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Kathua News: रंजीत सागर झील में मछली पकड़ने का टेंडर पांचवीं बार हुआ फेल
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कठुआ। रंजीत सागर झील में जम्मू-कश्मीर के हिस्से से इस साल मछली पकड़ने के एवज में एक करोड़ 46 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
वहीं पहली बार देश भर से ठेकेदारों को इस निविदा प्रक्रिया में मछली पालन विभाग ने आमंत्रित किया है। बावजूद इसके पांच बार करवाई गई यह प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पाई है।
ऐसे में पंजाब के इलाके में ठेका हो जाने के बाद झील के जम्मू-कश्मीर वाले हिस्से में मछली चोरी बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है। उधर, विभाग ने छठी बार झील से मछली पकड़ने के लिए निविदा प्रक्रिया फिर शुरू कर दी है।
उधर, पंजाब के हिस्से वाले रंजीत सागर झील में बीते सप्ताह ही एक करोड़ 37 लाख रुपये में बोली प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। पंजाब सरकार की ओर से अपने क्षेत्र के लिए न्यूनतम बोली एक लाख 32 हजार रुपये निधार्रित की गई थी। जम्मू-कश्मीर सरकार के पास रंजीत सागर जलाशय का लगभग 58 फीसदी से अधिक हिस्सा है, जबकि पंजाब के पास 35 फीसदी और शेष हिमाचल के हिस्से आता है। 87 वर्ग किलोमीटर में फैली हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर यह झील अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश सरकार के लिए राजस्व का एक बड़ा जरिया भी बनी है। दरअसल अनुछेद 370 की समाप्ति के बाद लाखों में होने वाली बोली प्रक्रिया अब करोड़ों में पहुंच गई है।
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वर्ष 2021 में मछली निकालने के ठेके से 52 लाख, जबकि वर्ष 2022 में एक करोड़ 22 लाख रुपये की राशि सरकार के खजाने में आई थी। बीते साल यह प्रक्रिया एक करोड़ 33 लाख में पूरी हुई थी। इस साल मछली पकड़ने का ठेका समाप्त होने के साथ ही विभाग ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी थी। प्रक्रिया समय पर न होने से सरकार की झोली में आने वाला आठ महीने का राजस्व भी कम हो गया है। यदि न्यूनतम बोली के हिसाब से भी देखा जाए तो सरकार के खाते में आने वाली लगभग एक करोड़ राशि इस साल नहीं आ पाई है।
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वहीं पहली बार देश भर से ठेकेदारों को इस निविदा प्रक्रिया में मछली पालन विभाग ने आमंत्रित किया है। बावजूद इसके पांच बार करवाई गई यह प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पाई है।
ऐसे में पंजाब के इलाके में ठेका हो जाने के बाद झील के जम्मू-कश्मीर वाले हिस्से में मछली चोरी बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है। उधर, विभाग ने छठी बार झील से मछली पकड़ने के लिए निविदा प्रक्रिया फिर शुरू कर दी है।
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उधर, पंजाब के हिस्से वाले रंजीत सागर झील में बीते सप्ताह ही एक करोड़ 37 लाख रुपये में बोली प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। पंजाब सरकार की ओर से अपने क्षेत्र के लिए न्यूनतम बोली एक लाख 32 हजार रुपये निधार्रित की गई थी। जम्मू-कश्मीर सरकार के पास रंजीत सागर जलाशय का लगभग 58 फीसदी से अधिक हिस्सा है, जबकि पंजाब के पास 35 फीसदी और शेष हिमाचल के हिस्से आता है। 87 वर्ग किलोमीटर में फैली हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर यह झील अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश सरकार के लिए राजस्व का एक बड़ा जरिया भी बनी है। दरअसल अनुछेद 370 की समाप्ति के बाद लाखों में होने वाली बोली प्रक्रिया अब करोड़ों में पहुंच गई है।
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वर्ष 2021 में मछली निकालने के ठेके से 52 लाख, जबकि वर्ष 2022 में एक करोड़ 22 लाख रुपये की राशि सरकार के खजाने में आई थी। बीते साल यह प्रक्रिया एक करोड़ 33 लाख में पूरी हुई थी। इस साल मछली पकड़ने का ठेका समाप्त होने के साथ ही विभाग ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी थी। प्रक्रिया समय पर न होने से सरकार की झोली में आने वाला आठ महीने का राजस्व भी कम हो गया है। यदि न्यूनतम बोली के हिसाब से भी देखा जाए तो सरकार के खाते में आने वाली लगभग एक करोड़ राशि इस साल नहीं आ पाई है।