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Kathua News: 65 लाख की लागत से सॉलिड वेस्ट परियोजना तैयार
Mon, 09 Oct 2023 06:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 09 Oct 2023 06:30 AM IST
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अगले माह से शहर से रोजाना निकलने वाले लगभग 40 टन कचरे का होगा उचित निस्तारण
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। 19 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद कठुआ शहर की सवा लाख के लगभग आबादी के लिए कचरा प्रबंधन योजना सिरे चढ़ने जा रही है। इससे जल्द ही शहर से रोजाना निकलने वाले लगभग 40 टन कचरे का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से हो पाएगा। इससे जीवनदायिनी ऐरावती (रावी) नदी को भी शहर के कचरे से मुक्ति मिलेगी। बेड़ियां पत्तन इलाके में विश्व हिंदू परिषद की गौशाला के नजदीक कचरा प्रबंधन की इस योजना के तहत काम 65 लाख की लागत से पूरा कर लिया गया है।
नगर परिषद कठुआ ने वर्तमान में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन साइट पर बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही शहर में डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों की मानें तो सब कुछ ठीक रहा तो नवंबर माह से शहर से निकलने वाले कचरे के उचित निस्तारण का प्रबंध कर दिया जाएगा। दरअसल, वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत कठुआ के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना मंजूर किया था। इसके लिए बाकायदा लगभग डेढ़ करोड़ की राशि भी मंजूर की गई लेकिन जमीन की निशानदेही और मंजूरी हासिल करने में ही डेढ़ दशक से अधिक का समय बीत गया। सॉलिड वेस्ट परियोजना के सिरे चढ़ने से शहर के माहौल के साथ-साथ पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा। उधर, पिछले कई दशकों से मग्गर खड्ड और रावी दरिया किनारे फेंके गए कचरे को एश कंपोस्ट बनाने का काम भी अंजाम दिया जा रहा है। नगर परिषद की योजना इसके बाद एनजीटी के निर्देश को ध्यान में रखते हुए इस इलाके में वन विभाग के सहयोग से दरिया किनारे पौधरोपण कर इसे फिर से खूबसूरत बनाने की है।
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खुले में सरेआम जलाया जा रहा कचरा
प्रतिदिन कठुआ शहर से लगभग 40 टन कचरा एकत्रित किया जाता है, जो रावी से सटी मग्गर खड्ड के किनारे खुले में फेंक दिया जाता है। यही नहीं जम्मू-पठानकोट हाईवे से सटे सहार खड्ड पुल के किनारे और हाउसिंग कालोनी से सटी खड्ड में भी कचरे के ढेर लगा दिए गए हैं। कचरा प्रबंधन योजना के अभाव में यह कचरा व्यापक स्तर पर शहर के माहौल में प्रदूषण का एक बड़ा कारण भी है। कठुआ शहर से निकलने वाले कचरे के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल 15 हजार टन से भी अधिक कचरा खुले में फेंका जा रहा है। हालात यह हैं कि अब भी कचरे को खुलेआम आग लगाकर जलाया जा रहा है। रावी नदी में ठोस कचरा फेंकने पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति ने नगर परिषद पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) नियम, 2016 की अनदेखी के लिए दो साल पहले 82.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया हैा।
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कचरा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट परियोजना का काम 65 लाख की लागत से पूरा कर लिया गया है। डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए भी निविदा आमंत्रित की गई है। कोशिश है कि इसी एजेंसी को सॉलिड वेस्ट प्रबंधन का काम भी दिया जाए। इसके अलावा पुराने कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया में एश कंपोस्ट तैयार किया जा रहा है। परियोजना के शुरू होने से शहर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव हो सकेेगा।
जोधराज
सीईओ, नगर परिषद कठुआ
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। 19 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद कठुआ शहर की सवा लाख के लगभग आबादी के लिए कचरा प्रबंधन योजना सिरे चढ़ने जा रही है। इससे जल्द ही शहर से रोजाना निकलने वाले लगभग 40 टन कचरे का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से हो पाएगा। इससे जीवनदायिनी ऐरावती (रावी) नदी को भी शहर के कचरे से मुक्ति मिलेगी। बेड़ियां पत्तन इलाके में विश्व हिंदू परिषद की गौशाला के नजदीक कचरा प्रबंधन की इस योजना के तहत काम 65 लाख की लागत से पूरा कर लिया गया है।
नगर परिषद कठुआ ने वर्तमान में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन साइट पर बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही शहर में डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों की मानें तो सब कुछ ठीक रहा तो नवंबर माह से शहर से निकलने वाले कचरे के उचित निस्तारण का प्रबंध कर दिया जाएगा। दरअसल, वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत कठुआ के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना मंजूर किया था। इसके लिए बाकायदा लगभग डेढ़ करोड़ की राशि भी मंजूर की गई लेकिन जमीन की निशानदेही और मंजूरी हासिल करने में ही डेढ़ दशक से अधिक का समय बीत गया। सॉलिड वेस्ट परियोजना के सिरे चढ़ने से शहर के माहौल के साथ-साथ पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा। उधर, पिछले कई दशकों से मग्गर खड्ड और रावी दरिया किनारे फेंके गए कचरे को एश कंपोस्ट बनाने का काम भी अंजाम दिया जा रहा है। नगर परिषद की योजना इसके बाद एनजीटी के निर्देश को ध्यान में रखते हुए इस इलाके में वन विभाग के सहयोग से दरिया किनारे पौधरोपण कर इसे फिर से खूबसूरत बनाने की है।
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खुले में सरेआम जलाया जा रहा कचरा
प्रतिदिन कठुआ शहर से लगभग 40 टन कचरा एकत्रित किया जाता है, जो रावी से सटी मग्गर खड्ड के किनारे खुले में फेंक दिया जाता है। यही नहीं जम्मू-पठानकोट हाईवे से सटे सहार खड्ड पुल के किनारे और हाउसिंग कालोनी से सटी खड्ड में भी कचरे के ढेर लगा दिए गए हैं। कचरा प्रबंधन योजना के अभाव में यह कचरा व्यापक स्तर पर शहर के माहौल में प्रदूषण का एक बड़ा कारण भी है। कठुआ शहर से निकलने वाले कचरे के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल 15 हजार टन से भी अधिक कचरा खुले में फेंका जा रहा है। हालात यह हैं कि अब भी कचरे को खुलेआम आग लगाकर जलाया जा रहा है। रावी नदी में ठोस कचरा फेंकने पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति ने नगर परिषद पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) नियम, 2016 की अनदेखी के लिए दो साल पहले 82.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया हैा।
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कचरा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट परियोजना का काम 65 लाख की लागत से पूरा कर लिया गया है। डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए भी निविदा आमंत्रित की गई है। कोशिश है कि इसी एजेंसी को सॉलिड वेस्ट प्रबंधन का काम भी दिया जाए। इसके अलावा पुराने कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया में एश कंपोस्ट तैयार किया जा रहा है। परियोजना के शुरू होने से शहर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव हो सकेेगा।
जोधराज
सीईओ, नगर परिषद कठुआ