{"_id":"58eb5b1c4f1c1b333bcf5174","slug":"father-initiated-jain-dharam-with-son","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बेटे ने पिता को बनाया अपना शिष्य और दी नई पहचान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बेटे ने पिता को बनाया अपना शिष्य और दी नई पहचान
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 10 Apr 2017 04:37 PM IST
विज्ञापन
जैन धर्म की दीक्षा
घटना अनोखी है। एक बेटे ने अपने पिता को नया नाम दिया है। यह पिता अब अपने बेटे का शिष्य बनकर अपनी बाकी जिन्दगी जीएंगे।
मामला राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले का है। यहां कुंडलपुर में महावीर जयंती के मौके पर रविवार को एक पिता ने अपने पुत्र को अपना गुरु स्वीकार किया। यहां 21 साल पहले आचार्य सुनील सागर महाराज ने जैन धर्म की दीक्षा ली थी। महावीर जयंती पर उनके पिता भागचंद ने भी दीक्षा ली। खास बात यह रही कि उन्होंने ये दीक्षा अपने बेटे सुनील सागर महाराज से ली। यानि अब भागचन्द अपने पुत्र के शिष्य बन कर रहेंगे।
भागचंद ने बताया कि 21 साल पहले आचार्य संमति सागर महाराज ने उनके बेटे सुनील को दीक्षा दी थी। महाराष्ट्र के दमोह के रहने वाले भागचंद अपने बेटे के धर्म की शिक्षाएं देने से इतने प्रेरित हुए कि उन्हें भी लगा कि वे भी उसी मार्ग पर चल पड़े। आचार्य सुनील सागर ने पिता भागचंद को दीक्षा के बाद शुलक सुखद सागर नाम दिया। इस अवसर पर छह अन्य लोगों को भी दीक्षा दी गई।
विज्ञापन
मामला राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले का है। यहां कुंडलपुर में महावीर जयंती के मौके पर रविवार को एक पिता ने अपने पुत्र को अपना गुरु स्वीकार किया। यहां 21 साल पहले आचार्य सुनील सागर महाराज ने जैन धर्म की दीक्षा ली थी। महावीर जयंती पर उनके पिता भागचंद ने भी दीक्षा ली। खास बात यह रही कि उन्होंने ये दीक्षा अपने बेटे सुनील सागर महाराज से ली। यानि अब भागचन्द अपने पुत्र के शिष्य बन कर रहेंगे।
भागचंद ने बताया कि 21 साल पहले आचार्य संमति सागर महाराज ने उनके बेटे सुनील को दीक्षा दी थी। महाराष्ट्र के दमोह के रहने वाले भागचंद अपने बेटे के धर्म की शिक्षाएं देने से इतने प्रेरित हुए कि उन्हें भी लगा कि वे भी उसी मार्ग पर चल पड़े। आचार्य सुनील सागर ने पिता भागचंद को दीक्षा के बाद शुलक सुखद सागर नाम दिया। इस अवसर पर छह अन्य लोगों को भी दीक्षा दी गई।
विज्ञापन