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अस्पताल स्टाफ के साथ की मारपीट, दो कर्मचारी घायल
Updated Tue, 12 Dec 2017 01:13 AM IST
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कठुआ।
उपजिला अस्पताल परोल में रविवार की रात एक व्यक्ति द्वारा स्टाफ सदस्यों के साथ मारपीट करने के विरोध में अस्पताल स्टाफ सदस्यों ने सोमवार को कामकाज ठप कर धरना दिया। धरने में अस्पताल के सभी स्टाफ सदस्य शामिल हुए और अस्पताल में कर्मचारियों की सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्हें तीन दिन के भीतर सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई, तो वह हड़ताल कर देंगे। मारपीट के दौरान अस्पताल के दो कर्मचारी घायल हुए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल कठुआ रेफर कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों में शामिल डॉ. इत्तु शर्मा ने बताया कि रात को रोस्टर के हिसाब से उनकी ड्यूूटी थी। करीब 11 बजे सड़क हादसे में घायल तरुण अस्पताल पहुंचा। उसके साथ उसकी मां भी थीं। तरुण का उन्होंने उपचार दिया और उसे इंजेक्शन लगाने के लिए फार्मासिस्ट को कहा। साथ ही पुलिस को सड़क हादसे की सूचना देने के लिए फोन किया। जैसे ही उन्होंने फोन किया, तो तरुण ने पहले तो प्रिसक्रिप्शन फाड़ी और उसके साथ ही गालीगलौज करने लगा। जब फार्मासिस्ट दयाराम ने उसे ऐसा करने से मना किया तो वह उसके साथ मारपीट करने लगा। मामला बढ़ा तो ड्रेसर त्रिलोक राज ने तरुण को रोकने का प्रयास किया और अस्पताल का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया, लेकिन तरुण ने दरवाजे की कुंडी तोड़ दी और मारपीट करने लगा। उसने दोनों कर्मचारियों की लात, घूसों से पिटाई की। रास्ते में जा रहे एक व्यक्ति ने जब यह सब देखा तो उसने तरुण को किसी तरह रोका। इतने में पुलिस भी मौके पर आ चुकी थी और तरुण को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारियों में शामिल डॉ. सचिन ने कहा कि रात के समय छह स्टाफ मौजूद थे। तरुण नगरी परोल का रहने वाला है और ऐरवां मोड़ के पास सड़क हादसे में घायल हुआ था। उसने जिस प्रकार का व्यवहार किया, इसे सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि रात के समय महिला डाक्टर और महिला स्टाफ कर्मचारी भी होते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जानी चाहिए। डॉ. सचिन ने बताया कि वह विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले से लिखित में अवगत करवा चुके हैं। एसएसपी से भी उन्होंने बात की है। यदि तीन दिन में उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई, तो वे काम बंद कर देंगे। इधर, पुलिस ने तरुण पर आरपीसी की धारा 353, 332, 504, 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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उपजिला अस्पताल परोल में रविवार की रात एक व्यक्ति द्वारा स्टाफ सदस्यों के साथ मारपीट करने के विरोध में अस्पताल स्टाफ सदस्यों ने सोमवार को कामकाज ठप कर धरना दिया। धरने में अस्पताल के सभी स्टाफ सदस्य शामिल हुए और अस्पताल में कर्मचारियों की सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्हें तीन दिन के भीतर सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई, तो वह हड़ताल कर देंगे। मारपीट के दौरान अस्पताल के दो कर्मचारी घायल हुए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल कठुआ रेफर कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों में शामिल डॉ. इत्तु शर्मा ने बताया कि रात को रोस्टर के हिसाब से उनकी ड्यूूटी थी। करीब 11 बजे सड़क हादसे में घायल तरुण अस्पताल पहुंचा। उसके साथ उसकी मां भी थीं। तरुण का उन्होंने उपचार दिया और उसे इंजेक्शन लगाने के लिए फार्मासिस्ट को कहा। साथ ही पुलिस को सड़क हादसे की सूचना देने के लिए फोन किया। जैसे ही उन्होंने फोन किया, तो तरुण ने पहले तो प्रिसक्रिप्शन फाड़ी और उसके साथ ही गालीगलौज करने लगा। जब फार्मासिस्ट दयाराम ने उसे ऐसा करने से मना किया तो वह उसके साथ मारपीट करने लगा। मामला बढ़ा तो ड्रेसर त्रिलोक राज ने तरुण को रोकने का प्रयास किया और अस्पताल का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया, लेकिन तरुण ने दरवाजे की कुंडी तोड़ दी और मारपीट करने लगा। उसने दोनों कर्मचारियों की लात, घूसों से पिटाई की। रास्ते में जा रहे एक व्यक्ति ने जब यह सब देखा तो उसने तरुण को किसी तरह रोका। इतने में पुलिस भी मौके पर आ चुकी थी और तरुण को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल डॉ. सचिन ने कहा कि रात के समय छह स्टाफ मौजूद थे। तरुण नगरी परोल का रहने वाला है और ऐरवां मोड़ के पास सड़क हादसे में घायल हुआ था। उसने जिस प्रकार का व्यवहार किया, इसे सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि रात के समय महिला डाक्टर और महिला स्टाफ कर्मचारी भी होते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जानी चाहिए। डॉ. सचिन ने बताया कि वह विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले से लिखित में अवगत करवा चुके हैं। एसएसपी से भी उन्होंने बात की है। यदि तीन दिन में उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई, तो वे काम बंद कर देंगे। इधर, पुलिस ने तरुण पर आरपीसी की धारा 353, 332, 504, 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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