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Kathua News: नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की
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कठुआ। शहर के वार्ड 8 में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन जारी है। वीरवार को कथा के चौथे दिन पंडाल में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व मनाया गया। इसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लेकर भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन का आनंद प्राप्त किया। कथा व्यास महेश दास शास्त्री ने श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध में प्रवेश करने के साथ जैसे ही भगवान कृष्ण के जन्म की घोषणा की, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु उत्साहित होकर बाल गोपाल का जयघोष करने लगे। इससे पूरे पंडाल में हर्ष का वातावरण उत्पन्न हो गया।
कथा स्थल पर जैसे ही कंस के कारागार से लेकर नंद बाबा के दरबार तक वासुदेव के आने की झांकी प्रस्तुत की गई, तो उपस्थित भक्त भगवान के बाल रूप की भव्य झांकी को देखकर अपनी सुध बुध खो बैठे। इस मौके पर कथा व्यास ने भगवान के आगमन की बधाई देते हुए जब भजनों को प्रस्तुत करना शुरू किया तो वहां उपस्थित भक्त खुशी से झूमने लगे। वहीं, बीच-बीच में कथा व्यास द्वारा भगवान के जन्म पर लुटाई जा रही मिठाइयों के महाप्रसाद को पाने के लिए श्रद्धालु लालायित दिखे। अपने प्रवचन में कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य भक्ति रूपी आंख से ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। सभी प्राणियों पर परमात्मा का वास रहता है। प्राणियों में निष्ठा और विश्वास है तो वह अपने सत्कर्म के बल पर उन्हें प्रत्येक स्थान पर प्राप्त कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान की परमधाम को प्राप्त करने के लिए उनमें अटूट विश्वास के साथ-साथ प्रेम को अपने जीवन में उतारने के लिए कहा।
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कथा स्थल पर जैसे ही कंस के कारागार से लेकर नंद बाबा के दरबार तक वासुदेव के आने की झांकी प्रस्तुत की गई, तो उपस्थित भक्त भगवान के बाल रूप की भव्य झांकी को देखकर अपनी सुध बुध खो बैठे। इस मौके पर कथा व्यास ने भगवान के आगमन की बधाई देते हुए जब भजनों को प्रस्तुत करना शुरू किया तो वहां उपस्थित भक्त खुशी से झूमने लगे। वहीं, बीच-बीच में कथा व्यास द्वारा भगवान के जन्म पर लुटाई जा रही मिठाइयों के महाप्रसाद को पाने के लिए श्रद्धालु लालायित दिखे। अपने प्रवचन में कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य भक्ति रूपी आंख से ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। सभी प्राणियों पर परमात्मा का वास रहता है। प्राणियों में निष्ठा और विश्वास है तो वह अपने सत्कर्म के बल पर उन्हें प्रत्येक स्थान पर प्राप्त कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान की परमधाम को प्राप्त करने के लिए उनमें अटूट विश्वास के साथ-साथ प्रेम को अपने जीवन में उतारने के लिए कहा।
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