Kathua: पीएम मोदी और शाह पर अभद्र ऑडियो मामले में कठुआ नगर परिषद अध्यक्ष का इस्तीफा
ऑडियो वायरल होने के चौबीस घंटे के भीतर भाजपा नेता नरेश शर्मा ने नगर परिषद कठुआ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। नरेश शर्मा ने ऑडियो को साजिश बताया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने संबंधी ऑडियो वायरल होने के चौबीस घंटे के भीतर भाजपा नेता नरेश शर्मा ने नगर परिषद कठुआ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। नरेश शर्मा ने ऑडियो को साजिश बताया है, लेकिन भाजपा ने उन्हें वीरवार नोटिस जारी कर चौबीस घंटे में जवाब मांगा था। नरेश शर्मा ने शुक्रवार शाम पांच बजे परिषद की उपाध्यक्ष रेखा कुमारी को इस्तीफा सौंप दिया। रेखा कुमारी ने कहा कि नरेश शर्मा ने इस्तीफा दिया है। वे शनिवार को इस्तीफा नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपेंगी।
वायरल ऑडियो से फिर चर्चा में आए नरेश शर्मा के इस मामले पर शुक्रवार दिन भर भाजपा के जिला मुख्यालय में बैठक का दौर चलता रहा। बैठक में भाजपा के प्रदेश महामंत्री देविंदर मन्याल, पूर्व मंत्री राजीव जसरोटिया, संगठन मंत्री विशाल परिहार, जिला अध्यक्ष गोपाल महाजन शामिल रहे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि भाजपा के पार्षदों को एक-एक कर बैठक में बुलाकर वायरल ऑडियो को लेकर सवाल पूछे गए। इस दौरान नगर परिषद अध्यक्ष नरेश शर्मा को भी बुलाया गया। मैराथन बैठक के बाद शाम पांच बजे नरेश शर्मा ने इस्तीफा देकर सोशल मीडिया हैंडल पर नैतिक आधार पर इस्तीफे की सूचना सार्वजनिक कर दी। उपाध्यक्ष रेखा कुमारी ने कहा कि जब अध्यक्ष नरेश शर्मा ने इस्तीफा दिया तो सरकारी कार्यालय का समय खत्म हो चुका था। वे शनिवार को मुख्य कार्यकारी अधिकारी को इस्तीफा सौंप देंगी।
विवादों के बीच चार साल से अध्यक्ष हैं नरेश शर्मा
कठुआ नगर परिषद अध्यक्ष नरेश शर्मा का बतौर अध्यक्ष यह चार साल का कार्यकाल शुरूआत से ही विवादों में रहा। कांग्रेस के टिकट पर नगर परिषद के पार्षद का चुनाव जीतकर भाजपा में शामिल हो गए। एंटी डिफेक्शन कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द हुई, जिस पर ट्रिब्यूनल कोर्ट ने स्टे लगा दिया। इस पर अंतिम फैसला आज तक लंबित है। वहीं वर्ष 2020 के जुलाई माह में भाजपा के ही पार्षदों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया।
यह प्रस्ताव कोर्ट में जाने के बाद सिरे नहीं चढ़ पाया। पार्षदों के उसी धड़े ने एक बार फिर जुलाई 2021 में अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। जिसमें नरेश शर्मा को बैठक के लिए कोरम पूरा न होने पर राहत मिल गई। भाजपा में शामिल होने से पहले नरेश शर्मा कांग्रेस के प्रभावशाली नेता रहे हैं और पूर्व में भी अध्यक्ष का पद संभाल चुके हैं। ऐसे में भाजपा की ओर से उन्हें पार्टी में शामिल करवाने के साथ ही अध्यक्ष के पद पर बैठा दिया गया। नगर परिषद कठुआ में निर्दलीय पार्षदों के जीतने के बाद अल्पमत में आई भाजपा ने नरेश शर्मा के साथ कांग्रेस के कुछ और पार्षदों को साथ लेकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर दावेदारी ठोकी थी। ऐसे में पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और पार्षदों में अंतर्कलह का माहौल बना रहा।