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Kathua News: महानपुर ट्रॉमा सेंटर में सिर्फ दो स्पेशलिस्ट डॉक्टर, आठ पद रिक्त
Tue, 29 Apr 2025 01:06 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 29 Apr 2025 01:06 AM IST
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पहाड़ी इलाकों में आपात स्थिति और दुर्घटनाओं से निपटने की योजना हो रही विफल
आपात स्थिति में जीएमसी कठुआ रेफर किए जाते हैं मरीज, धूल फांक रही करोड़ों की मशीनरी
कठुआ। ट्रॉमा सेंटर महानपुर में आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही कार्यात्मक ऑपरेशन थियेटर की सुविधा है। इसके चलते सेंटर में स्थापित करोड़ों की मशीनरी धूल फांक रही है।
मैनपावर के नाम पर ट्रॉमा सेंटर महानपुर में केवल दो ही स्पेशलिस्ट डॉक्टर की तैनाती की गई। इसमें से एक को लंबे समय से उपजिला अस्पताल में संलग्न कर दिया है। मौजूदा समय में ट्रॉमा सेंटर को दिन-रात कार्यात्मक बनाने के लिए सिर्फ चार चिकित्सा अधिकारियों और तीन फार्मासिस्ट की तैनाती की गई है, जो केवल आपात स्थिति में आए मरीजों की मरहम-पट्टी कर राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ रेफर कर देते हैं। ट्रॉमा सेंटर के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 10 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही पैथोलॉजी विशेषज्ञ मौजूद है। एक अन्य स्पेशलिस्ट कहने को तो यहां तैनात है, पर लंबे समय अपनी सेवा उपजिला अस्पताल हीरानगर में दे रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सेंटर में सिर्फ डिजिटल एक्सरे ही उपलब्ध है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की सुविधा होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। इसके अलावा दस साल तक ऑपरेशन थियेटर इस्तेमाल न होने से खंडहर हो गए हैं। इसका विभाग की ओर से नवीनीकरण किया जा रहा है। संवाद
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80 फीसदी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नहीं है तैनाती
ट्रॉमा सेंटर के लिए सरकार की ओर से 10 स्वीकृत पद हैं। इसमें स्त्री रोग, फिजीशियन, बाल रोग, सर्जरी, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, ऑर्थोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, रेडियोलॉजी, ईएनटी और पैथोलॉजी शामिल हैं। मौजूदा समय में संलग्न एनेस्थिसियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजी विशेषज्ञ को मिलाकर सिर्फ दो ही स्पेशलिस्ट डाॅक्टर तैनात है। बाकी के आठ पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोग आपात स्थिति में 50 किलोमीटर दूर जीएमसी कठुआ या पठानकोट के निजी अस्पताल में जाने को मजबूर हैं।
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वित्त वर्ष 2008-09 में ट्रॉमा सेंटर बनाने की हुई थी घोषणा
सरकार ने महानपुर सहित जम्मू-संभाग के उधमपुर, रामबन और डोडा में चार ट्रॉमा सेंटर बनाने की घोषणा की थी। महानपुर ट्रॉमा सेंटर को श्रेणी-3 स्तर में रखा गया था। इसका निर्माण कार्य वर्ष 2015-16 में पूरा हो गया था, जबकि संभाग के अन्य ट्रॉमा सेंटर को श्रेणी-2 के स्तर के बनाए गए हैं। इस ट्रॉमा सेंटर का उद्देश्य बनी, बसोहली और बिलावर के पहाड़ी इलाके में होनी वाली सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थिति से निपटना था, लेकिन दुर्भाग्य से कभी भी प्राप्त मात्रा में स्पेशलिस्ट डॉक्टर न मिलने से यह सुविधा स्थानीय लोगों को नहीं मिली।
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बिलावर, बसोहली और बनी के क्षेत्र में आए दिन हादसे होते रहते हैं, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। इन्हें उपचार के लिए कठुआ जीएमसी तक ले जाने में समय लगता है और कई लोग तो समय पर उपचार न मिलने से दम तोड़ देते हैं। महानपुर ट्रॉमा सेंटर में विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा संबंधित मंत्री से लेकर आयुक्त सचिव के साथ भी उठाया गया है। उन्होंने डॉक्टरों की नियुक्ति किए जाने को लेकर आश्वासन दिया है। सरकार को इस क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए इस समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
