Seat Ka Samikaran: लौरिया में विनय बिहारी लगा चुके हैं जीत की हैट्रिक, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात लौरिया सीट की करेंगे। लौरिया सीट से वर्तमान में भाजपा के विनय बिहारी विधायक हैं।
विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एसआईआर के विरोध और मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर विपक्ष के सांसदों ने सोमवार को संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। सियासी उठापटक के बीच अमर उजाला का खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज लौरिया सीट की बात करेंगे। इस सीट से पिछले दस साल से भाजपा के विनय बिहारी विधायक हैं।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला पश्चिम चंपारण भी है। पश्चिम चंपारण जिला तीन अनुमंडल और 18 ब्लॉक में बंटा है। जिले में नौ विधानसभा सीट हैं। वाल्मिकी नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया, सिकटा शामिल हैं। आज ‘सीट का समीकरण’ में लौरिया सीट की बात करेंगे। लौरिया सीट पर पहली बार 1957 में चुनाव हुआ था।
1957: कांग्रेस को मिली जीत
1957 में लौरिया सीट से कांग्रेस के शुभ नारायण प्रसाद को 9,311 वोट से जीत हासिल की है। वहीं, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के मुस्ताक अहमद दूसरे नंबर पर रहे। शुभ नारायण को कुल 11,084 वोट मिले।
1962 में कांग्रेस के शुभ नारायण लौरिया सीट से जीतकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। इस बार उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सिंहेश्वर प्रसाद वर्मा को 4,302 वोट से हराया। शुभ नारायण को कुल 14,903 वोट मिले। वहीं सिंहेश्वर को 10,601 वोट मिले।
1967: निर्दलीय उम्मीदवार को मिली जीत
दो बार के विधायक शुम नारायण प्रसाद को 1967 में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार एस. शाह को 9,738 वोट से जीत मिली। एस. शाह को कुल 17,040 वोट मिले। वहीं शुभ नारायण को 7,302 वोट मिले।
1969 में शत्रु मर्दन शाही ने स्वतंत्र पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के अश्विनी कुमार मित्रा को 6,642 वोट से हराया। शत्रु मर्दन को कुल 16,648 वोट मिले। वहीं, अश्विनी कुमार को 10,006 वोट मिले।
1972: कांग्रेस की वापसी
1972 में लौरिया सीट से कांग्रेस के फुलेना राव को 3,075 वोट से जीत मिली। इस चुनाव मेंं उन्होंने जनसंघ के सुवा नारायण प्रसाद दूसरे नंबर पर रहे। फुलेना राव को कुल 15,561 वोट मिले। वहीं, सुवा नारायण को 12,486 वोट मिले। इसके बाद लौरिया सीट से 1977,1980,1985 में कांग्रेस के विश्वमोहन शर्मा को जीत मिली।
- 1977 में उन्होंंने जनसंघ के विनय शंकर सिंह को 8,394 वोट से हराया। इस चुनाव में विश्वा मोहन कुल 14,873 वोट मिले। वहीं, विनय शंकर सिंह को 6,479 वोट मिले।
- 1980 में कांग्रेस के विश्वमोहन शर्मा ने जनता पार्टी के ऐजाज अहमद को 17,483 वोट से हराया। इस चुनाव में विश्वामोहन को 31,344 वोट मिले। वहीं ऐजाज को कुल 13,861 वोट मिले।
- 1985 में विश्वामोहन ने लोकदल के राम प्रसाद यादव को 21,002 वोट से हराया। इस चुनाव में विश्वामोहन को कुल 36,123 वोट मिले। वहीं राम प्रसाद यादव को 15,121 वोट से संतोष करना पड़ा।
1990: जनता पार्टी को मिली जीत
- लौरिया सीट से हैट्रिक लगा चुके विश्वमोहन शर्मा को 1990 में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में जनता दल के राण विजय शाही ने 9,254 वोट से जीत हासिल की। वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस के विश्वमोहन शर्मा रहे। रणविजय शाही को कुल 40,199 वोट मिले। वहीं कांग्रेस विश्वामोहन को 30,945 वोट मिले।
- 1995 में जनता दल के रण विजय शाही ने 6,396 वोट से जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस के विश्वा मोहन शर्मा दूसरे नंबर पर रहे। इस चुनाव में रणविजय शाही को कुल 38,778 वोट मिले। विश्वमोहन शर्मा को 32,382 वोट मिले।
2000: विश्वमोहन शर्मा की वापसी
लगातार दो चुनाव में हारने के बाद से 2000 में कांग्रेस के विश्वमोहन शर्मा ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में विश्वमोहन ने 15,496 वोट से जीत हासिल की। दूसरे नंबर पर राजद के रणविजय शाही रहे। विश्वमोहन को कुल 41,016 वोट मिले। वहीं, रण विजय को 25,520 वोट मिले।

2005: जदयू को पहली जीत मिली
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। फरवरी 2005 में लौरिया सीट से जदयू के प्रदीप सिंह को जीत मिली। इस चुनाव में प्रदीप सिंह ने बसपा के शंभू तिवारी को मात्र 54 वोट से हराया। प्रदीप सिंह को कुल 21,775 वोट मिले। वहीं शंभू तिवारी को 21,721 वोट मिले। अक्तूबर 2005 में प्रदीप सिंह ने 2024 वोट से जीत हासिल की। वहीं शंभू तिवारी दूसरे नंबर पर रहे। प्रदीप सिंह को कुल 28,089 वोट मिले। शंभू तिवारी को 26,065 वोट मिले।
2010: विनय बिहारी बने विधायक
- 2010 में लौरिया सीट से निर्दलीय उम्मीदवार विनय बिहारी को जीत मिली। इस चुनाव में उन्होंने दो बार के विधायक जदयू के प्रदीप सिंह को 10,881 वोट से हराया। विनय बिहारी को कुल 38,381 वोट मिले। प्रदीप सिंह को 27,500 वोट मिले थे।
- 2015 में विनय बिहारी ने भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने राजद के रण कौशल प्रताप सिंह को 17,573 वोट से हराया। विनय बिहारी को कुल 57,351 वोट मिले। वहीं रण कौशल को कुल 39,778 वोट मिले थे।
- 2020 में विनय बिहारी ने जीत कर हैट्रिक लगाई। वहीं, राजद के शंभू तिवारी दूसरे नंबर पर रहे। विनय बिहारी को 77,927 वोट मिले। वहीं, शंभू तिवारी को 48,680 वोट मिले। लौरिया सीट से जीत कर विनय बिहारी बिहार सरकार में मंत्री बने। उन्होंने कला और संस्कृति मंत्रालय संभाला था।
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