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Kathua News: धर्म के अनुसरण से होगी मोक्ष की प्राप्ति
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कठुआ। शहर से सटे पल्ली गांव में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कथावाचक सुभाष शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने प्रवचनों से निहाल किया। इस दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे भजनों पर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रगुग्ध दिखाई दिए।
उन्होंने कहा कि कलयुग में सत्संग ही हमारा सच्चा साथी है क्योंकि कलयुग में पापों ने सब धर्मों को निगल लिया है। सब ग्रंथ लुप्त हो गए हैं क्योंकि दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर बहुत से पंथ बना दिए हैं। इसने आज आम आदमी को सत्य से दूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि कलयुग में माता-पिता बच्चों को वही धर्म सीखाते हैं, जिसमें केवल सांसारिक साधन एकत्रित हो सकें, जबकि हमें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार अपने सनातन धर्म की शिक्षा ही देनी चाहिए।
उन्होंने समझाया कि अच्छी प्रकार से आचरण किए हुए दूसरे के धर्म से गुण रहित अपना धर्म अति उत्तम है। अपने धर्म में मरना भी कल्याण कारक है, जबकि दूसरे का धर्म भय देने वाला है। जैसे पतिव्रता स्त्री पति को ही सर्वस्व मानकर उसी का चिंतन करती है। उसी प्रकार हमें परमेश्वर को ही सर्वश्रेष्ठ मानकर उसी का चिंतन करते हुए उसकी आज्ञा के अनुसार मन, वाणी और शरीर से परमेश्वर के लिए स्वाभाविक कर्तव्य कर्म का आचरण करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि कलयुग में सत्संग ही हमारा सच्चा साथी है क्योंकि कलयुग में पापों ने सब धर्मों को निगल लिया है। सब ग्रंथ लुप्त हो गए हैं क्योंकि दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर बहुत से पंथ बना दिए हैं। इसने आज आम आदमी को सत्य से दूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि कलयुग में माता-पिता बच्चों को वही धर्म सीखाते हैं, जिसमें केवल सांसारिक साधन एकत्रित हो सकें, जबकि हमें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार अपने सनातन धर्म की शिक्षा ही देनी चाहिए।
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उन्होंने समझाया कि अच्छी प्रकार से आचरण किए हुए दूसरे के धर्म से गुण रहित अपना धर्म अति उत्तम है। अपने धर्म में मरना भी कल्याण कारक है, जबकि दूसरे का धर्म भय देने वाला है। जैसे पतिव्रता स्त्री पति को ही सर्वस्व मानकर उसी का चिंतन करती है। उसी प्रकार हमें परमेश्वर को ही सर्वश्रेष्ठ मानकर उसी का चिंतन करते हुए उसकी आज्ञा के अनुसार मन, वाणी और शरीर से परमेश्वर के लिए स्वाभाविक कर्तव्य कर्म का आचरण करना चाहिए।
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