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डोडा-भद्रवाह के लैवेंडर की खुशबू पहुंची विदेश: किसानों को मिला लाखों का मुनाफा, एक दिन में 40 लाख की डील

Fri, 29 May 2026 01:28 PM IST
Nikita Gupta संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Published by: Nikita Gupta Updated Fri, 29 May 2026 01:28 PM IST
सार

डोडा और भद्रवाह के किसानों द्वारा उत्पादित लैवेंडर तेल अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने लगा है और उन्हें बेहतर दाम और नए बाजार मिले हैं।

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The fragrance of Doda-Bhaderwah's lavender reaches abroad
भद्रवाह में उगाई गई लैवेंडर की फसल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चिनाब घाटी के खूबसूरत पहाड़ों पर तैयार हो रहे लैवेंडर की महक अब विदेश तक पहुंचने लगी है। पहली बार डोडा और भद्रवाह के किसानों ने एक ही मंच पर 30 से 40 लाख तक के लैवेंडर के तेल को बाजार में बेचा।

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प्रदेश में बैंगनी क्रांति ने किसानों की तकदीर बदलनी शुरू कर दी है। इसी महीने मुंबई में बैंगनी क्रांति में पहली बार सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू की ओर से मुंबई के सीएसआईआर इनोवेशन सेंटर में खरीदारों और बिक्री करने वाले किसानों की बैठक आयोजित करवाई गई। किसानों को बाजार लिंकेज के लिए उद्योग के साथ कनेक्ट करवाया गया।
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पहली बार डोडा व भद्रवाह के किसान और स्टार्टअप अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने व अपनी अगली राह आसान बनाने में कामयाब रहे हैं। बैठक में पहुंचे हुए अरोमा उद्योग से जुड़े नामी संस्थानों ने मौके पर ही तीस से चालीस लाख का तेल एक ही दिन में खरीद लिया गया।
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जम्मू-कश्मीर के बंजर पहाड़ों की कुदरती नियामतों में यहां उग सकने वाला लैवेंडर भी रहा है। वर्ष 2016 में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रयासों से सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू ने अरोमा मिशन की शुरूआत की।

बाकायदा लैवेंडर के झाड़ उगाने की शुरुआत के बाद इसके तेल प्रसंस्करण इकाईयों को भी स्थापित करवाया गया। यहां दस साल से किसान अपने बूते ही इसकी बिक्री कर रहे थे। पहली बार केंद्र के हस्तक्षेप, सीएसआईआर-आईआई आईएम की ओर से उपलब्ध करवाए गए मंच पर प्रदेश के किसानों को अपनी मेहनत के दाम मिले। लगभग छह हजार रुपये प्रति किलो तक लैवेंडर का तेल राष्ट्रीय बाजार में बिका जो विदेश तक भी निर्यात होगा।

नामी कंपनियों ने लिया भाग
कार्यक्रम में एसएच केलकर ग्रुप, अजमल परफ्यूमर्स, बीबीके स्पेशलिस्ट, निशांत अरोमा, फाइन फ्रेगरेंसेज प्राइवेट लिमिटेड, ग्रीन एसेंस एक्सट्रैक्शन प्रा लि, सागर एरोमैटिक्स और एक्सपो एसेंशियल ऑयल्स जैसी देश की नामी अरोमा कंपनियों ने भाग लिया और खरीदारी की। देशभर में अबतक 3.5 लाख से ज्यादा किसान अरोमा मिशन से जुड़ चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में ही लगभग 1500 हेक्टेयर में लैवेंडर की खेती की जा रही है। यहां लगभग पांच से छह सौ किलो तेल सालाना निकाला जा रहा है। सीएसआईआर ने जम्मू-कश्मीर के अलावा अरोमा मिशन को उत्तराखंड, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमाचल में भी विस्तार दिया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित करना और खेती से लेकर वैश्विक अरोमा बाजार तक एक संपूर्ण वैल्यू चेन को बढ़ावा देना था। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रयासों से प्रदेश में अरोमा मिशन की शुरूआत हुई थी। अब इसके सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। सीएसआईआर–आईआईआईएम ने लैवेंडर और अन्य सुगंधित फसलों की खेती को वैज्ञानिक हस्तक्षेप, प्रशिक्षण, डिस्टिलेशन तकनीक और उद्यमिता सहयोग के माध्यम से प्रोत्साहित किया है। विशेषकर भद्रवाह जैसे क्षेत्रों में बैंगनी क्रांति के तहत लैवेंडर क्लस्टर विकसित हुए हैं। -डॉ. जबीर अहमद, निदेशक, सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू

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