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Kathua News: नौ वर्ष पुराने आबकारी मामले के दो आरोपी कोर्ट से बरी
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न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने नौ वर्ष पुराने आबकारी मामले के दो आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन सिद्ध नहीं कर पाया कि जब्त की गई वस्तु आबकारी अधिनियम की धारा-3 के तहत शराब की श्रेणी में आती है। बिना किसी वैज्ञानिक परीक्षण या विशेषज्ञ राय के केवल बोतल पर लिखे लेबल के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता है।
सुरजीत सिंह पुत्र बिशन दास निवासी बिमियाल और धर्म पॉल पुत्र हरि दास निवासी बडमा पठानकोट पर आरोप था कि वे पंजाब की बनी हुई शराब को अवैध तरीके से जम्मू-कश्मीर में बेच रहे थे। मामला 29 नवंबर 2016 का है। मढ़ीन चौकी पुलिस टीम ने चक नथल से अवैध रूप से शराब की तस्करी के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया था। मौके पर पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 48 शराब की बोतलें और एक अल्टो कार जब्त की थी। इन सभी बोतलों पर लिखा था शराब की बिक्री सिर्फ पंजाब में ही हो सकती है। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ राजबाग थाने में आबकारी एक्ट में मामला दर्ज कर चालान सात दिसंबर को कोर्ट में पेश किया गया। आरोपियों के खिलाफ आरोप 13 मार्च 2017 को तय किए गए थे। इसमें आरोपियों ने अपराध से इनकार किया। कोर्ट के निर्देश पर अभियोजन पक्ष ने मामले में सूचीबद्ध कुल पांच गवाहों में से तीन को कोर्ट में पेश किया। तीन पुलिस गवाहों ने अदालत में बयान दिए, लेकिन किसी स्वतंत्र नागरिक गवाह को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि पुलिस की ओर से जब्त शराब की कोई रासायनिक जांच नहीं करवाई गई थी, जिससे यह सिद्ध नहीं हो सका कि जब्त की गई वस्तु वास्तव में शराब ही थी। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि जब्त शराब को मजिस्ट्रेट द्वारा सील नहीं किया गया। इसके चलते अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जब्त शराब को मानव उपभोग योग्य पाए जाने पर बिक्री के लिए आबकारी विभाग को सौंपा जाए अन्यथा उसे नष्ट कर दिया जाए।
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सुरजीत सिंह पुत्र बिशन दास निवासी बिमियाल और धर्म पॉल पुत्र हरि दास निवासी बडमा पठानकोट पर आरोप था कि वे पंजाब की बनी हुई शराब को अवैध तरीके से जम्मू-कश्मीर में बेच रहे थे। मामला 29 नवंबर 2016 का है। मढ़ीन चौकी पुलिस टीम ने चक नथल से अवैध रूप से शराब की तस्करी के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया था। मौके पर पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 48 शराब की बोतलें और एक अल्टो कार जब्त की थी। इन सभी बोतलों पर लिखा था शराब की बिक्री सिर्फ पंजाब में ही हो सकती है। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ राजबाग थाने में आबकारी एक्ट में मामला दर्ज कर चालान सात दिसंबर को कोर्ट में पेश किया गया। आरोपियों के खिलाफ आरोप 13 मार्च 2017 को तय किए गए थे। इसमें आरोपियों ने अपराध से इनकार किया। कोर्ट के निर्देश पर अभियोजन पक्ष ने मामले में सूचीबद्ध कुल पांच गवाहों में से तीन को कोर्ट में पेश किया। तीन पुलिस गवाहों ने अदालत में बयान दिए, लेकिन किसी स्वतंत्र नागरिक गवाह को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि पुलिस की ओर से जब्त शराब की कोई रासायनिक जांच नहीं करवाई गई थी, जिससे यह सिद्ध नहीं हो सका कि जब्त की गई वस्तु वास्तव में शराब ही थी। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि जब्त शराब को मजिस्ट्रेट द्वारा सील नहीं किया गया। इसके चलते अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जब्त शराब को मानव उपभोग योग्य पाए जाने पर बिक्री के लिए आबकारी विभाग को सौंपा जाए अन्यथा उसे नष्ट कर दिया जाए।
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