Seat Ka Samikaran: नवादा विधानसभा सीट पर रहा है दो यादव परिवारों का दबदबा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात नवादा सीट की करेंगे। नवादा सीट से मौजूदा समय में राजद की विभा देवी विधायक हैं।
विस्तार
बिहार में साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। चुनाव के पहले ही बिहार में सियासी हलचल देखने को मिल रही है। पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों बिहार में वोटर अधिकार यात्रा कर रहे हैं। इस सियासी हलचल के बीच अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज नवादा सीट की बात करेंगे। इस सीट से गायत्री देवी और राज बल्लभ यादव के परिवार के सदस्य पांच-पांच बार विधायक रहे हैं। वर्तमान में राज बल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी यहां से विधायक हैं।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला नवादा भी है। नवादा जिला दो अनुमंडल और 14 ब्लॉक में बंटा है। जिले में पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें रजौली, हिसुआ, नवादा, गोविंदपुर, वारिसलीगंज शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में नवादा सीट की बात करेंगे। यह सीट 1952 में अस्तित्व में आई।
1952: दो विधायक पहुंचे विधानसभा
1952 के चुनाव में नवादा विधानसभा सीट से दो विधायक चुने गए। दोनों विधायक कांग्रेस के थे। जो दो चेहरे विधानसभा पहुंचे उनमें राम किशुन सिंह और शक्ति कुमार शामिल थे।
1957: कांग्रेस को मिली जीत
1957 के चुनाव में नवादा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मंजूर अहमद को जीत मिली। इस चुनाव में उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टेक नारायण प्रसाद यादव को मात्र 643 वोट से हराया। मजूर अहमद को कुल 8,015 वोट मिले। वहीं, टेक नारायण प्रसाद यादव को 7,372 वोट मिले।
1959: उपचुनाव में जीते मंजूर अहमद
1959 में नवादा सीट से उपचुनाव हुए। इस चुनाव में फिर से मंजूर अहमद को जीत मिली। मजूर अहमद को कुल 10,236 वोट मिले थे।
1962: जनसंघ को मिली जीत
1962 के चुनाव में नवाजा सीट से जनसंघ के गौरीशंकर केसरी को जीत मिली। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सलाहुद्दीन खान को 614 वोट से हराया। गौरीशंकर केसरी को 14,730 वोट मिले। वहीं, सलाहुद्दीन खान को 14,116 वोट मिले।
1967: कांग्रेस को मिली जीत
1967 के चुनाव में कांग्रेस के आरएसपी यादव को 3,160 वोट से जीत मिली। इस चुनाव में तत्कालीन विधायक और जनसंघ के उम्मीदवार गौरीशंकर दूसरे नंबर पर रहे। आरएसपी यादव को कुल 18,124 वोट मिले। वहीं, गौरीशंकर को 14,964 वोट मिले।
1969: जनसंघ की वापसी
1969 के चुनाव में जनसंघ के गौरीशंकर ने वापसी की। इस चुनाव में उन्होंने भाकपा के गणेश शंकर विद्यार्थी को 2,802 वोट से हराया। गौरी शंकर को 20,840 वोट मिले। वहीं, गणेश शंकर को 18,038 वोट मिले।
1972: गायत्री देवी को मिली जीत
1972 के चुनाव में नवादा सीट से कांग्रेस की गायत्री देवी को जीत मिली। वहीं कांग्रेस (ओ) के बिंदेश्वरी सिंह दूसरे नंबर पर रहे। गायत्री देवी को कुल 33,123 वोट मिले। वहीं, बिंदेश्वरी सिंह को 29,247 वोट मिले।

1977: भाकपा को मिली जीत
- 1977 के चुनाव में नवादा सीट से भाकपा के गणेश शंकर विद्यार्थी को 39,446 वोट से जीत मिली। वहीं, दूसरे नंबर निर्दलीय जेहल प्रसाद रहे। गणेश शंकर को कुल 51,857 वोट मिले। वहीं, जेहल प्रसाद को 12,411 वोट मिले।
- 1980 के चुनाव में भाकपा के गणेश शंकर विद्यार्थी दूसरी बार विधायक बने। उन्होंने कांग्रेस के रामेश्वरम यादव को 13,899 वोट से हराया। गणेश शंकर को कुल 39,681 वोट मिले। वहीं, रामेश्वरम यादव को 25,782 वोट मिले।
1985: कांग्रेस के नरेंद्र कुमार को मिली जीत
1985 के चुनाव में कांग्रेस के नरेंद्र कुमार ने 2,669 वोट से जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा के एम कृष्ण प्रसाद दूसरे नंबर पर रहे। नरेंद्र प्रसाद को कुल 46,992 वोट मिले। वहीं, एम कृष्ण प्रसाद 44,323 वोट मिले।
1990: भाजपा को मिली पहली जीत
1990 के चुनाव में नवादा सीट से कृष्ण प्रसाद ने भाजपा को पहली जीत दिलाई। उन्होंने तात्कालीन विधायक नरेंद्र कुमार को 14,694 वोट से हराया। कृष्णा प्रसाद को कुल 57,374 वोट मिले। वहीं, नरेंद्र कुमार को 42,680 वोट मिले।

