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Kathua News: संगत को बारह ज्योतिर्लिंगों की कथा सुनाई
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कठुआ। कृष्णा कॉलोनी स्थित महाकालेश्वर शिवदुर्गा मंदिर में शिव महापुराण कथा जारी है। दूसरे दिन कथा वाचक मनोहर लाल शास्त्री से संगत को बारह ज्योतिर्लिंगों की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जो भी भक्त एक बार अपने जीवन में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करता है, वह जीवन के सभी दुखों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव कल्याणकारी हैं। जो एक बार भी इनकी शरण में आ जाए, उससे सदा अपने मस्तक पर धारण कर लेते हैं। जिस प्रकार से चंद्रमा उनके मस्तक पर शोभायमान है। शिव महापुराण की कथा मानव जाति को सुख समृद्धि व आनंद देने वाली है क्योंकि भगवान भूतों के अधीश्वर साक्षात परमात्मा हैं, जो समस्त जीवों को आत्म ज्ञान देकर ईश्वर से जुड़ने की कला सिखाते हैं।
उन्होंने भक्तों को हमेशा सत्संग करने के लिए प्रेरित करते हुए एक प्रसंग का वर्णन किया। इसमें भगवान शिव भी सत्संग का महत्व मां पार्वती को बताते हुए कहते हैं कि उसकी विद्या, धन, बल, भाग्य सब कुछ निरर्थक है, जिसे जीवन में संत की प्राप्ति नहीं हुई। वास्तव में सत्संग किसे कहते हैं, इसे हमें जानना होगा। सत्संग दो शब्दों के जोड़ से मिलकर बना है। यह शब्द हमें सत्य यानी परमात्मा और संग अर्थात मिलन की ओर इंगित करता है। परमात्मा से मिलन के लिए संत एक मध्यस्थ है, इसलिए हमें जीवन में पूर्ण संत की खोज में अग्रसर होना चाहिए, जो हमारा मिलाप परमात्मा से करवा दे।
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उन्होंने कहा कि भगवान शिव कल्याणकारी हैं। जो एक बार भी इनकी शरण में आ जाए, उससे सदा अपने मस्तक पर धारण कर लेते हैं। जिस प्रकार से चंद्रमा उनके मस्तक पर शोभायमान है। शिव महापुराण की कथा मानव जाति को सुख समृद्धि व आनंद देने वाली है क्योंकि भगवान भूतों के अधीश्वर साक्षात परमात्मा हैं, जो समस्त जीवों को आत्म ज्ञान देकर ईश्वर से जुड़ने की कला सिखाते हैं।
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उन्होंने भक्तों को हमेशा सत्संग करने के लिए प्रेरित करते हुए एक प्रसंग का वर्णन किया। इसमें भगवान शिव भी सत्संग का महत्व मां पार्वती को बताते हुए कहते हैं कि उसकी विद्या, धन, बल, भाग्य सब कुछ निरर्थक है, जिसे जीवन में संत की प्राप्ति नहीं हुई। वास्तव में सत्संग किसे कहते हैं, इसे हमें जानना होगा। सत्संग दो शब्दों के जोड़ से मिलकर बना है। यह शब्द हमें सत्य यानी परमात्मा और संग अर्थात मिलन की ओर इंगित करता है। परमात्मा से मिलन के लिए संत एक मध्यस्थ है, इसलिए हमें जीवन में पूर्ण संत की खोज में अग्रसर होना चाहिए, जो हमारा मिलाप परमात्मा से करवा दे।
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