ठाकुर दर्शन सिंह, विधायक, बसोहली
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आपात स्थिति में जीएमसी कठुआ रेफर किए जाते हैं मरीज, धूल फांक रही करोड़ों की मशीनरी
कठुआ। ट्रॉमा सेंटर महानपुर में आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही कार्यात्मक ऑपरेशन थियेटर की सुविधा है। इसके चलते सेंटर में स्थापित करोड़ों की मशीनरी धूल फांक रही है।
मैनपावर के नाम पर ट्रॉमा सेंटर महानपुर में केवल दो ही स्पेशलिस्ट डॉक्टर की तैनाती की गई। इसमें से एक को लंबे समय से उपजिला अस्पताल में संलग्न कर दिया है। मौजूदा समय में ट्रॉमा सेंटर को दिन-रात कार्यात्मक बनाने के लिए सिर्फ चार चिकित्सा अधिकारियों और तीन फार्मासिस्ट की तैनाती की गई है, जो केवल आपात स्थिति में आए मरीजों की मरहम-पट्टी कर राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ रेफर कर देते हैं। ट्रॉमा सेंटर के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 10 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही पैथोलॉजी विशेषज्ञ मौजूद है। एक अन्य स्पेशलिस्ट कहने को तो यहां तैनात है, पर लंबे समय अपनी सेवा उपजिला अस्पताल हीरानगर में दे रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सेंटर में सिर्फ डिजिटल एक्सरे ही उपलब्ध है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की सुविधा होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। इसके अलावा दस साल तक ऑपरेशन थियेटर इस्तेमाल न होने से खंडहर हो गए हैं। इसका विभाग की ओर से नवीनीकरण किया जा रहा है। संवाद
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80 फीसदी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नहीं है तैनाती
ट्रॉमा सेंटर के लिए सरकार की ओर से 10 स्वीकृत पद हैं। इसमें स्त्री रोग, फिजीशियन, बाल रोग, सर्जरी, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, ऑर्थोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, रेडियोलॉजी, ईएनटी और पैथोलॉजी शामिल हैं। मौजूदा समय में संलग्न एनेस्थिसियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजी विशेषज्ञ को मिलाकर सिर्फ दो ही स्पेशलिस्ट डाॅक्टर तैनात है। बाकी के आठ पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोग आपात स्थिति में 50 किलोमीटर दूर जीएमसी कठुआ या पठानकोट के निजी अस्पताल में जाने को मजबूर हैं।
वित्त वर्ष 2008-09 में ट्रॉमा सेंटर बनाने की हुई थी घोषणा
सरकार ने महानपुर सहित जम्मू-संभाग के उधमपुर, रामबन और डोडा में चार ट्रॉमा सेंटर बनाने की घोषणा की थी। महानपुर ट्रॉमा सेंटर को श्रेणी-3 स्तर में रखा गया था। इसका निर्माण कार्य वर्ष 2015-16 में पूरा हो गया था, जबकि संभाग के अन्य ट्रॉमा सेंटर को श्रेणी-2 के स्तर के बनाए गए हैं। इस ट्रॉमा सेंटर का उद्देश्य बनी, बसोहली और बिलावर के पहाड़ी इलाके में होनी वाली सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थिति से निपटना था, लेकिन दुर्भाग्य से कभी भी प्राप्त मात्रा में स्पेशलिस्ट डॉक्टर न मिलने से यह सुविधा स्थानीय लोगों को नहीं मिली।
बिलावर, बसोहली और बनी के क्षेत्र में आए दिन हादसे होते रहते हैं, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। इन्हें उपचार के लिए कठुआ जीएमसी तक ले जाने में समय लगता है और कई लोग तो समय पर उपचार न मिलने से दम तोड़ देते हैं। महानपुर ट्रॉमा सेंटर में विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा संबंधित मंत्री से लेकर आयुक्त सचिव के साथ भी उठाया गया है। उन्होंने डॉक्टरों की नियुक्ति किए जाने को लेकर आश्वासन दिया है। सरकार को इस क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए इस समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
ठाकुर दर्शन सिंह, विधायक, बसोहली