1995: कृष्ण प्रसाद के भाई को मिली जीत
- 1995 में कृष्ण प्रसाद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इसके बाद उनके भाई राज बल्लभ प्रसाद ने उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ते हुए नवादा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने गायत्री देवी के बेटे और कांग्रेस के उम्मीदवार कौशल यादव को 27,357 वोट से शिकस्त दी। राज बल्लभ प्रसाद को 47,825 वोट मिले। वहीं कौशल यादव को मात्र 20, 468 वोट मिले।
- 2000 में राजबल्लभ प्रसाद राजद से चुनाव लड़े और बड़ी जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार शत्रुघ्न प्रसाद सिंह को 51,402 वोट से हराया। राजबल्लभ प्रसाद को 1,06,614 वोट मिले। वहीं, शत्रुघ्न प्रसाद को 55,212 वोट मिले।
फरवरी 2005: पूर्णिमा यादव बनी विधायक
- फरवरी 2005 में निर्दलीय उम्मीदवार और कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव नवादा सीट से विधायक बनी। उन्होंने अक्तूबर 2005 और 2010 में भी जीत दर्ज की और तीनों चुनाव में दो बार के विधायक और राजद उम्मीदवार राज बल्लभ दूसरे नंबर पर रहे। फरवरी 2005 में उन्होंने 10,081 वोट से हराया। वहीं, अक्तूबर 2005 में उन्होंने राज बल्लभ प्रसाद को 2004 वोट से हराया।
- 2010 के चुनाव में पूर्णिमा यादव ने जदयू के टिकट से अपनी किस्मत आजमाई और जीत हासिल की। इस चुनाव मेंं उन्होंने राजबल्लभ यादव को 6,337 वोट से हराया।
2015: राजबल्लभ प्रसाद की वापसी
- लगातार तीन चुनाव में हार का सामना कर चुके राजबल्लभ प्रसाद ने 2015 में वापसी की। उन्होंने बीएलएसपी के इंद्रदेव प्रसाद को 16,726 वोट से हराया। राज बल्लभ प्रसाद को कुल 88,235 वोट मिले। वहीं, इंद्रदेव को 71,509 वोट मिले।
- साल 2016 में विधायक राजबल्लभ यादव पर एक नाबालिग लड़की ने यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया। आरोप लगते ही पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 14 अगस्त 2025 को पटना हाईकोर्ट ने उन्होंने बरी कर दिया।
- राजबल्लभ यादव के जेल जाने के कारण 2016 में नवादा में उपचुनाव हुए। इस चुनाव में जदयू के कौशल यादव को जीत मिली।
2020: विभा देवी बनी विधायक
2020 में राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी राजद के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरीं और जीत हासिल की। वहीं, इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार श्रवण कुमार दूसरे नंबर पर रहे। विभा देवी को कुल 72,435 और शरवन कुमार 46,125 वोट मिले।
सीट का समीकरण सीरीज की सभी खबरें यहां पढ़ें
- सीट का समीकरण: ट्रेन के एक सफर के चलते डीएसपी की जगह नेता बने रामविलास, अलौली ने पासवान को ऐसे बनाया ‘पारस’
- सीट का समीकरण: पांच दिन के मुख्यमंत्री से मौजूदा डिप्टी सीएम तक यहां से जीते, ऐसा है परबत्ता सीट का इतिहास
- सीट का समीकरण: लालू यादव परिवार का गढ़ है राघोपुर, पिछले नौ में से सात चुनाव उनके कुनबे के ही नाम रहा
- सीट का समीकरण: पहले चुनाव में अपनों ने हराया, आठ साल बाद मिली पहली जीत; हरनौत में ऐसे बढ़ा नीतीश की वर्चस्व
- सीट का समीकरण: अर्थशास्त्र के प्रोफेसर से सीएम की कुर्सी तक, कैसे झंझारपुर ने बदली जगन्नाथ मिश्र की किस्म
- सीट का समीकरण: पति-पत्नी ने नौतन में 6 बार दिलाई कांग्रेस को जीत, यहीं से जीत मुख्यमंत्री बने थे केदार पांडे
- सीट का समीकरण: बेतिया से पांचवीं बार जीतकर रेणु देवी बनी थीं उपमुख्यमंत्री, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
- कभी लालू के करीबी का गढ़ थी शिवहर, ऐसा है बहुबली आंनद मोहन के बेटे की सीट का समीकरण
- 1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद यहीं से MLA बने थे कर्पूरी ठाकुर, ऐसा है फुलपरास का इतिहास
- सीट का समीकरण: कभी दुष्कर्मी विधायक तो कभी सुशांत की मौत से चर्चा में आई छातापुर सीट, ऐसा है चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: यहां 11 बार जीता तस्लीमुद्दीन परिवार, 2020 में भाइयों की लड़ाई वाली सीट का ऐसा है इतिहास
- सीट का समीकरण: 18 में 14 बार परसा सीट पर जीता तेज प्रताप यादव के ससुर का परिवार, दरोगा प्रसाद रहे मुख्यमंत्री
- सीट का समीकरण: यहां से कर्पूरी ठाकुर और उनके बेटे दोनों विधानसभा पहुंचे, ऐसा है समस्तीपुर सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: सीट बदलकर तेज प्रताप ने रोका था जदयू की हैट्रिक का रास्ता, ऐसा है हसनपुर सीट का इतिहास
