कब तक शहीद होंगे जवान, रिटायर्ड कर्नल बोले- पहले चेतावनी दो, बाहर नहीं आते तो घर उड़ा दो
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हंदवाड़ा में भारतीय सेना के चार जवानों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर की शहादत पर देश के पूर्व सैन्यकर्मियों का कहना है कि कश्मीर में आतंकी हमलों से निपटने की रणनीति में बदलाव जरूरी है। सेना को राजनीति से दूर रखकर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
इस संबंध में रिटायर्ड कर्नल वीके साही ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि यदि कहीं कोई आतंकी किसी घर में पनाह लिए हुए है या लोगों को बंधक बना रखा है तो सबसे पहले वहां मौजूद लोगों को चेतावनी देकर बाहर आने के लिए कहा जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो उस जगह को विस्फोट से उड़ा देना चाहिए। इसी से आतंकियों को पनाह मिलना बंद होगा।
उन्होंंने सवाल किया कि आखिर कब तक बंदी बनाने के नाम पर आतंकियों को पनाह मिलती रहेगी और इन्हें बचाने के नाम पर जवान शहीद होते रहेंगे? कश्मीर में आतंकियों को स्थानीय स्तर पर पनाह मिलती है। जिसकी आड़ में वे छुप जाते हैं और फिर लोगों को बंधक बनाने के नाम पर सुरक्षा बलों के अंदर आते ही हमला बोल देते हैं।
इस साल मारे गए 62 आतंकी
इस साल जनवरी से अब तक जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में हुई मुठभेड़ में 62 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। लॉकडाउन के दौरान आतंकियों की ओर से सीमा पार से लगातार घुसपैठ की कोशिशें हो रही हैं।