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Kathua News: राधा-कृष्ण की झांकी का दर्शन कर भाव विभोर हुए श्रद्धालु
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शहर के वार्ड 8 में श्रीमद्भागवत कथा में भजनों पर झूमतीं श्रद्धालु महिलाएं। संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। शहर के वार्ड 8 में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन जारी है। शुक्रवार को कथा के चौथे दिन पंडाल में भगवान श्री कृष्ण और राधा की भव्य झांकी प्रस्तुत की गई। जिसे देख कथा स्थल पर मौजूद भक्त भावविभोर हो गए। वहीं, इस मौके पर कथाव्यास महेश दास शास्त्री ने भगवान की बाल लीलाओं का संगीतमय वर्णन कर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति में झूमने के लिए विवश कर दिया।
अपने प्रवचन में कथाव्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों की हर इच्छा को पूर्ण करने वाले हैं। भक्त जैसा भी चाहता है भगवान वैसे ही बन के उसके हर कार्य को पूर्ण करते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने भक्तों को सत्य की राह पर चलने के लिए गोवर्धन लीला करके असत्य का पूजा बंद करके सत्य की पूजा करवाया।
शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के गोकुल छोड़कर मथुरा जाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान ने गोकुल से प्रस्थान किया, तो गोपियों ने उनका मार्ग रोक लिया। लेकिन जैसे ही भगवान के स्वयं मथुरा जाने के निर्णय के बारे में गोपियों को पता चला, तो उन्होंने भगवान के मार्ग को छोड़ दिया, जो कि भगवान के प्रति उनके सच्चे प्रेम का प्रमाण है। क्योंकि प्रियतम के सुख को ही अपना सुख मानना सच्चा प्रेम है। मथुरा में भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध किया और धर्म की रक्षा की। जिससे सारी प्रजा कंस के आतंक से मुक्त हो गई। भगवान ने इसके बाद अपने नाना उग्रसेन, माता देवकी और पिता वासुदेव को बंधन मुक्त किया। इसके साथ ही मथुरा में निवास करने लगे, जिससे पूरी प्रजा का कल्याण हो सका। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग का नमूना है। जो हमारे इस लोक के जीवन के साथ-साथ परलोक को भी मंगल बनाने वाला है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से जीव धन्य हो जाता है। लेकिन हमें परमात्मा की प्राप्ति के लिए काम क्रोध और लोभ को त्याग कर निश्चल भाव से प्रभु के चरणों में अपना स्थान बनाना होगा।
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अपने प्रवचन में कथाव्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों की हर इच्छा को पूर्ण करने वाले हैं। भक्त जैसा भी चाहता है भगवान वैसे ही बन के उसके हर कार्य को पूर्ण करते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने भक्तों को सत्य की राह पर चलने के लिए गोवर्धन लीला करके असत्य का पूजा बंद करके सत्य की पूजा करवाया।
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शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के गोकुल छोड़कर मथुरा जाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान ने गोकुल से प्रस्थान किया, तो गोपियों ने उनका मार्ग रोक लिया। लेकिन जैसे ही भगवान के स्वयं मथुरा जाने के निर्णय के बारे में गोपियों को पता चला, तो उन्होंने भगवान के मार्ग को छोड़ दिया, जो कि भगवान के प्रति उनके सच्चे प्रेम का प्रमाण है। क्योंकि प्रियतम के सुख को ही अपना सुख मानना सच्चा प्रेम है। मथुरा में भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध किया और धर्म की रक्षा की। जिससे सारी प्रजा कंस के आतंक से मुक्त हो गई। भगवान ने इसके बाद अपने नाना उग्रसेन, माता देवकी और पिता वासुदेव को बंधन मुक्त किया। इसके साथ ही मथुरा में निवास करने लगे, जिससे पूरी प्रजा का कल्याण हो सका। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग का नमूना है। जो हमारे इस लोक के जीवन के साथ-साथ परलोक को भी मंगल बनाने वाला है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से जीव धन्य हो जाता है। लेकिन हमें परमात्मा की प्राप्ति के लिए काम क्रोध और लोभ को त्याग कर निश्चल भाव से प्रभु के चरणों में अपना स्थान बनाना होगा।
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