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Kathua News: जिले के छह शिक्षा जोन ने लिया डाइट में प्रशिक्षण
Thu, 16 Oct 2025 01:58 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 16 Oct 2025 01:58 AM IST
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डाइट बसोहली की ओर से आयोजित कार्यशाला में भाग लेते शिक्षक। संवाद
कठुआ। स्थानीय भाषा में डिजिटल शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल बॉयज कठुआ में आयोजित तीन दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का समापन हो गया।
डाइट बसोहली की ओर से आयोजित प्रशिक्षण में जिले के छह शिक्षा जोन कठुआ, लखनपुर, बरनोटी, सल्लन, मढ़ीन और हीरानगर से आए 50 अध्यापकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ 13 अक्तूबर को डाइट बसोहली के प्रधानाचार्य भूषण कुमार पाठक के मार्गदर्शन में हुआ। कोऑर्डिनेटर राकेश कुमार दुबे ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को स्थानीय भाषा में प्रभावी ई-कॉन्टेंट निर्माण की तकनीक और दृष्टिकोण से परिचित कराना था, ताकि शिक्षण अधिक आकर्षक, बाल-केंद्रित और समावेशी बन सके।
प्रशिक्षण के दौरान हरदेव कुमार, विनय शर्मा, अमोल शर्मा, कुसुम लता, रवि कुंडल, पंकज शर्मा, मोनिका खोसला और सुरिंदर मंडयाल जैसे रिसोर्स पर्सन ने शिक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, समूह गतिविधियों और तकनीकी अभ्यासों के माध्यम से यह सिखाया कि स्थानीय संस्कृति, भाषा और जीवन से जुड़े तत्वों को डिजिटल कंटेंट में कैसे प्रभावशाली ढंग से शामिल किया जा सकता है।
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समापन समारोह में को-कोऑर्डिनेटर दलजीत सिंह पठानिया ने कहा कि यह विज्ञान और तकनीक का युग है। शिक्षण अब डिजिटल दिशा में अग्रसर है, और ई-कॉन्टेंट निर्माण केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की भावनात्मक और बौद्धिक आवश्यकताओं को समझने की कला है।
प्रशिक्षण में शिक्षकों को आईसीटी टूल्स, मोबाइल एप्लिकेशंस और वेबसाइट्स के माध्यम से स्थानीय भाषा में डिजिटल शैक्षणिक सामग्री तैयार करने की विधियां सिखाई गईं। डाइट बसोहली के प्रधानाचार्य ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से अध्यापकों में बहुआयामी कौशलों का विकास होता है।
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डाइट बसोहली की ओर से आयोजित प्रशिक्षण में जिले के छह शिक्षा जोन कठुआ, लखनपुर, बरनोटी, सल्लन, मढ़ीन और हीरानगर से आए 50 अध्यापकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ 13 अक्तूबर को डाइट बसोहली के प्रधानाचार्य भूषण कुमार पाठक के मार्गदर्शन में हुआ। कोऑर्डिनेटर राकेश कुमार दुबे ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को स्थानीय भाषा में प्रभावी ई-कॉन्टेंट निर्माण की तकनीक और दृष्टिकोण से परिचित कराना था, ताकि शिक्षण अधिक आकर्षक, बाल-केंद्रित और समावेशी बन सके।
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प्रशिक्षण के दौरान हरदेव कुमार, विनय शर्मा, अमोल शर्मा, कुसुम लता, रवि कुंडल, पंकज शर्मा, मोनिका खोसला और सुरिंदर मंडयाल जैसे रिसोर्स पर्सन ने शिक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, समूह गतिविधियों और तकनीकी अभ्यासों के माध्यम से यह सिखाया कि स्थानीय संस्कृति, भाषा और जीवन से जुड़े तत्वों को डिजिटल कंटेंट में कैसे प्रभावशाली ढंग से शामिल किया जा सकता है।
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समापन समारोह में को-कोऑर्डिनेटर दलजीत सिंह पठानिया ने कहा कि यह विज्ञान और तकनीक का युग है। शिक्षण अब डिजिटल दिशा में अग्रसर है, और ई-कॉन्टेंट निर्माण केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की भावनात्मक और बौद्धिक आवश्यकताओं को समझने की कला है।
प्रशिक्षण में शिक्षकों को आईसीटी टूल्स, मोबाइल एप्लिकेशंस और वेबसाइट्स के माध्यम से स्थानीय भाषा में डिजिटल शैक्षणिक सामग्री तैयार करने की विधियां सिखाई गईं। डाइट बसोहली के प्रधानाचार्य ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से अध्यापकों में बहुआयामी कौशलों का विकास होता है।