{"_id":"6797ea043e35c3bc8f089016","slug":"court-cancel-the-petition-kathua-news-c-201-1-knt1009-116907-2025-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना को लेकर दायर याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना को लेकर दायर याचिका खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- याचिकाकर्ता पिछली तीन तारीखों से कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हुआ, लिहाजा याचिका खारिज की जाती है : कोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया। आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता पिछली तीन तारीखों से कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हुआ, लिहाजा याचिका को खारिज कर दिया गया।
याचिका के अनुसार, रवि कुमार पुत्र बलबीर दास निवासी तंगदेवपुर मढ़ीन की ओर से 14 अक्तूबर 2023 को याचिका दायर की गई थी। जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसने प्रीति देवी पुत्री करतार चंद के साथ हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक विवाह किया था। लेकिन शादी के बाद लड़की के माता-पिता ही उसे पति के साथ रहने नहीं दे रहे थे। इसके उपरांत याचिकाकर्ता ने कोर्ट की शरण ली। लेकिन खुद याचिकाकर्ता मामले में पिछली तीन तारीखों से कोर्ट में गैरहाजिर रहा।
मामले में अंतिम सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता का दावा गलत है कि उसने प्रतिवादी से कानूनी तरीके से विवाह किया था। क्योंकि प्रतिवादी (प्रीति देवी) विवाह को लेकर अपना बयान पहले ही अदालत में दर्ज करवा चुकी है। इसलिए याचिका के साथ संलग्न विवाह का दस्तावेज भी झूठा और मनगढ़ंत है। लिहाजा इसे खारिज किया जाए। जिसे अदालत ने मान लिया और दायर याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया। आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता पिछली तीन तारीखों से कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हुआ, लिहाजा याचिका को खारिज कर दिया गया।
याचिका के अनुसार, रवि कुमार पुत्र बलबीर दास निवासी तंगदेवपुर मढ़ीन की ओर से 14 अक्तूबर 2023 को याचिका दायर की गई थी। जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसने प्रीति देवी पुत्री करतार चंद के साथ हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक विवाह किया था। लेकिन शादी के बाद लड़की के माता-पिता ही उसे पति के साथ रहने नहीं दे रहे थे। इसके उपरांत याचिकाकर्ता ने कोर्ट की शरण ली। लेकिन खुद याचिकाकर्ता मामले में पिछली तीन तारीखों से कोर्ट में गैरहाजिर रहा।
विज्ञापन
मामले में अंतिम सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता का दावा गलत है कि उसने प्रतिवादी से कानूनी तरीके से विवाह किया था। क्योंकि प्रतिवादी (प्रीति देवी) विवाह को लेकर अपना बयान पहले ही अदालत में दर्ज करवा चुकी है। इसलिए याचिका के साथ संलग्न विवाह का दस्तावेज भी झूठा और मनगढ़ंत है। लिहाजा इसे खारिज किया जाए। जिसे अदालत ने मान लिया और दायर याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन