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तर्क वितर्क छोड़कर श्रेष्ठ कामों में मन लगाइए
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बसोहली। बसोहली के रामलीला मैदान में शिव महापुराण कथा मंगलवार से शुरू हो गई है। यह कथा 16 नवंबर तक चलेगी। इसमें संत सुभाष शास्त्री महाराज कथा और प्रवचन के माध्यम से संगत को निहाल करेंगे।
इस दौरान संगत में सुभाष शास्त्री ने कहा कि आप कर्म शब्द की व्याख्या किस्मत से करते हो। वास्तव में कर्म का अर्थ है कर्मशील रहना। मानव को परिश्रम करना ही पड़ता है। संसार को गतिमान रखते हुए प्रभु ने सूर्य, चंद्र, नदियां और वायु आदि का क्रम रखा हुआ है। हर कोई अपनी-अपनी गति से चलायमान है और संसार आदिकाल से चला जा रहा है। इसमें किसी ने भी अपने कर्म को तोड़ने का प्रयास नहीं किया, इसीलिए संसार की हर गतिविधियां चल रही हैं।
सुभाष शास्त्री ने संगत से कहा कि प्रभु सदैव हमारे साथ रहते हैं। उनकी कृपा सदैव हम पर रहती है, लेकिन जीवन में कुछ भी बिना परिश्रम के नहीं मिलता। अत: व्यर्थ के तर्क वितर्क छोड़कर श्रेष्ठ कामों में मन लगाइए। श्रेष्ठ कर्म करने वाले उधमशील और कर्मशील बनें। एक बात अच्छी तरह से जान लें कि किस्मत कर्मों का फल होता है, लेकिन किस्मत का बहाना बनाकर आप कर्मों का अर्थात परिश्रम के बिना कुछ कमा नहीं सकते। भगवान का संदेश है कि यदि खेत में हल मुसल भी चलाना होता है तो उसके लिए भी मेहनत करनी पड़ती है। श्रेष्ठ कर्म और मेहनत करते हुए आगे बढ़ें। सफलता जरूर साथ देगी।
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इस दौरान संगत में सुभाष शास्त्री ने कहा कि आप कर्म शब्द की व्याख्या किस्मत से करते हो। वास्तव में कर्म का अर्थ है कर्मशील रहना। मानव को परिश्रम करना ही पड़ता है। संसार को गतिमान रखते हुए प्रभु ने सूर्य, चंद्र, नदियां और वायु आदि का क्रम रखा हुआ है। हर कोई अपनी-अपनी गति से चलायमान है और संसार आदिकाल से चला जा रहा है। इसमें किसी ने भी अपने कर्म को तोड़ने का प्रयास नहीं किया, इसीलिए संसार की हर गतिविधियां चल रही हैं।
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सुभाष शास्त्री ने संगत से कहा कि प्रभु सदैव हमारे साथ रहते हैं। उनकी कृपा सदैव हम पर रहती है, लेकिन जीवन में कुछ भी बिना परिश्रम के नहीं मिलता। अत: व्यर्थ के तर्क वितर्क छोड़कर श्रेष्ठ कामों में मन लगाइए। श्रेष्ठ कर्म करने वाले उधमशील और कर्मशील बनें। एक बात अच्छी तरह से जान लें कि किस्मत कर्मों का फल होता है, लेकिन किस्मत का बहाना बनाकर आप कर्मों का अर्थात परिश्रम के बिना कुछ कमा नहीं सकते। भगवान का संदेश है कि यदि खेत में हल मुसल भी चलाना होता है तो उसके लिए भी मेहनत करनी पड़ती है। श्रेष्ठ कर्म और मेहनत करते हुए आगे बढ़ें। सफलता जरूर साथ देगी।
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