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कुलदेवी माता सत्योती के स्थान पर मनाथ बिरादरी के लोगों ने झुकाया शीश
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चन्नग्रां स्थित कुलदेवी माता सत्योती देवी के स्थान पर दर्शन करते मनाथ महाजन बिरादरी के सदस्य। स?
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। शहर से सटे गांव चन्नग्रां स्थित माता सत्योती मंदिर में मनाथ महाजन बिरादरी की वार्षिक मेल का आयोजन किया गया। मेल के दौरान देश के विभिन्न भागों से आए बिरादरी के सदस्यों ने कुलदेवी के स्थान पर शीश झुकाकर उनकी पूजा अर्चना कर सुख शांति की कामना की।
मंगलवार को आयोजित मेल के चलते सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगना शुरू हो गई थी। इस दौरान जहां लोगों ने कुल देवी का पूजन किया। वहीं, नव विवाहित जोड़ों ने कुलदेव मंदिर की परिक्रमा कर उनका आशीष प्राप्त किया। वहीं कुछ लोगों ने अपने कुल के रीति रिवाज के अनुसार पहली बार बेटे के बाल भी यहां कटवाए। इसके चलते दिन भर मंदिर में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिर में दर्शन करने केबाद परिसर में आयोजित भंडारे में हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर में परिवार सहित कुलदेवी के दर्शन करने पहुंचे राजेश गुप्ता ने बताया कि कुलदेवी का स्थान पर एक प्राचीन मंदिर है, जहां माता सत्योती के मोहरे हैं। श्रद्धालुओं द्वारा करवाए गए मंदिर विकास कार्यक्रम के बाद यहां माता की संगमरमर निर्मित मूर्ति स्थापित की गई है। इस मंदिर के स्थान की बिरादरी में काफी मान्यता है। यहां मंदिर परिसर में माता सत्यवती के चरणों में एक बावली भी स्थित है, जिसका पानी इतना पवित्र माना जाता है कि बिरादरी के लोग इसे अपने साथ लेकर जाते हैं और वर्ष भर उसे चरणामृत की तरह प्रयोग करते हैं। इस मंदिर में बिरादरी के लोग वार्षिक मेल से एक दिन पूर्व ही पहुंच जाते हैं और मेल के दिन होने वाले धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेने के साथ बिरादरी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अपने संबंधों को प्रगाढ़ करते हैं।
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वहीं इसी तरह बुआ की बाई मंदिर में विभिन्न बिरादरियों की मेल का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लेकर वहां होने वाले हवन-यज्ञ में हिस्सा लिया और कुलदेवी का आशीष प्राप्त किया। इसके चलते पूरा दिन मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर में माता का दर्शन करने के बाद भक्तों ने वहां आयोजित होने वाले भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के संबंध में सोनू पुजारी ने बताया कि झिड़ी में बुआ कौड़ी का यह भी स्थान है, लिहाजा यहां भी लोग बुआ कौड़ी का आशीर्वाद लेने के लिए उसी आस्था के साथ आते हैं।
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मंगलवार को आयोजित मेल के चलते सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगना शुरू हो गई थी। इस दौरान जहां लोगों ने कुल देवी का पूजन किया। वहीं, नव विवाहित जोड़ों ने कुलदेव मंदिर की परिक्रमा कर उनका आशीष प्राप्त किया। वहीं कुछ लोगों ने अपने कुल के रीति रिवाज के अनुसार पहली बार बेटे के बाल भी यहां कटवाए। इसके चलते दिन भर मंदिर में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिर में दर्शन करने केबाद परिसर में आयोजित भंडारे में हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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मंदिर में परिवार सहित कुलदेवी के दर्शन करने पहुंचे राजेश गुप्ता ने बताया कि कुलदेवी का स्थान पर एक प्राचीन मंदिर है, जहां माता सत्योती के मोहरे हैं। श्रद्धालुओं द्वारा करवाए गए मंदिर विकास कार्यक्रम के बाद यहां माता की संगमरमर निर्मित मूर्ति स्थापित की गई है। इस मंदिर के स्थान की बिरादरी में काफी मान्यता है। यहां मंदिर परिसर में माता सत्यवती के चरणों में एक बावली भी स्थित है, जिसका पानी इतना पवित्र माना जाता है कि बिरादरी के लोग इसे अपने साथ लेकर जाते हैं और वर्ष भर उसे चरणामृत की तरह प्रयोग करते हैं। इस मंदिर में बिरादरी के लोग वार्षिक मेल से एक दिन पूर्व ही पहुंच जाते हैं और मेल के दिन होने वाले धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेने के साथ बिरादरी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अपने संबंधों को प्रगाढ़ करते हैं।
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वहीं इसी तरह बुआ की बाई मंदिर में विभिन्न बिरादरियों की मेल का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लेकर वहां होने वाले हवन-यज्ञ में हिस्सा लिया और कुलदेवी का आशीष प्राप्त किया। इसके चलते पूरा दिन मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर में माता का दर्शन करने के बाद भक्तों ने वहां आयोजित होने वाले भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के संबंध में सोनू पुजारी ने बताया कि झिड़ी में बुआ कौड़ी का यह भी स्थान है, लिहाजा यहां भी लोग बुआ कौड़ी का आशीर्वाद लेने के लिए उसी आस्था के साथ आते हैं।