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Kathua News: प्रोफेसरों की कमी से जूझ रहा कठुआ मेडिकल कॉलेज
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राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ
एमबीबीएस में छह बैच का हो चुका है दाखिला, प्रभारी बनकर सेवाएं देने को मजबूर हैं एसोसिएट प्रोफेसर
- न्यूनतम आवश्यक मानकों की हो रही है अनदेखी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। कोरोना महामारी के कारण हुई देरी के बावजूद राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ में अभी तक छह बैच दाखिला ले चुके हैं। वहीं, पहले बैच का प्रशिक्षण भी पूरा होने को है, लेकिन कई विभागों में अभी तक प्रोफेसर की नियुक्ति ही नहीं की गई है। जिसका खामियाजा एमबीबीएस प्रशिक्षु को भविष्य में उठाना होगा जो बिना प्रोफेसर के मार्गदर्शन से ही डॉक्टर बनेंगे।
वर्तमान हालात यह है कि 13 विभाग ऐसे हैं, जिनको कॉलेज की स्थापना के बाद भी प्रोफेसर नहीं मिल पाएं हैं। कुल 23 पदों में सिर्फ 10 पदों पर ही प्रोफेसर की नियुक्ति की गई है। रिक्त पड़े पदों पर प्रभारी बनाकर एसोसिएट प्रोफेसर की सेवाएं ली जा रही हैं। इससे एसोसिएट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना लाजमी है। सूत्रों की मानें तो शुरू से ही प्रोफेसर और एसोसिएट पदों पर सीनियर फैकल्टी ने कम ही रुचि दिखाई है। वर्तमान में ज्यादातर एसोसिएट फैकल्टी सहायक प्रोफेसर की पदोन्नति के बाद भरी गई है। वहीं, एसोसिएट प्रोफेसर के 32 पदों में नौ पद जबकि सहायक प्रोफेसर के 49 में से 13 पद रिक्त पड़े हुए हैं।
बिना प्रोफेसर के चल रहे 13 विभाग
मेडिकल कॉलेज कठुआ के 13 ऐसे विभाग हैं जो बिना प्रोफेसर के चल रहे हैं। इसमें एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन, टीबी, श्वसन रोग, त्वचा विज्ञान- वेनेरोलॉजी और कुष्ठ रोग, मनोचिकित्सा, स्त्री रोग, रेडियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और ब्लड बैंक मुख्य है। जबकि पैथोलॉजी के प्रोफेसर को कॉलेज प्रधानाचार्य का अतिरिक्त जिम्मा दिया गया है।
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न्यूनतम आवश्यक मानक
नेशनल मेडिकल कौंसिल (एनएमसी) के न्यूनतम आवश्यक मानकों के अनुसार 23 निर्धारित प्रोफेसर पदों के मुकाबले 17 पद भरे होने चाहिए। जबकि एसोसिएट के 32 पदों में से 27 पदों पर नियुक्ति होनी चाहिए। वहीं सहायक प्रोफेसर के 49 पदों में से 41 पदों भरे जाने चाहिए थे। लेकिन दुर्भाग्य से मेडिकल कॉलेज कठुआ में प्रोफेसर, एसोसिएट और सहायक प्रोफेसर के क्रमश: 10, 23 और 36 पद ही भरे गए हैं। जो नेशनल मेडिकल कौंसिल के न्यूनतम मानदंडों को भी पूरे नहीं करते हैं। ऐसे में लाजिमी है कि वर्तमान में एमबीबीएस और भविष्य में पीजी प्रशिक्षु सबसे प्रभावित हो रहे हैं।
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डेमोस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट के सहारे चल रहा कॉलेज
स्थापना के बाद से मेडिकल शिक्षा डेमोस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट के सहारे चलाई जा रही है। सिर्फ इन्हीं दो पदों पर पर्याप्त नियुक्ति की गई हैं। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक डेमोस्ट्रेटर के 27 में से 26 पद भरे हुए है। जबकि सीनियर रेजिडेंट के 51 में से 37 पदों पर नियुक्ति की गई है। जोकि नेशनल मेडिकल कौंसिल के न्यूनतम आवश्यक मानक को लगभग पूरा करते हैं। वहीं, 53 जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों को नियुक्त किया गया है। लेकिन जूनियर रेजीडेंट कौंसिल के न्यूनतम आवश्यक मानकों के अंतर्गत नहीं आते हैं।
कोट..
