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Kathua News: सन्ननघाट में श्रीराम कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर
Sat, 23 Aug 2025 01:18 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 23 Aug 2025 01:18 AM IST
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कठुआ। बसोहली के सन्ननघाट में श्रीराम कथा का आयोजन जारी है। जहां बड़ी संख्या में आने वाले भक्त कथाव्यास श्री राम दास अनुरागी जी के द्वारा किए जाने वाले प्रवचन का रसपान कर रहे है।
जारी कथा के दूसरे दिन कथाव्यास ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सीता हरण से व्याकुल श्री राम का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि त्रेता युग में माता सीता के हरण से व्याकुल हो प्रभु श्री राम जब उनकी खोज कर रहे थे, तो महादेव भी राम को देख मगन हो सच्चिदानंद जी मन ही मन जयकार करने लगे। लेकिन माता सती को यह विश्वास हुआ ही नहीं कि यह राम परमात्मा ही हैं। बार-बार शिव के समझाने के बाद भी सती जी का भ्रम नहीं मिटा तो शिव ने सती को परीक्षा लेने के लिए कह दिया और मन ही मन विचार किया और वह परीक्षा लेने के लिए माता सीता का वेश बना कर प्रभु श्री राम के सामने चली गई। लेकिन श्री राम ने सती को पहचान लिया और प्रणाम किया और शिव का समाचार पूछा। जिससे सती जी लज्जित होकर राम के ऐश्वर्य से परिचित हो वापस शिवजी के पास लौट गईं और शिव के पूछने पर झूठ बोल गई।
शिव ध्यान में सती के सीता रूप को भी देख लेते हैं तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने सती का पत्नी के रूप में परित्याग करने का प्रण कर लिया। इस तरह सती के शरीर त्याग, पार्वती जी के रूप में पुनर्जन्म, पार्वती जी की तपस्या, कामदेव द्वारा शिव का ध्यान भंग, कामदेव का भस्म होना, शिव पार्वती विवाह तक कथा प्रकरण चला।
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जारी कथा के दूसरे दिन कथाव्यास ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सीता हरण से व्याकुल श्री राम का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि त्रेता युग में माता सीता के हरण से व्याकुल हो प्रभु श्री राम जब उनकी खोज कर रहे थे, तो महादेव भी राम को देख मगन हो सच्चिदानंद जी मन ही मन जयकार करने लगे। लेकिन माता सती को यह विश्वास हुआ ही नहीं कि यह राम परमात्मा ही हैं। बार-बार शिव के समझाने के बाद भी सती जी का भ्रम नहीं मिटा तो शिव ने सती को परीक्षा लेने के लिए कह दिया और मन ही मन विचार किया और वह परीक्षा लेने के लिए माता सीता का वेश बना कर प्रभु श्री राम के सामने चली गई। लेकिन श्री राम ने सती को पहचान लिया और प्रणाम किया और शिव का समाचार पूछा। जिससे सती जी लज्जित होकर राम के ऐश्वर्य से परिचित हो वापस शिवजी के पास लौट गईं और शिव के पूछने पर झूठ बोल गई।
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शिव ध्यान में सती के सीता रूप को भी देख लेते हैं तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने सती का पत्नी के रूप में परित्याग करने का प्रण कर लिया। इस तरह सती के शरीर त्याग, पार्वती जी के रूप में पुनर्जन्म, पार्वती जी की तपस्या, कामदेव द्वारा शिव का ध्यान भंग, कामदेव का भस्म होना, शिव पार्वती विवाह तक कथा प्रकरण चला।
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