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Kathua News: श्रद्धालुओं को हर प्राणी से प्रेम करने की नसीहत दी
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कठुआ। कंडी क्षेत्र के बुद्धि गांव में जारी रूद्र महायज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार को दिन के दूसरे सत्र में जारी शिवकथा के दौरान पंडित मनोहर लाल शास्त्री ने अपने जीवन को शांतिमय और सुखमय बनाने के लिए श्रद्धालुओं को हर प्राणी से प्रेम करने के साथ छल न करने की नसीहत दी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में हर मानव दूसरे को अपना शत्रु समझ रहा है और इसी से समाज में अशांति व्याप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संसार में बैर से बैर कभी शांत नहीं होता है, शत्रुता से शत्रुता समाप्त नहीं होती और क्रोध से क्रोध समाप्त नहीं होता है। यह सब जितना ही हमारे अंदर बढ़ता जाता है, उतना ही हम अपने हाथों अपने चारों तरफ नर्क निर्मित करते चले जाते हैं।
शास्त्री ने कहा कि नर्क कहीं और नहीं है, शत्रुता में जीना ही नर्क है। हम जितनी बड़ी शत्रुता अपने चारों ओर बनाते हैं, हमारा नर्क उतना ही बड़ा हो जाता है। इसके विपरीत हम जितनी बड़ी मित्रता अपने चारों ओर बनाते हैं, उतना ही बड़ा स्वर्ग हमारे आसपास निर्मित हो जाता है।
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दरअसल स्वर्ग और नर्क कोई भौगोलिक स्थानों का नाम नहीं है या मनोदशा है। मित्रता के भाव और मित्रों के बीच जीने का नाम ही स्वर्ग है और शत्रुता का भाव शत्रुओं के बीच जीने का नाम नर्क है।
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उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में हर मानव दूसरे को अपना शत्रु समझ रहा है और इसी से समाज में अशांति व्याप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संसार में बैर से बैर कभी शांत नहीं होता है, शत्रुता से शत्रुता समाप्त नहीं होती और क्रोध से क्रोध समाप्त नहीं होता है। यह सब जितना ही हमारे अंदर बढ़ता जाता है, उतना ही हम अपने हाथों अपने चारों तरफ नर्क निर्मित करते चले जाते हैं।
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शास्त्री ने कहा कि नर्क कहीं और नहीं है, शत्रुता में जीना ही नर्क है। हम जितनी बड़ी शत्रुता अपने चारों ओर बनाते हैं, हमारा नर्क उतना ही बड़ा हो जाता है। इसके विपरीत हम जितनी बड़ी मित्रता अपने चारों ओर बनाते हैं, उतना ही बड़ा स्वर्ग हमारे आसपास निर्मित हो जाता है।
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दरअसल स्वर्ग और नर्क कोई भौगोलिक स्थानों का नाम नहीं है या मनोदशा है। मित्रता के भाव और मित्रों के बीच जीने का नाम ही स्वर्ग है और शत्रुता का भाव शत्रुओं के बीच जीने का नाम नर्क है।