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Kathua News: बिलावर को जिला बनाने की मांग की उपेक्षा पर फूटा गुस्सा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलावर। बिलावर को जिले का दर्जा दिलाने की 25 वर्ष पुरानी मांग को लेकर जिला आंदोलन कमेटी ने संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया है। रविवार को बिलावर में आयोजित कमेटी की अहम बैठक में आगामी 21 नवंबर को प्रस्तावित महारैली की रूपरेखा और तैयारियों पर गहन विचार-विमर्श कर ठोस रणनीति बनाई गई।
इस दौरान स्थानीय निवासियों ने सरकार के उदासीन रवैये पर गहरा रोष जताया और आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का संकल्प लिया।
जिला आंदोलन कमेटी के संयोजक हरि चंद जलमेरिया ने कहा कि कमेटी पिछले ढाई दशकों से निरंतर संघर्षरत है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर बिलावर की हमेशा अनदेखी की गई।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1978 में जब कश्मीर घाटी में तीन नए जिले बनाए गए। तब भी बिलावर को नजरअंदाज किया गया। इसके बाद वर्ष 2006 में जम्मू-कश्मीर में आठ नए जिलों के गठन के दौरान भी क्षेत्र की उपेक्षा हुई।
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यहां तक कि हाल ही में लद्दाख में पांच नए जिलों की घोषणा के बाद भी बिलावर का दावा दरकिनार कर दिया गया। जलमेरिया ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार बिलावर को विधिवत जिले का दर्जा नहीं दे देती, तब तक यह आंदोलन पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा। बैठक में मौजूद गणमान्य नागरिकों ने आगामी महारैली को ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एडवोकेट जितेंद्र सिंह भड़वाल, अमरनाथ ठाकुर, सुमित वर्मा सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखकर जिला घोषित करने की मांग रखी। सम्ो अविलंब जिलाने की मांग की।
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बिलावर। बिलावर को जिले का दर्जा दिलाने की 25 वर्ष पुरानी मांग को लेकर जिला आंदोलन कमेटी ने संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया है। रविवार को बिलावर में आयोजित कमेटी की अहम बैठक में आगामी 21 नवंबर को प्रस्तावित महारैली की रूपरेखा और तैयारियों पर गहन विचार-विमर्श कर ठोस रणनीति बनाई गई।
इस दौरान स्थानीय निवासियों ने सरकार के उदासीन रवैये पर गहरा रोष जताया और आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का संकल्प लिया।
जिला आंदोलन कमेटी के संयोजक हरि चंद जलमेरिया ने कहा कि कमेटी पिछले ढाई दशकों से निरंतर संघर्षरत है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर बिलावर की हमेशा अनदेखी की गई।
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उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1978 में जब कश्मीर घाटी में तीन नए जिले बनाए गए। तब भी बिलावर को नजरअंदाज किया गया। इसके बाद वर्ष 2006 में जम्मू-कश्मीर में आठ नए जिलों के गठन के दौरान भी क्षेत्र की उपेक्षा हुई।
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यहां तक कि हाल ही में लद्दाख में पांच नए जिलों की घोषणा के बाद भी बिलावर का दावा दरकिनार कर दिया गया। जलमेरिया ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार बिलावर को विधिवत जिले का दर्जा नहीं दे देती, तब तक यह आंदोलन पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा। बैठक में मौजूद गणमान्य नागरिकों ने आगामी महारैली को ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एडवोकेट जितेंद्र सिंह भड़वाल, अमरनाथ ठाकुर, सुमित वर्मा सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखकर जिला घोषित करने की मांग रखी। सम्ो अविलंब जिलाने की मांग की।