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Kathua News: गर्मी के साथ बच्चों में बढ़ रहे उल्टी-दस्त और अपच के मामले
Thu, 15 May 2025 12:48 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 15 May 2025 12:48 AM IST
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- प्रतिदिन 20 बच्चे जीएमसी कठुआ में हो रहे उपचार के लिए भर्ती
- अप्रैल महीने के 22 दिनों की ओपीडी के दौरान 1900 बच्चे ओपीडी में जांच के लिए पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बढ़ती गर्मी के साथ बच्चों में उल्टी-दस्त और अपच के मामलों में बढ़ोतरी होना शुरू हो गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ में प्रतिदिन औसतन 20 बच्चे भर्ती हो रहे हैं। वहीं, मई महीने में हुई बारिश के बाद ठंड बढ़ने से मौसम में आए बदलाव से खांसी और जुकाम के मामलों में काफी इजाफा हुआ है।
वहीं, शिशु विशेषज्ञों की मानें तो अप्रैल महीने के 22 दिनों में ओपीडी के दौरान कुल 1900 बच्चे दस्त-उल्टी और अपच की जांच के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें से 20 बच्चे हर रोज बेहतर उपचार के लिए भर्ती हो रहे हैं। पिछले 22 दिनों में कुल 400 से ज्यादा बच्चों को उपचार के लिए भर्ती किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर बीमारी गंदा पानी पीने से हो रही है। इसमें तीव्र आंत्रशोथ, टाइफाइड और पीलिया से बच्चे जल्दी शिकार हो जाते हैं। गर्मी की शुरुआत में अचानक तापमान में बढ़ौतरी होने से बर्फ का पानी पीने, कम उबले हुए दूध से बनने वाली आइसक्रीम और अन्य चीजें खाने और अंधड़ के इलाके में शैलों हैंडपंप का पानी पीने से न केवल बच्चे, बल्कि बड़े भी इन बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इससे वायरल बुखार के साथ-साथ दस्त-उल्टी और अपच की समस्या आना लाजिमी है।
ओपीडी के आंकड़े के मुताबिक, फरवरी महीने में ओपीडी में कुल 2,547 बच्चे उपचार के लिए आए। वहीं, मार्च में यह संख्या 2166 थी। इसमें 70 फीसदी बच्चे खांसी, जुकाम और नजला से प्रभावित थे। अप्रैल में 22 दिनों की ओपीडी में कुल 1900 बच्चे जांच के लिए अस्पताल आए। इसमें 70 फीसदी बच्चे दस्त, अपच और उल्टी जैसी बीमारियों से ग्रस्त थे।
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इन बातों का रखें ध्यान
-जितना हो सके पानी को उबाल कर पीएं।
-छोटे बच्चे दिन में कई बार हाथ धोएं।
-घर में अगर किसी को खांसी व जुकाम है तो बच्चों के संपर्क में न आए।
-भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ लें।
-गंदगी वाली जगह पर बच्चों को न जाने दें।
-अगर घर पर कोई बीमार है तो उससे दूरी बनाकर रखें।
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कोट
मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। अप्रैल महीने अचानक तापमान बढ़ने और फिर बारिश के बाद मौसम ठंडा हो जाता है। मौसम बदलाव से बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ रहा है। इससे बच्चे दस्त और अपच जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। बच्चों के अभिभावकों को गर्मी के मौसम में बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें उबला हुआ पानी ही पिलाएं और बाहर से बनी आइस क्रीम और अन्य चीजें बच्चों को न खाने दें।
-- डॉ. वीरेंद्र चौधरी, एचओडी, शिशु विभाग जीएमसी कठुआ
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- अप्रैल महीने के 22 दिनों की ओपीडी के दौरान 1900 बच्चे ओपीडी में जांच के लिए पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बढ़ती गर्मी के साथ बच्चों में उल्टी-दस्त और अपच के मामलों में बढ़ोतरी होना शुरू हो गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ में प्रतिदिन औसतन 20 बच्चे भर्ती हो रहे हैं। वहीं, मई महीने में हुई बारिश के बाद ठंड बढ़ने से मौसम में आए बदलाव से खांसी और जुकाम के मामलों में काफी इजाफा हुआ है।
वहीं, शिशु विशेषज्ञों की मानें तो अप्रैल महीने के 22 दिनों में ओपीडी के दौरान कुल 1900 बच्चे दस्त-उल्टी और अपच की जांच के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें से 20 बच्चे हर रोज बेहतर उपचार के लिए भर्ती हो रहे हैं। पिछले 22 दिनों में कुल 400 से ज्यादा बच्चों को उपचार के लिए भर्ती किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर बीमारी गंदा पानी पीने से हो रही है। इसमें तीव्र आंत्रशोथ, टाइफाइड और पीलिया से बच्चे जल्दी शिकार हो जाते हैं। गर्मी की शुरुआत में अचानक तापमान में बढ़ौतरी होने से बर्फ का पानी पीने, कम उबले हुए दूध से बनने वाली आइसक्रीम और अन्य चीजें खाने और अंधड़ के इलाके में शैलों हैंडपंप का पानी पीने से न केवल बच्चे, बल्कि बड़े भी इन बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इससे वायरल बुखार के साथ-साथ दस्त-उल्टी और अपच की समस्या आना लाजिमी है।
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ओपीडी के आंकड़े के मुताबिक, फरवरी महीने में ओपीडी में कुल 2,547 बच्चे उपचार के लिए आए। वहीं, मार्च में यह संख्या 2166 थी। इसमें 70 फीसदी बच्चे खांसी, जुकाम और नजला से प्रभावित थे। अप्रैल में 22 दिनों की ओपीडी में कुल 1900 बच्चे जांच के लिए अस्पताल आए। इसमें 70 फीसदी बच्चे दस्त, अपच और उल्टी जैसी बीमारियों से ग्रस्त थे।
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इन बातों का रखें ध्यान
-जितना हो सके पानी को उबाल कर पीएं।
-छोटे बच्चे दिन में कई बार हाथ धोएं।
-घर में अगर किसी को खांसी व जुकाम है तो बच्चों के संपर्क में न आए।
-भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ लें।
-गंदगी वाली जगह पर बच्चों को न जाने दें।
-अगर घर पर कोई बीमार है तो उससे दूरी बनाकर रखें।
कोट
मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। अप्रैल महीने अचानक तापमान बढ़ने और फिर बारिश के बाद मौसम ठंडा हो जाता है। मौसम बदलाव से बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ रहा है। इससे बच्चे दस्त और अपच जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। बच्चों के अभिभावकों को गर्मी के मौसम में बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें उबला हुआ पानी ही पिलाएं और बाहर से बनी आइस क्रीम और अन्य चीजें बच्चों को न खाने दें।