:38 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 03 May 2022 03:38 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजीव कुमार ने एफआईआर पर रोक के आदेश देते हुए एसीबी के एसएसपी और अनंतनाग पुलिस थाने के नाम से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
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jammu kashmir high court kashmir
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शहरी सहकारी बैंक के चेयरमैन गुलाम नबी शाह के खिलाफ दर्ज एंटी करप्शन ब्यूरो की एफआईआर पर रोक लगा दी है। आरोपी चेयरमैन के वकील ने दलील दी कि बैंक के चेयरमैन सरकारी नौकर की श्रेणी में नहीं आते। ऐसे में एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। न्यायाधीश संजीव कुमार ने एफआईआर पर रोक के आदेश देते हुए एसीबी के एसएसपी और अनंतनाग पुलिस थाने के नाम से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
एसीबी के अनुसार शहरी सहकारी बैंक अनंतनाग ने निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए चतुर्थ श्रेणी के विभिन्न पदों पर ऐसे लोगों को भर्ती कर दिया, जो उसकी योग्यता नहीं रखते थे। पहले इन पदों पर अस्थायी तैनाती की गई और बाद में इन कर्मियों को स्थायी कर दिया गया। एसीबी के अनुसार बैंक के निदेशक मंडल ने इन भर्तियों को मंजूरी भी दे दी। चेयरमैन के वकील फैसल कादरी ने कोर्ट में कहा कि सहकारी समिति के चेयरमैन सरकारी नौकर की श्रेणी में नहीं आते, लिहाजा प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत चेयरमैन के खिलाफ मामला दर्ज करना गैर कानूनी होगा। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि बैंक में जो भी भर्ती हुई, उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया है।
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एसीबी के अनुसार शहरी सहकारी बैंक अनंतनाग ने निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए चतुर्थ श्रेणी के विभिन्न पदों पर ऐसे लोगों को भर्ती कर दिया, जो उसकी योग्यता नहीं रखते थे। पहले इन पदों पर अस्थायी तैनाती की गई और बाद में इन कर्मियों को स्थायी कर दिया गया। एसीबी के अनुसार बैंक के निदेशक मंडल ने इन भर्तियों को मंजूरी भी दे दी। चेयरमैन के वकील फैसल कादरी ने कोर्ट में कहा कि सहकारी समिति के चेयरमैन सरकारी नौकर की श्रेणी में नहीं आते, लिहाजा प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत चेयरमैन के खिलाफ मामला दर्ज करना गैर कानूनी होगा। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि बैंक में जो भी भर्ती हुई, उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया है।
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