{"_id":"64a0763ec8be0a5237077b96","slug":"farming-in-ib-kathua-news-c-201-1-knt1002-571-2023-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: सीजफायर के बाद आईबी पर तारबंदी के आगे तेजी से हो रहा खेती का विस्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: सीजफायर के बाद आईबी पर तारबंदी के आगे तेजी से हो रहा खेती का विस्तार
Sun, 02 Jul 2023 12:23 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 02 Jul 2023 12:23 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- करोल कृष्णा में 80 एकड़ पर शुरू हुई उड़द की बुवाई
- कृषि विभाग और बीएसएफ के सहयोग मिलने पर बढ़ रही यहां खेती करने वाले किसानों की संख्या
हीरानगर। भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर सीजफायर के बाद से हालात लगातार बदल रहे हैं। 22 साल तक तारबंदी के आगे खेती बंद रही, जिसे करीब 2 वर्ष पहले शुरू किया गया और अब यहां खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। इससे यहां खेती का विस्तार अब तेजी से हो रहा है।
शनिवार को करोल कृष्णा में तारबंदी के आगे उड़द की फसल की बुवाई शुरू की गई। कृषि विभाग के जिला अधिकारी संजीव राय और डीडीसी सदस्य अभिनंदन शर्मा ने बुवाई का काम शुरू कराया।
करीब डेढ़ वर्ष पहले जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से किसानों को तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 80 एकड़ पर रब्बी की फसल से शुरुआत की गई। धीरे-धीरे किसान यहां खेती करने के लिए प्रेरित हुए तो दूसरी बार गेहूं 141 एकड़ पर और तीसरी 251 एकड़ पर बोई गई।
विज्ञापन
खरीफ की फसल उड़द की यहां दूसरी बार बुवाई की जा रही है। पिछली बार 151 एकड़ पर उड़द की फसल बोई गई थी इस बार 200 एकड़ के आंकड़े को पार करने की तैयारी चल रही है। कृषि विभाग जिला प्रशासन और बीएसएफ के सहयोग से किसान यहां अपनी खेती का दायरा बढ़ा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सालों से खाली पड़ी जमीनों पर फिर से खेती शुरू होने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
इस मौके पर डीडीसी सदस्य ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से 22 साल बाद तारबंदी के आगे खेती का काम शुरू हो पाया है। बहुत जल्द पूरी जमीन पर किसान खेती करेंगे, जिससे उन्हें अपनी जमीनों से जुड़ने का मौका तो मिलेगा ही उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि वह सीमावर्ती किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। इसके लिए पार्टी के नेताओं और सरकार से बात करेंगे।
जिला कृषि अधिकारी संजीव राय ने कहा 500 से 600 एकड़ तारबंदी के आगे भूमि पर खेती करवाने का लक्ष्य है। किसानों को प्रेरित करने के उद्देश्य से 80 एकड़ पर खेती का काम शुरू किया गया था और 251 एकड़ तक का लक्ष्य पार कर लिया है। उन्होंने बताया कि आज भी उड़द की बुवाई के लिए किसानों को विभाग की ओर से मुफ्त बीज उपलब्ध कराया गया है। आगे भी यहां खेती करने वाले किसानों की विभाग की ओर से हरसंभव सहायता की जाएगी।
उन्होंने बताया कि एनएफएसएम के तहत हमने एक प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को भेजा है। अगर उसे मंजूरी मिलती है तो खाद, कीटनाशक के अलावा और भी कई सहायता सरकार की ओर से किसानों को मिलेगी।
विज्ञापन
- कृषि विभाग और बीएसएफ के सहयोग मिलने पर बढ़ रही यहां खेती करने वाले किसानों की संख्या
हीरानगर। भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर सीजफायर के बाद से हालात लगातार बदल रहे हैं। 22 साल तक तारबंदी के आगे खेती बंद रही, जिसे करीब 2 वर्ष पहले शुरू किया गया और अब यहां खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। इससे यहां खेती का विस्तार अब तेजी से हो रहा है।
शनिवार को करोल कृष्णा में तारबंदी के आगे उड़द की फसल की बुवाई शुरू की गई। कृषि विभाग के जिला अधिकारी संजीव राय और डीडीसी सदस्य अभिनंदन शर्मा ने बुवाई का काम शुरू कराया।
विज्ञापन
करीब डेढ़ वर्ष पहले जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से किसानों को तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 80 एकड़ पर रब्बी की फसल से शुरुआत की गई। धीरे-धीरे किसान यहां खेती करने के लिए प्रेरित हुए तो दूसरी बार गेहूं 141 एकड़ पर और तीसरी 251 एकड़ पर बोई गई।
विज्ञापन
खरीफ की फसल उड़द की यहां दूसरी बार बुवाई की जा रही है। पिछली बार 151 एकड़ पर उड़द की फसल बोई गई थी इस बार 200 एकड़ के आंकड़े को पार करने की तैयारी चल रही है। कृषि विभाग जिला प्रशासन और बीएसएफ के सहयोग से किसान यहां अपनी खेती का दायरा बढ़ा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सालों से खाली पड़ी जमीनों पर फिर से खेती शुरू होने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
इस मौके पर डीडीसी सदस्य ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से 22 साल बाद तारबंदी के आगे खेती का काम शुरू हो पाया है। बहुत जल्द पूरी जमीन पर किसान खेती करेंगे, जिससे उन्हें अपनी जमीनों से जुड़ने का मौका तो मिलेगा ही उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि वह सीमावर्ती किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। इसके लिए पार्टी के नेताओं और सरकार से बात करेंगे।
जिला कृषि अधिकारी संजीव राय ने कहा 500 से 600 एकड़ तारबंदी के आगे भूमि पर खेती करवाने का लक्ष्य है। किसानों को प्रेरित करने के उद्देश्य से 80 एकड़ पर खेती का काम शुरू किया गया था और 251 एकड़ तक का लक्ष्य पार कर लिया है। उन्होंने बताया कि आज भी उड़द की बुवाई के लिए किसानों को विभाग की ओर से मुफ्त बीज उपलब्ध कराया गया है। आगे भी यहां खेती करने वाले किसानों की विभाग की ओर से हरसंभव सहायता की जाएगी।
उन्होंने बताया कि एनएफएसएम के तहत हमने एक प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को भेजा है। अगर उसे मंजूरी मिलती है तो खाद, कीटनाशक के अलावा और भी कई सहायता सरकार की ओर से किसानों को मिलेगी।