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Kathua News: वेतन वृद्धि व अन्य मांगों को लेकर अस्थायी शिक्षकों ने रखा कामकाज ठप्प
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हीरानगर डिग्री कॉलेज में अपनी मांगों को लेकर विरोध जताते अस्थायी शिक्षक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हीरानगर। सरकारी डिग्री कॉलेज के अस्थायी शिक्षकों की कलम छोड़ हड़ताल के समर्थन में गिरधारी लाल डोगरा मेमोरियल डिग्री कॉलेज में भी अस्थायी शिक्षकों ने कामकाज ठप रखा। शिक्षकों ने कहा कि वह शिक्षक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं लेकिन उन्हें उचित वेतन और नौकरी की सुरक्षा से वंचित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा चुनाव से पहले वादा किया था कि नेकां की सरकार बनने पर उनकी समस्याओं को प्राथमिकता पर सुलझाया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। डॉ. शमशेर सिंह ने कहा कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की आजीविका दोनों को प्रभावित कर रहा है। इस हड़ताल का उद्देश्य वर्षों से लंबित मांगों विशेष रूप से वेतन वृद्धि की मांग पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
डॉ. इमरान उल हक ने कहा कि अस्थायी शिक्षकों की चार प्रमुख मांगें हैं, जिनमें शिक्षकों को यूजीसी के मानकों के अनुसार उचित पदनाम और पेशेवर सम्मान देना, न्यूनतम वेतन 57700 प्रति माह निर्धारित करना, शिक्षकों को पूरे सत्र की नौकरी की गारंटी और अस्थायी शिक्षकों की नौकरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाने जैसी मांगें शामिल हैं। सरकार को इन मांगों पर जल्द काम करना चाहिए।
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हीरानगर। सरकारी डिग्री कॉलेज के अस्थायी शिक्षकों की कलम छोड़ हड़ताल के समर्थन में गिरधारी लाल डोगरा मेमोरियल डिग्री कॉलेज में भी अस्थायी शिक्षकों ने कामकाज ठप रखा। शिक्षकों ने कहा कि वह शिक्षक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं लेकिन उन्हें उचित वेतन और नौकरी की सुरक्षा से वंचित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा चुनाव से पहले वादा किया था कि नेकां की सरकार बनने पर उनकी समस्याओं को प्राथमिकता पर सुलझाया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। डॉ. शमशेर सिंह ने कहा कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की आजीविका दोनों को प्रभावित कर रहा है। इस हड़ताल का उद्देश्य वर्षों से लंबित मांगों विशेष रूप से वेतन वृद्धि की मांग पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
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डॉ. इमरान उल हक ने कहा कि अस्थायी शिक्षकों की चार प्रमुख मांगें हैं, जिनमें शिक्षकों को यूजीसी के मानकों के अनुसार उचित पदनाम और पेशेवर सम्मान देना, न्यूनतम वेतन 57700 प्रति माह निर्धारित करना, शिक्षकों को पूरे सत्र की नौकरी की गारंटी और अस्थायी शिक्षकों की नौकरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाने जैसी मांगें शामिल हैं। सरकार को इन मांगों पर जल्द काम करना चाहिए।
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