- Seat Ka Samikaran: चकाई सीट पर रहा है दो परिवारों का दबदबा, पार्टियां बदलीं पर 15 में से 13 जीत इन्हीं के नाम
- Seat Ka Samikaran: बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम ने कटिहार को बनाया भाजपा का गढ़, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: पिछले सात चुनाव से दो चेहरों की लड़ाई का केंद्र रही है रुपौली, दोनों का है बाहुबल कनेक्शन
- Seat Ka Samikaran: कोढ़ा से जीतकर बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री बने थे भोला पासवान, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: मुख्यमंत्री-विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं धमदाहा से जीते चेहरे, अब यहां लेशी सिंह का दबदबा
- Seat Ka Samikaran: कभी कांग्रेस के मुख्यमंत्री की सीट रही हाजीपुर, पिछले सात चुनाव से है भाजपा का अभेद्य किला
- Seat Ka Samikaran: यहां से जीते दो चेहरे रहे विधानसभा अध्यक्ष, ऐसा है सीवान सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: यहां से जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं मंत्री विजय चौधरी, ऐसा है सरायरंजन का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: यहां से जो जीता वो एक से ज्यादा बार विधानसभा पहुंचा, ऐसा है भागलपुर सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: दो सीएम और एक डिप्टी सीएम को मिल चुकी सोनपुर से जीत, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: लखीसराय है बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का गढ़, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: इस सीट से जीते दो चेहरे रहे बिहार के मुख्यमंत्री, पिछले आठ चुनाव से है भाजपा का गढ़
- Seat Ka Samikaran: शाहपुर सीट से बिहार को मिला एक CM; इस 'परिवार' का है दबदबा, 17 में नौ चुनाव जीती तीन पीढ़ी
- Seat ka Samikaran: भाजपा का गढ़ रही पटना साहिब सीट, 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया नाम
- Seat Ka Samikaran: इमामगंज से जीत की हैट्रिक लगा चुका मांझी परिवार, JDU नेता के नाम है पांच जीत का रिकॉर्ड
- Seat Ka Samikaran: सहरसा से दो बार चुनाव हारीं लवली आनंद, बिहार के पूर्व वित्त मंत्री यहां से चार बार जीते
- Seat Ka Samikaran: इस सीट पर 2020 में ओलंपियन श्रेयसी ने खोला भाजपा का खाता, ऐसा है जमुई का चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: ओबीसी आरक्षण वाले बीपी मंडल की सीट रही है मधेपुरा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की सीट रही है केवटी, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: पिछले तीन में दो चुनाव रहे जदयू के नाम, ऐसा है वाल्मीकि नगर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: पिछले छह चुनाव से रामनगर में भाजपा का परचम, कभी राजपरिवार से जुड़े चेहरों को मिलती थी जीत
- Seat Ka Samikaran: लौरिया में विनय बिहारी लगा चुके हैं जीत की हैट्रिक, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: नरकटियागंज में परिवार के बीच मुकाबला, सीट पर लंबे समय से काबिज है यह राजघराना
- Seat Ka Samikaran: बिहार के 16वें मुख्यमंत्री की सीट रही है झाझा, पिछले छह में से पांच चुनाव रहे जदयू के नाम
- Seat ka samikaran: यहां एक बार जीती तो फिर अब तक नहीं हारी भाजपा, ऐसा है चनपटिया सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: सिकंदरा विधानसभा सीट पर अब तक नहीं खुला भाजपा-राजद का खाता, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: सिकटा सीट पर लंबे समय तक रहा है दो परिवारों का दबदबा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: वारिसलीगंज में पिछले 25 साल से दो परिवारों के 'बाहुबल' का दबदबा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: आठ बार कांग्रेस तो छह बार भाजपा का रहा रक्सौल सीट पर कब्जा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: यहां 15 में 10 चुनाव रहे एक ही परिवार के नाम, मां-बेटे की लड़ाई का भी गवाह रही गोविंदपुर
- Seat ka Samikaran: सुगौली ने हर चुनाव में बदला विधायक, सिर्फ दो विधायकों को मिला तीन बार मौका