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Kathua News: बनी क्षेत्र में पहली बार चैंडलर अखरोट की खेती
Wed, 06 May 2026 02:46 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 06 May 2026 02:46 AM IST
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तीन कनाल जमीन पर प्रायोगिक तौर पर विकसित किया गया बाग
संवाद न्यूज एजेंसी
बनी। हॉर्टिकल्चर विभाग ने पहली बार हाई डेंसिटी प्लांटेशन स्कीम के तहत चैंडलर अखरोट के पौधे लगाए हैं। करीब तीन कनाल भूमि में आधुनिक तकनीक से अखरोट का बाग विकसित किया गया है। इससे किसानों में उत्साह है।
चैंडलर अखरोट की यह किस्म उच्च उत्पादकता और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। यह पेड़ मध्यम से बड़े आकार का होता है। इसकी ऊंचाई 10 से 15 मीटर तक हो सकती है। इसे प्रूनिंग के जरिए नियंत्रित रखा जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह लेटरल ब्रांचेज पर लगभग 90 प्रतिशत तक फल देता है। यह किस्म लेट-बडिंग होती है जिससे यह वसंत ऋतु में पड़ने वाले पाले से काफी हद तक सुरक्षित रहती है।
इसके फल अंडाकार आकार के होते हैं जिनका छिलका पतला, चिकना और अच्छी तरह सील होता है। हाई डेंसिटी प्लांटेशन स्कीम के तहत किसानों को इस योजना में 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। खास बात यह है कि पौधे लगाने वाली कंपनी स्वयं मौके पर पहुंचकर पौधरोपण का कार्य पूरा करती है। ये पौधे इंपोर्टेड हैं और पारंपरिक पौधों के मुकाबले जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं। इससे किसानों को कम समय में लाभ मिल सकता है।
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कोट
बनी क्षेत्र में बागवानी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर भी अपना रुझान बढ़ाएं। बनी के पहाड़ी इलाकों में जलवायु और भूमि की स्थिति बागवानी के लिए अनुकूल है। अधिक से अधिक किसान इस दिशा में आगे आएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। इस नई पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बनी क्षेत्र अखरोट उत्पादन के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाएगा।
- मोहम्मद शकील, जिला बागवानी अधिकारी
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बनी। हॉर्टिकल्चर विभाग ने पहली बार हाई डेंसिटी प्लांटेशन स्कीम के तहत चैंडलर अखरोट के पौधे लगाए हैं। करीब तीन कनाल भूमि में आधुनिक तकनीक से अखरोट का बाग विकसित किया गया है। इससे किसानों में उत्साह है।
चैंडलर अखरोट की यह किस्म उच्च उत्पादकता और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। यह पेड़ मध्यम से बड़े आकार का होता है। इसकी ऊंचाई 10 से 15 मीटर तक हो सकती है। इसे प्रूनिंग के जरिए नियंत्रित रखा जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह लेटरल ब्रांचेज पर लगभग 90 प्रतिशत तक फल देता है। यह किस्म लेट-बडिंग होती है जिससे यह वसंत ऋतु में पड़ने वाले पाले से काफी हद तक सुरक्षित रहती है।
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इसके फल अंडाकार आकार के होते हैं जिनका छिलका पतला, चिकना और अच्छी तरह सील होता है। हाई डेंसिटी प्लांटेशन स्कीम के तहत किसानों को इस योजना में 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। खास बात यह है कि पौधे लगाने वाली कंपनी स्वयं मौके पर पहुंचकर पौधरोपण का कार्य पूरा करती है। ये पौधे इंपोर्टेड हैं और पारंपरिक पौधों के मुकाबले जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं। इससे किसानों को कम समय में लाभ मिल सकता है।
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बनी क्षेत्र में बागवानी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर भी अपना रुझान बढ़ाएं। बनी के पहाड़ी इलाकों में जलवायु और भूमि की स्थिति बागवानी के लिए अनुकूल है। अधिक से अधिक किसान इस दिशा में आगे आएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। इस नई पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बनी क्षेत्र अखरोट उत्पादन के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाएगा।
- मोहम्मद शकील, जिला बागवानी अधिकारी