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Kathua News: आज घर घर विराजेंगे गणपति बप्पा, तैयारियां पूरी
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कठुआ। श्री गणेश चतुर्थ को लेकर जिले भर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कठुआ शहर में विशाल पंडाल सजा दिया गया है तो वहीं हीरानगर और मढ़ीन में भी तैयारियां पूरी हैं।
विशाल पंडाल के अलावा गणपति को घर घर में विराजमान करने के लिए भक्तों ने भी मूर्तियों की जमकर खरीदारी की। पांच हजार के लगभग मूर्तियों की बिक्री जिले में होने का अनुमान है।
शनिवार से शुरू होकर 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व को लेकर शहर में जगह-जगह भगवान गणेश की प्रतिमाओं के स्टाॅल सजे हुए हैं। जहां रंगों में गढ़ी गई बप्पा की मन को मोहित कर देने वाली प्रतिमाएं हर किसी को अपनी ओर खींच रही हैं। सुबह से ही स्टाॅलों पर पहुंचने वाले लोग अपने घरों में बप्पा का पूजन करने के लिए प्रतिमाओं को पसंद करते देखे गए।
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उधर, शहर के पुराने गर्ल्स हायर सेकेंडरी परिसर में बप्पा के 10 दिन के पूजन की तैयारियों में पंडाल सजाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। यहां डेढ़ हजार भक्तों के लिए बैठने का इंतजाम किया गया है। आदियोगी गौतम स्वामी ने बताया कि हिंदू धर्म में हर साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है। सात सितंबर से 17 सितंबर तक चलने वाले इस पर्व में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना से लेकर विसर्जन करने तक की परंपरा रही है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उदयातिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन यानी सात सितंबर को गणेश जी की मूर्ति स्थापना की जाएगी। पंचांग के अनुसार मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर चार मिनट से दोपहर एक बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
...........
भगवान की मूर्तियां ही आजीविका का साधन
कठुआ शहर के नजदीक झुग्गियों में रहता है मूर्तियां बनाने वाले अशोक का परिवार
कठुआ। कहावत है जिसकी कोई नहीं सुनता, उसकी भगवान सुनते हैं। कुछ ऐसा ही राजस्थान के रहने वाले अशोक के परिवार के साथ भी है। उनके जीविकोपार्जन का साधन मूर्तियां बनाना और उन्हें बेचकर परिवार का पालन-पोषण करना है।
वर्तमान में कठुआ शहर नजदीक झुग्गियों में रह रहे अशोक कुमार पिछले लगभग एक दशक से मूर्ति बनाने के काम में लगे हैं। गणेश चतुर्थी पर लोग अपने अपने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। इसे लेकर अशोक कुमार और उनका परिवार भी कई दिन पहले से ही मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुट जाता है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका परिवार दशक भर पहले से हीरानगर और कठुआ के इलाकों में आकर मूर्ति बनाने के काम में जुट जाता है लेकिन यहां उन्हें अधिक कमाई नहीं होती थी। राजस्थान में भी उनका परिवार मूर्ति बनाने का काम करता था। इसी कारण उन्होंने अपने राज्य से बाहर जाकर अपनी कला से अपनी आजीविका चलाने की सोची। मूर्तिकारों ने बताया कि मूर्ति का मूल्य आकार और मेहनत पर निर्भर करता है। सबसे छोटी मूर्ति 300 रुपये से शुरू होती है। उसके बाद आकार के अनुसार दाम बढ़ता जाता है। सबसे महंगी मूर्ति 10 हजार रुपये की है। उनका पूरा परिवार वर्षों से यही काम कर रहा है। अब और भी कई परिवार रोजगार की आस में यहां आ गए हैं। सभी मूर्ति बनाने का ही काम करते हैं। एक से लेकर आठ फुट तक की मूर्ति तैयार की जाती है। विशेष रूप से गणेश चतुर्थी पर अधिक काम मिलता है लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और कच्चे माल की कीमतें भीं। लिहाजा कमाई कम हो गई है। उन्होंने बताया कि भगवान ही घर का खर्च चलाते हैं और उनके आशीर्वाद से ही उन्हें यह कला मिली है। इससे ही पेट भरता है।
