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उप महाधिवक्ता की हत्या के दोषी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
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श्रीनगर। जम्मू में चौदह वर्ष पूर्व हुए उप महाधिवक्ता हत्याकांड के एक दोषी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि दोषी को जेल में चौदह वर्ष हो चुके हैं। उसकी अपील पर कोर्ट में जल्द सुनवाई संभव नहीं है। लिहाजा उसकी जमानती अर्जी को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को जमानत पर रिहाई की शर्तें तय करने के निर्देश दिए जाते हैं।
अभियोजन के अनुसार उप महाधिवक्ता अजीत सिंह डोगरा पर कोर्ट से लौटते समय 10 जनवरी 2008 को हमलावरों ने पिस्टल और तेजधार हथियारों से हमला कर दिया था। बुरी तरह से घायल अजीत सिंह को जीएमसी जम्मू ले जाया गया, जहां से 12 जनवरी को उन्हें अपोलो अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया गया। 19 जनवरी 2008 को उपचार के दौरान अजीत सिंह ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने हत्या के आरोपी विशाल शर्मा, अशोक शर्मा और अमरीश खजूरिया को हिरासत में ले लिया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट ने जुलाई 2020 में तीनों को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। इन्हीं में शामिल दोषी विशाल शर्मा ने हाईकोर्ट में सजा निलंबित करने की अर्जी दी, जिसे खारिज कर दिया गया। विशाल ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर सजा निलंबित करने की मांग की। मंगलवार को जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस बीवी नागारत्ना ने कहा कि इस मामले की परिस्थितियों और खासकर याची के 14 साल से जेल में होने की दलील को देखते हुए वह जमानत अर्जी स्वीकार करते हैं।
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अभियोजन के अनुसार उप महाधिवक्ता अजीत सिंह डोगरा पर कोर्ट से लौटते समय 10 जनवरी 2008 को हमलावरों ने पिस्टल और तेजधार हथियारों से हमला कर दिया था। बुरी तरह से घायल अजीत सिंह को जीएमसी जम्मू ले जाया गया, जहां से 12 जनवरी को उन्हें अपोलो अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया गया। 19 जनवरी 2008 को उपचार के दौरान अजीत सिंह ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने हत्या के आरोपी विशाल शर्मा, अशोक शर्मा और अमरीश खजूरिया को हिरासत में ले लिया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट ने जुलाई 2020 में तीनों को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। इन्हीं में शामिल दोषी विशाल शर्मा ने हाईकोर्ट में सजा निलंबित करने की अर्जी दी, जिसे खारिज कर दिया गया। विशाल ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर सजा निलंबित करने की मांग की। मंगलवार को जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस बीवी नागारत्ना ने कहा कि इस मामले की परिस्थितियों और खासकर याची के 14 साल से जेल में होने की दलील को देखते हुए वह जमानत अर्जी स्वीकार करते हैं।
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