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J&K Custodial Torture Case: कांस्टेबल पर अत्याचार का आरोप, आठ पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका अदालत ने की खारिज
Sun, 05 Oct 2025 12:14 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Sun, 05 Oct 2025 12:14 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में पुलिस कांस्टेबल पर कथित अत्याचार के मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार आठ पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका श्रीनगर की अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में जांच के दौरान जमानत नहीं दी जा सकती और हिरासत में निगरानी बनाए रखना जरूरी है।
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- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के एक चर्चित हिरासत में प्रताड़ना (कस्टोडियल टॉर्चर) मामले में श्रीनगर की अदालत ने आठ पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इन पुलिसकर्मियों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था। यह आदेश श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आदिल मुश्ताक अहमद ने शनिवार को सुनाया।
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जिन पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका खारिज हुई है, उनमें डीएसपी एजाज अहमद नाइक, इंस्पेक्टर रियाज अहमद मीर, तनवीर अहमद मल्ला, अल्ताफ हुसैन भट, मोहम्मद यूनिस खान, शाकिर हुसैन खोजा, शाहनवाज अहमद डीदड़, और जहांगीर अहमद बेग शामिल हैं। सभी ने अदालत में अलग-अलग जमानत अर्जियां दाखिल की थीं।
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इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने फरवरी 2023 में संयुक्त पूछताछ केंद्र (जेआईसी), कुपवाड़ा में एक पुलिस कांस्टेबल खुरशीद अहमद चौहान को कथित रूप से गैरकानूनी हिरासत में रखकर शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया था। यह मामला सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सौंपा गया था।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा
तीनों याचिकाओं में ऐसा कोई असाधारण कारण सामने नहीं आया है, जिससे इस सिद्धांत से हटने का आधार बने कि गंभीर हिरासती हिंसा के मामलों में जांच के दौरान जमानत नहीं दी जाती।
न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला सेशंस ट्रायएबल (गंभीर और उच्च न्यायालय में विचारणीय) और गैर-जमानती अपराधों की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में स्थानीय अदालत की अधिकार-सीमा सीमित होती है।
साथ ही अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने यह ठोस रूप से साबित किया है कि हिरासत में रखकर निगरानी बनाए रखना आवश्यक है, ताकि मामले में हस्तक्षेप या गवाहों को डराने-धमकाने की कोई संभावना न रहे।