जीएमसी कठुआ में व्यवस्था के तहत एमबीबीएस कक्षाएं चलाई जा रही हैं। उपलब्ध स्टाफ के साथ बैच को पढ़ाया जा रहा है। विज्ञापन के साथ रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे जाते हैं। उम्मीद है कि जल्द सभी खाली पद भरे जाएंगे।
- डॉ. सुरेंद्र अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ
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- न्यूनतम आवश्यक मानकों की हो रही है अनदेखी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। कोरोना महामारी के कारण हुई देरी के बावजूद राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ में अभी तक छह बैच दाखिला ले चुके हैं। वहीं, पहले बैच का प्रशिक्षण भी पूरा होने को है, लेकिन कई विभागों में अभी तक प्रोफेसर की नियुक्ति ही नहीं की गई है। जिसका खामियाजा एमबीबीएस प्रशिक्षु को भविष्य में उठाना होगा जो बिना प्रोफेसर के मार्गदर्शन से ही डॉक्टर बनेंगे।
वर्तमान हालात यह है कि 13 विभाग ऐसे हैं, जिनको कॉलेज की स्थापना के बाद भी प्रोफेसर नहीं मिल पाएं हैं। कुल 23 पदों में सिर्फ 10 पदों पर ही प्रोफेसर की नियुक्ति की गई है। रिक्त पड़े पदों पर प्रभारी बनाकर एसोसिएट प्रोफेसर की सेवाएं ली जा रही हैं। इससे एसोसिएट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना लाजमी है। सूत्रों की मानें तो शुरू से ही प्रोफेसर और एसोसिएट पदों पर सीनियर फैकल्टी ने कम ही रुचि दिखाई है। वर्तमान में ज्यादातर एसोसिएट फैकल्टी सहायक प्रोफेसर की पदोन्नति के बाद भरी गई है। वहीं, एसोसिएट प्रोफेसर के 32 पदों में नौ पद जबकि सहायक प्रोफेसर के 49 में से 13 पद रिक्त पड़े हुए हैं।
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बिना प्रोफेसर के चल रहे 13 विभाग
मेडिकल कॉलेज कठुआ के 13 ऐसे विभाग हैं जो बिना प्रोफेसर के चल रहे हैं। इसमें एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन, टीबी, श्वसन रोग, त्वचा विज्ञान- वेनेरोलॉजी और कुष्ठ रोग, मनोचिकित्सा, स्त्री रोग, रेडियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और ब्लड बैंक मुख्य है। जबकि पैथोलॉजी के प्रोफेसर को कॉलेज प्रधानाचार्य का अतिरिक्त जिम्मा दिया गया है।
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न्यूनतम आवश्यक मानक
नेशनल मेडिकल कौंसिल (एनएमसी) के न्यूनतम आवश्यक मानकों के अनुसार 23 निर्धारित प्रोफेसर पदों के मुकाबले 17 पद भरे होने चाहिए। जबकि एसोसिएट के 32 पदों में से 27 पदों पर नियुक्ति होनी चाहिए। वहीं सहायक प्रोफेसर के 49 पदों में से 41 पदों भरे जाने चाहिए थे। लेकिन दुर्भाग्य से मेडिकल कॉलेज कठुआ में प्रोफेसर, एसोसिएट और सहायक प्रोफेसर के क्रमश: 10, 23 और 36 पद ही भरे गए हैं। जो नेशनल मेडिकल कौंसिल के न्यूनतम मानदंडों को भी पूरे नहीं करते हैं। ऐसे में लाजिमी है कि वर्तमान में एमबीबीएस और भविष्य में पीजी प्रशिक्षु सबसे प्रभावित हो रहे हैं।
डेमोस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट के सहारे चल रहा कॉलेज
स्थापना के बाद से मेडिकल शिक्षा डेमोस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट के सहारे चलाई जा रही है। सिर्फ इन्हीं दो पदों पर पर्याप्त नियुक्ति की गई हैं। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक डेमोस्ट्रेटर के 27 में से 26 पद भरे हुए है। जबकि सीनियर रेजिडेंट के 51 में से 37 पदों पर नियुक्ति की गई है। जोकि नेशनल मेडिकल कौंसिल के न्यूनतम आवश्यक मानक को लगभग पूरा करते हैं। वहीं, 53 जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों को नियुक्त किया गया है। लेकिन जूनियर रेजीडेंट कौंसिल के न्यूनतम आवश्यक मानकों के अंतर्गत नहीं आते हैं।
कोट..
जीएमसी कठुआ में व्यवस्था के तहत एमबीबीएस कक्षाएं चलाई जा रही हैं। उपलब्ध स्टाफ के साथ बैच को पढ़ाया जा रहा है। विज्ञापन के साथ रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे जाते हैं। उम्मीद है कि जल्द सभी खाली पद भरे जाएंगे।
- डॉ. सुरेंद्र अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