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Kathua News: ऐरवां शिव मंदिर... जहां गुप्त गंगा से पाताल से लौटे थे ऐरावत
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ऐरवां में सजा शिव मंदिर
हमारे शिवालय का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नगरी परोल के ऐरवां में मौजूद प्राचीन शिव मंदिर चौथी शताब्दी में निर्मित बताया जाता है। यहां महत्वपूर्ण तिथियों पर जहां स्नान के लिए लोग उमड़ते हैं। वहीं, इसे मिनी हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है।
किवदंती के अनुसार प्रसिद्ध राजा हाथी ऐरावत को इस स्थान पर पुनर्जीवित किया गया था। जब गंगा नदी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाया जा रहा था, तब उसका प्रवाह एक विशाल पर्वत से अवरुद्ध हो गया था। इस बाधा को हटाने के लिए भगवान इंद्र के हाथी ऐरावत की जरूरत थी। ऐरावत ने बाधा को हटाने के बाद गर्वित होकर कहा कि गंगा का प्रवाह उसकी आशीर्वाद से हुआ है। गंगा ने यह सुनकर उसे सबक सिखाने के लिए अपनी धारा को बढ़ा दिया और ऐरावत को पाताल लोक में बहा दिया।
भगवान इंद्र ने भगवान शिव की तपस्या की और उन्हें आशीर्वाद मिला कि ऐरावत गुप्त गंगा से वापस आ जाएगा। ऐतिहासिक साहित्य के अनुसार, यह मंदिर राजा विक्रमादित्य की ओर से चौथी शताब्दी में बनाया गया था। एक अन्य किंवदंती के अनुसार एक अनाम भक्त को भगवान शिव ने सपने में दर्शन देकर एरवान में एक स्थान की खोदाई करने को कहा, जहां उन्हें एक दिव्य शिवलिंग मिला और वहां मंदिर का निर्माण हुआ। यहां आज भी गुप्त गंगा मानी जाती है। मंदिर की देखरेख वर्तमान में प्रशासन कर रहा है।
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कठुआ। नगरी परोल के ऐरवां में मौजूद प्राचीन शिव मंदिर चौथी शताब्दी में निर्मित बताया जाता है। यहां महत्वपूर्ण तिथियों पर जहां स्नान के लिए लोग उमड़ते हैं। वहीं, इसे मिनी हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है।
किवदंती के अनुसार प्रसिद्ध राजा हाथी ऐरावत को इस स्थान पर पुनर्जीवित किया गया था। जब गंगा नदी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाया जा रहा था, तब उसका प्रवाह एक विशाल पर्वत से अवरुद्ध हो गया था। इस बाधा को हटाने के लिए भगवान इंद्र के हाथी ऐरावत की जरूरत थी। ऐरावत ने बाधा को हटाने के बाद गर्वित होकर कहा कि गंगा का प्रवाह उसकी आशीर्वाद से हुआ है। गंगा ने यह सुनकर उसे सबक सिखाने के लिए अपनी धारा को बढ़ा दिया और ऐरावत को पाताल लोक में बहा दिया।
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भगवान इंद्र ने भगवान शिव की तपस्या की और उन्हें आशीर्वाद मिला कि ऐरावत गुप्त गंगा से वापस आ जाएगा। ऐतिहासिक साहित्य के अनुसार, यह मंदिर राजा विक्रमादित्य की ओर से चौथी शताब्दी में बनाया गया था। एक अन्य किंवदंती के अनुसार एक अनाम भक्त को भगवान शिव ने सपने में दर्शन देकर एरवान में एक स्थान की खोदाई करने को कहा, जहां उन्हें एक दिव्य शिवलिंग मिला और वहां मंदिर का निर्माण हुआ। यहां आज भी गुप्त गंगा मानी जाती है। मंदिर की देखरेख वर्तमान में प्रशासन कर रहा है।
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