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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   J&K: Government will buy 900 sheep from Australia for Rs 26 crore, demand for 15 lakh sheep for meat in Jammu

J&K: ऑस्ट्रेलिया से 26 करोड़ में 900 भेड़ें खरीदेगी सरकार, जम्मू-कश्मीर में मांस के लिए 15 लाख भेड़ों की मांग

Mon, 20 Jan 2025 06:01 PM IST
निकिता गुप्ता साहिल खजूरिया अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ
साहिल खजूरिया अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 20 Jan 2025 06:01 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर सरकार ने ऑस्ट्रेलिया से 900 भेड़ें आयात करने का फैसला किया है, जिनमें डॉर्पर और टैक्सेल नस्ल की भेड़ें शामिल हैं। इन भेड़ों का इस्तेमाल मुख्य रूप से दोनों संभागों में मीट की मांग पूरी करने के लिए किया जाएगा।

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J&K: Government will buy 900 sheep from Australia for Rs 26 crore, demand for 15 lakh sheep for meat in Jammu
भेड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में मांस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएपीडी) के तहत ऑस्ट्रेलिया से 900 भेड़ें आयात की जा रही हैं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से दोनों संभागों में मीट की मांग पूरी करने के लिए किया जाएगा। इन पर 26 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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ये भेड़ें टैक्सेल और डाॅर्पर नस्ल की हैं और अत्यधिक मीट उत्पादन के लिए दुनिया में जानी जाती हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश को मीट उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर इनके प्रजनन को भी बढ़ावा देने की योजना है।जल्द ही जम्मू और कश्मीर संभाग से भेड़ पालन से जुड़े छह विशेषज्ञों का दल ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना होगा।
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आयात की जाने वाली भेड़ें एक माह तक ऑस्ट्रेलिया में क्वारंटीन रहेंगी। भारत में आने के बाद इन्हें दोनों संभागों में तैयार क्वारंटीन सेंटरों में दो महीने तक रखा जाएगा। कठुआ के राजबाग में क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। डाॅर्पर नस्ल की 450 भेड़ें जम्मू और टैक्सेल नस्ल की इतनी ही भेड़ें कश्मीर संभाग को उपलब्ध कराई जाएंगी।

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जम्मू-कश्मीर में हर साल 15 लाख भेड़ों की खपतजम्मू-कश्मीर में मीट की मांग ज्यादा है। खासकर कश्मीरी व्यंजनों में इसकी खपत ज्यादा होती है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक हर साल मीट के लिए 15 लाख से ज्यादा भेड़ों की मांग है। प्रदेश में 41 प्रतिशत मीट देश के अन्य हिस्सों से मंगाया जाता है।

इस पर 1400 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार ने समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में ऊन और मटन की उत्पादकता बढ़ाने और आयात कम करने के लिए 329 करोड़ रुपये की पंचवर्षीय परियोजना मंजूर की है।

चार माह में 40 किलोग्राम के हो जाते हैं मेमने
डॉर्पर भेड़ें डोरसेट सींग वाले मेढ़ों और ब्लैकहेड फारसी भेड़ों का क्रॉस ब्रीड हैं। डॉर्पर नस्ल के मेमने लगभग चार महीने में ही 35 से 40 किलोग्राम के हो जाते हैं। वयस्क भेड़ों का वजन 90 किलोग्राम तक होता है। अधिक प्रजनन क्षमता और मौसम की स्थिति के अनुकूल होने की वजह से डॉर्पर भेड़ों की मांग बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों ने इस प्रजाति को जम्मू संभाग के लिए उपयुक्त पाया है। 

टैक्सेल भेड़ों की खासियतटैक्सेल घरेलू भेड़ की एक डच नस्ल है। यह मूल रूप से टैक्सेल द्वीप और नीदरलैंड के उत्तर तटीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं। टैक्सेल नस्ल की भेड़ों के सिर और पैर चिकने होते हैं। इसका कद छोटा, चेहरा चौड़ा, नाक काली और कान छोटे होते हैं। इस नस्ल की सबसे खास विशेषता यह है कि इसकी मांसपेशियां अन्य भेड़ों की तुलना में जल्दी विकसित हो जाती हैं।

राजबाग में क्वारंटीन सेंटर तैयार 
इन भेड़ों के लिए राजबाग में क्वारंटीन सेंटर तैयार कर लिया गया है। क्वारंटीन किए जाने के बाद इन्हें रियासी के सरकारी भेड़ पालन फार्म पैंथल में रखा जाएगा। दस्तावेजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जल्द ही विशेषज्ञों की टीम ऑस्ट्रेलिया रवाना होगी। 'डॉ. आर के मन्हास, जिला भेड़पालन अधिकारी, कठुआ' 
 
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