Leh Protest: लद्दाख में हिंसा के बीच उमर अब्दुल्ला का केंद्र सरकार पर वार, कहा- हम भी धोखे और निराशा में हैं
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख में राज्य की मांग पर हुए हिंसक प्रदर्शन पर चिंता जताई और कहा कि जम्म कश्मीर के लोगों को भी राज्य की मांग का वादा पूरा न होने से गहरा धोखा महसूस हो रहा है।
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को लद्दाख में पूर्ण राज्य की मांग (स्टेटहुड)और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हो रही प्रदर्शनों पर अपनी चिंता और निराशा जताई। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने का जो वादा था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ है, जिससे वहां के लोग धोखे और निराशा का सामना कर रहे हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लद्दाख के लोगों को तो राज्य का वादा तक नहीं मिला था, बल्कि 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद लद्दाख ने यूनियन टेरिटरी का दर्जा पाकर जश्न मनाया था। लेकिन आज वहां के लोग खुद को धोखा महसूस कर रहे हैं और गुस्से में हैं। अब सोचिए कि हम जम्मू-कश्मीर के लोग कितना धोखा और निराशा महसूस कर रहे हैं, जबकि हमने लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी से राज्य की मांग की है।
लद्दाख में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें भाजपा कार्यालय पर भी हमला किया गया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य की मांग और छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करने की मांग की है।
लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो भूख हड़ताल पर हैं, उन्होंने वीडियो जारी कर हिंसा पर दुख व्यक्त किया और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, यह युवा वर्ग का गुस्सा है, यह एक जनरेशन जेन जी की क्रांति है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस हिंसा को रोकें क्योंकि यह आंदोलन को नुकसान पहुंचा रहा है।
राष्ट्रीय सम्मेलन के विधायक तानवीर सादिक ने कहा कि स्थिति के ठीक से निपटान में विफलता हुई है। उन्होंने हिंसा की निंदा करते हुए केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह लद्दाख के लोगों से बातचीत करे।
यह ध्यान देने योग्य है कि संविधान की छठी अनुसूची के तहत असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन के लिए प्रावधान हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों के लिए राज्य की मांग जोर पकड़ रही है।