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औद्योगिक क्षेत्र परियोजना को हरी झंडी
Kathua
Updated Thu, 02 May 2013 05:30 AM IST
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कठुआ। लंबे अरसे से अधर में लटकी घाटी औद्योगिक क्षेत्र परियोजना को रफ्तार मिलने जा रही है। स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिडको) के अधीन निर्माणाधीन घाटी औद्योगिक क्षेत्र को वन एवं पर्यावरण की क्लियरेंस मिल गई है। सिडको प्रशासन ने अब इस नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए इकाइयां स्थापित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।
सिडको के सूत्रों ने बताया कि कठुआ के घाटी क्षेत्र में साढ़े तीन हजार कनाल से भी अधिक भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। जिले में औद्योगिक विकास के लिहाज से यह महत्वाकांक्षी परियोजना है, लेकिन उज्ज दरिया के दूसरे छोर पर वन्य जीव अभ्यारण्य सहित वन क्षेत्र होने के चलते यह मामला अधर में लटक गया। सिडको को वन विभाग की क्लियरेंस की इंतजार था, जो परवान चढ़ने से अब औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देना मुमकिन हो सकेगा। सिडको के प्रबंध निदेशक मोहम्मद मोइजम के अनुसार घाटी औद्योगिक क्षेत्र में इकाइयों को स्थापित करने की अनुमति मिल गई है। उन्होंने बताया कि सिडको के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में ग्रीन और आरेंज श्रेणी की इकाईयों को चलाने की अनुमति मिली है।
सिडको सुनिश्चित करेगा कि औद्योगिक गतिविधियों से प्रदूषण की समस्या न पनप सके। घाटी में मुख्य तौर पर खाद्य प्रसंस्करण की इकाईयों को प्राथमिकता देने की योजना है। उल्लेखनीय है कि घाटी औद्योगिक क्षेत्र परियोजना शुरूआत से ही विवाद में रही है। घाटी पंचायत सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाते रहे हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार उनकी जमीन को औने पौने दाम पर हथियाया गया है। इसी तरह से ग्रामीणों ने सरकारी भूमि के मालिकाना हक हासिल करने के लिए रोशनी एक्ट के तहत आवेदन किए थे, लेकिन इससे पूर्व ही भूमि अधिग्रहण कर लिया गया, जिससे उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला। उधर पर्यावरण को लेकर बनी चिंता से भी घाटी औद्योगिक क्षेत्र की परियोजना को गतिरोध का सामना करना पड़ा।
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सिडको के सूत्रों ने बताया कि कठुआ के घाटी क्षेत्र में साढ़े तीन हजार कनाल से भी अधिक भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। जिले में औद्योगिक विकास के लिहाज से यह महत्वाकांक्षी परियोजना है, लेकिन उज्ज दरिया के दूसरे छोर पर वन्य जीव अभ्यारण्य सहित वन क्षेत्र होने के चलते यह मामला अधर में लटक गया। सिडको को वन विभाग की क्लियरेंस की इंतजार था, जो परवान चढ़ने से अब औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देना मुमकिन हो सकेगा। सिडको के प्रबंध निदेशक मोहम्मद मोइजम के अनुसार घाटी औद्योगिक क्षेत्र में इकाइयों को स्थापित करने की अनुमति मिल गई है। उन्होंने बताया कि सिडको के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में ग्रीन और आरेंज श्रेणी की इकाईयों को चलाने की अनुमति मिली है।
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सिडको सुनिश्चित करेगा कि औद्योगिक गतिविधियों से प्रदूषण की समस्या न पनप सके। घाटी में मुख्य तौर पर खाद्य प्रसंस्करण की इकाईयों को प्राथमिकता देने की योजना है। उल्लेखनीय है कि घाटी औद्योगिक क्षेत्र परियोजना शुरूआत से ही विवाद में रही है। घाटी पंचायत सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाते रहे हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार उनकी जमीन को औने पौने दाम पर हथियाया गया है। इसी तरह से ग्रामीणों ने सरकारी भूमि के मालिकाना हक हासिल करने के लिए रोशनी एक्ट के तहत आवेदन किए थे, लेकिन इससे पूर्व ही भूमि अधिग्रहण कर लिया गया, जिससे उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला। उधर पर्यावरण को लेकर बनी चिंता से भी घाटी औद्योगिक क्षेत्र की परियोजना को गतिरोध का सामना करना पड़ा।