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Kathua News: श्रीमद् भागवत कथा में कथाव्यास ने सुनाया श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग
Mon, 24 Mar 2025 01:27 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 24 Mar 2025 01:27 AM IST
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नगरोटा गुजरू में प्रवचन करते कथाव्यास। संवाद
- फोटो : kathua
तहसील के दुर्गा मंदिर काह नगरोटा गुजरू में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सातवां दिन
रामकोट। तहसील के दुर्गा मंदिर काह नगरोटा गुजरू में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक विजय कृष्ण पराशर जी महाराज शास्त्री ने कृष्ण-सुदामा मित्रता की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि एक दिन सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से सखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे।
द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। जब श्रीकृष्ण को सुदामा के आगमन की सूचना मिली तो वह सुदामा-सुदामा कहते हुए द्वार की ओर भागे और सुदामा को सीने से लगा लिया। कथावाचक ने कहा कि जीवन में हमें किसी भी चीज का घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि हर सांस श्री कृष्ण का नाम लेना चाहिए। साप्ताहिक कथा के समापन पर आयोजकों की ओर से आए हुए श्रद्धालुओं के लिए भंडारा लगाया गया। इसमें 2000 से अधिक लोगों ने लंगर ग्रहण किया। संवाद
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रामकोट। तहसील के दुर्गा मंदिर काह नगरोटा गुजरू में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक विजय कृष्ण पराशर जी महाराज शास्त्री ने कृष्ण-सुदामा मित्रता की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि एक दिन सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से सखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे।
द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। जब श्रीकृष्ण को सुदामा के आगमन की सूचना मिली तो वह सुदामा-सुदामा कहते हुए द्वार की ओर भागे और सुदामा को सीने से लगा लिया। कथावाचक ने कहा कि जीवन में हमें किसी भी चीज का घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि हर सांस श्री कृष्ण का नाम लेना चाहिए। साप्ताहिक कथा के समापन पर आयोजकों की ओर से आए हुए श्रद्धालुओं के लिए भंडारा लगाया गया। इसमें 2000 से अधिक लोगों ने लंगर ग्रहण किया। संवाद
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