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विशाल पंडाल के अलावा गणपति को घर घर में विराजमान करने के लिए भक्तों ने भी मूर्तियों की जमकर खरीदारी की। पांच हजार के लगभग मूर्तियों की बिक्री जिले में होने का अनुमान है।
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शनिवार से शुरू होकर 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व को लेकर शहर में जगह-जगह भगवान गणेश की प्रतिमाओं के स्टाॅल सजे हुए हैं। जहां रंगों में गढ़ी गई बप्पा की मन को मोहित कर देने वाली प्रतिमाएं हर किसी को अपनी ओर खींच रही हैं। सुबह से ही स्टाॅलों पर पहुंचने वाले लोग अपने घरों में बप्पा का पूजन करने के लिए प्रतिमाओं को पसंद करते देखे गए।
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उधर, शहर के पुराने गर्ल्स हायर सेकेंडरी परिसर में बप्पा के 10 दिन के पूजन की तैयारियों में पंडाल सजाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। यहां डेढ़ हजार भक्तों के लिए बैठने का इंतजाम किया गया है। आदियोगी गौतम स्वामी ने बताया कि हिंदू धर्म में हर साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है। सात सितंबर से 17 सितंबर तक चलने वाले इस पर्व में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना से लेकर विसर्जन करने तक की परंपरा रही है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उदयातिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन यानी सात सितंबर को गणेश जी की मूर्ति स्थापना की जाएगी। पंचांग के अनुसार मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर चार मिनट से दोपहर एक बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
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भगवान की मूर्तियां ही आजीविका का साधन
कठुआ शहर के नजदीक झुग्गियों में रहता है मूर्तियां बनाने वाले अशोक का परिवार
कठुआ। कहावत है जिसकी कोई नहीं सुनता, उसकी भगवान सुनते हैं। कुछ ऐसा ही राजस्थान के रहने वाले अशोक के परिवार के साथ भी है। उनके जीविकोपार्जन का साधन मूर्तियां बनाना और उन्हें बेचकर परिवार का पालन-पोषण करना है।
वर्तमान में कठुआ शहर नजदीक झुग्गियों में रह रहे अशोक कुमार पिछले लगभग एक दशक से मूर्ति बनाने के काम में लगे हैं। गणेश चतुर्थी पर लोग अपने अपने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। इसे लेकर अशोक कुमार और उनका परिवार भी कई दिन पहले से ही मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुट जाता है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका परिवार दशक भर पहले से हीरानगर और कठुआ के इलाकों में आकर मूर्ति बनाने के काम में जुट जाता है लेकिन यहां उन्हें अधिक कमाई नहीं होती थी। राजस्थान में भी उनका परिवार मूर्ति बनाने का काम करता था। इसी कारण उन्होंने अपने राज्य से बाहर जाकर अपनी कला से अपनी आजीविका चलाने की सोची। मूर्तिकारों ने बताया कि मूर्ति का मूल्य आकार और मेहनत पर निर्भर करता है। सबसे छोटी मूर्ति 300 रुपये से शुरू होती है। उसके बाद आकार के अनुसार दाम बढ़ता जाता है। सबसे महंगी मूर्ति 10 हजार रुपये की है। उनका पूरा परिवार वर्षों से यही काम कर रहा है। अब और भी कई परिवार रोजगार की आस में यहां आ गए हैं। सभी मूर्ति बनाने का ही काम करते हैं। एक से लेकर आठ फुट तक की मूर्ति तैयार की जाती है। विशेष रूप से गणेश चतुर्थी पर अधिक काम मिलता है लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और कच्चे माल की कीमतें भीं। लिहाजा कमाई कम हो गई है। उन्होंने बताया कि भगवान ही घर का खर्च चलाते हैं और उनके आशीर्वाद से ही उन्हें यह कला मिली है। इससे ही पेट भरता है।