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शहर के दो हिस्सों को जोड़ने वाला पुल
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कठुआ। शहर के पारलीवंड और मुख्य बाजार को जोड़ने के उद्देश्य से नगर परिषद की ओर से करवाया गया फुट ओवरब्रिज का निर्माण अब तक निरर्थक साबित हुआ है। इस पर कोई चलने को तैयार नहीं है। लगभग एक वर्ष पूर्व माई टाउन माई प्राइड योजना के तहत इस पुल का निर्माण लगभग 18 लाख से किया गया लेकिन अब हालात यह हैं कि निर्माण के कई महीने बीतने के बाद मुश्किल से दिन में चार लोग भी इस पुल से नहीं गुजरते हैं। ऐसे में शहर के लोगों को सुरक्षित आवागमन के दावे के साथ बनवाया गया फुट ओवरब्रिज सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया है। इसके अलावा पुल निर्माण के नाम पर शहर की इस महत्वपूर्ण सड़क को भी संकरा कर दिया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार अगर वे पुल का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें करीब 20 फीट चौड़ी सड़क को पार करने के लिए पहले 20 फीट ऊंची सीढ़ियों को चढ़ना होगा और इसके बाद इतना ही नीचे उतरना होगा। ऐसे में लोगों को इतनी मशक्कत करने के बजाय पुल का इस्तेमाल न करके सड़क से गुजरना अच्छा लगता है। पारलीवंड निवासी रवि कुमार के अनुसार इस तरह के पुलों का निर्माण वहां किया जाता है, जहां लोगों को सड़क पार करने के लिए भारी ट्रैफिक के बीच कई लेन को पार करना पड़ता है। यहां पहले से ही सड़क की चौड़ाई कम थी, इस पर फुट ओवरब्रिज बनाकर सड़क की चौड़ाई को भी कम कर दिया गया। वहीं जो पैसा शहर में गलियों और नालियों के विकास पर खर्च किया जाना था, वह भी बर्बाद कर दिया गया। करीब एक साल पहले हुआ निर्माण नगरवासियों के किसी काम का नहीं हैं। उन्होंने इस तरह से शहर में बर्बाद की गई सरकारी राशि के मामलों की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की है। सड़क से गुजरने वाले अन्य लोगों ने भी साफ किया है कि यह पुल किसी भी सूरत में उनके काम में नहीं आ रहा है।
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नगर परिषद ने यह बताया था पुल का महत्व
शहर के पारलीवंड स्थित वार्ड 8, 9, 10, 11 को वार्ड 5, 6 और 7 के साथ जोड़कर आम लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान करने के दावे के साथ फुट ओवरब्रिज का निर्माण नगर परिषद द्वारा करवाया गया था लेकिन पारलीवंड मुख्य बाजार से जोड़ने के इस पुल के प्रति लोगों में शुरू से ही कोई आकर्षण नहीं दिखाई दिया। इसके कारण निर्माण के बाद से पुल पर वीरानी रहती है।
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18 लाख के पुल पर सिर्फ टंग रहे बैनर पोस्टर
करीब 18 लाख की लागत से निर्मित ब्रिज लोगों के लिए सड़क पार करने के लिए तो नहीं, लेकिन सरकारी योजनाओं केे बैनर पोस्टर टांगने के काम आ रहा। हालात यह हैं कि निर्माण के बाद लगाए गए बैनर भी अब तार-तार हो गए है। जो बिज्र को बदहाल दर्शाने का काम कर रहे हैं।
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ओवरब्रिज का निर्माण बिना सोचे समझे हुआ है। इसके लिए पार्षदों के साथ चर्चा भी नहीं हुई। इसके कारण लाखों का फंड खर्च होने के बाद भी यह वीरान पड़ा है। इस पैसे का इस्तेमाल शहर की अन्य समस्याओं का समाधान करने के लिए किया जा सकता था।
-रविंद्र सिंह पठानिया, पार्षद वार्ड 20
फिलहाल इस संबंध में जानकारी नहीं है। जांच की जाएगी। इसके साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जाएगा कि इस पुल का इस्तेमाल करें।
-संतोष कोतवाल
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
कठुआ।
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स्थानीय लोगों के अनुसार अगर वे पुल का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें करीब 20 फीट चौड़ी सड़क को पार करने के लिए पहले 20 फीट ऊंची सीढ़ियों को चढ़ना होगा और इसके बाद इतना ही नीचे उतरना होगा। ऐसे में लोगों को इतनी मशक्कत करने के बजाय पुल का इस्तेमाल न करके सड़क से गुजरना अच्छा लगता है। पारलीवंड निवासी रवि कुमार के अनुसार इस तरह के पुलों का निर्माण वहां किया जाता है, जहां लोगों को सड़क पार करने के लिए भारी ट्रैफिक के बीच कई लेन को पार करना पड़ता है। यहां पहले से ही सड़क की चौड़ाई कम थी, इस पर फुट ओवरब्रिज बनाकर सड़क की चौड़ाई को भी कम कर दिया गया। वहीं जो पैसा शहर में गलियों और नालियों के विकास पर खर्च किया जाना था, वह भी बर्बाद कर दिया गया। करीब एक साल पहले हुआ निर्माण नगरवासियों के किसी काम का नहीं हैं। उन्होंने इस तरह से शहर में बर्बाद की गई सरकारी राशि के मामलों की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की है। सड़क से गुजरने वाले अन्य लोगों ने भी साफ किया है कि यह पुल किसी भी सूरत में उनके काम में नहीं आ रहा है।
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नगर परिषद ने यह बताया था पुल का महत्व
शहर के पारलीवंड स्थित वार्ड 8, 9, 10, 11 को वार्ड 5, 6 और 7 के साथ जोड़कर आम लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान करने के दावे के साथ फुट ओवरब्रिज का निर्माण नगर परिषद द्वारा करवाया गया था लेकिन पारलीवंड मुख्य बाजार से जोड़ने के इस पुल के प्रति लोगों में शुरू से ही कोई आकर्षण नहीं दिखाई दिया। इसके कारण निर्माण के बाद से पुल पर वीरानी रहती है।
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18 लाख के पुल पर सिर्फ टंग रहे बैनर पोस्टर
करीब 18 लाख की लागत से निर्मित ब्रिज लोगों के लिए सड़क पार करने के लिए तो नहीं, लेकिन सरकारी योजनाओं केे बैनर पोस्टर टांगने के काम आ रहा। हालात यह हैं कि निर्माण के बाद लगाए गए बैनर भी अब तार-तार हो गए है। जो बिज्र को बदहाल दर्शाने का काम कर रहे हैं।
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ओवरब्रिज का निर्माण बिना सोचे समझे हुआ है। इसके लिए पार्षदों के साथ चर्चा भी नहीं हुई। इसके कारण लाखों का फंड खर्च होने के बाद भी यह वीरान पड़ा है। इस पैसे का इस्तेमाल शहर की अन्य समस्याओं का समाधान करने के लिए किया जा सकता था।
-रविंद्र सिंह पठानिया, पार्षद वार्ड 20
फिलहाल इस संबंध में जानकारी नहीं है। जांच की जाएगी। इसके साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जाएगा कि इस पुल का इस्तेमाल करें।
-संतोष कोतवाल
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
कठुआ।